Monday, October 18, 2021

खड़े होकर किए जाने वाले योग मुद्रा || Standing Yoga Pose In Hindi

        खड़े होकर किए जाने वाले योग मुद्रा मे शक्ति और लचीलापन दोनों की आवश्यकता होती है, यह हठ योग अभ्यास का एक प्रमुख भाग है | यह आसन आमतौर पर अन्य की तुलना में कुछ कम समय के लिए अभ्यास किए जाते हैं | एक योग्य योग प्रशिक्षक को ढूंढना सबसे अच्छा है, जो आपको खड़े होने वाले योग आसन के सिधाई को सिखाने के लिए है | खड़े होकर किए जाने वाले योग मुद्रा के कई फायदे हैं |  
        योग में अनेक खड़े होकर किए जाने वाले आसन हैं जिनमें से करीब 21 प्राथमिक खड़े होकर किए जाने वाले आसन है| नीचे दिए गए चित्र और नाम  के आधार पर खड़े होकर किए जाने वाले योगासन की हमारी सूची देखें |

Asana Name :-    Padahastasana

Sanskrit Name :-   पादहस्तासन

English Name :- Hand To Feet Pose


Asana Name :-     Adho Mukha Svanasana 
Sanskrit Name :-   
 अधोमुख श्वानासन
English Name :-        
Downward Facing Dog



Asana Name :-   Utkatasana 
Sanskrit Name :-  
उत्कटासन 
English Name :-  
Chair Pose



4. गरुड़ासन

Asana Name :-  Garudasana 
Sanskrit Name :-   
गरुड़ासन 
English Name :-   
Eagle Pose


5. उत्थिता हस्त पदंगुष्ठासन  

Asana Name :-  Utthita Hasta Padangusthasana
Sanskrit Name :-     
उत्थिता हस्त पदंगुष्ठासन
English Name :-      
Extended Hand-to-big-toe pose


Asana Name :-      Utthita Parsvakonasana 
Sanskrit Name :-   
उत्थिता पार्श्वकोणासन 
English Name :-    
Extended Side Angle Pose



7. त्रिकोणासन

Asana Name :-    Trikonasana 
Sanskrit Name :-     
त्रिकोणासन
English Name :-    
Triangle Pose



8. मलासना 

Asana Name :-     Malasana 
Sanskrit Name :-    
मलासना 
English Name :-     
Garland Pose

  
9. अंजनेयासन  

Asana Name :-           Anjaneyasana 
Sanskrit Name :-       
अंजनेयासन   
English Name :-    
Crescent Moon



10. कोनासन

Asana Name :-   Konasana 
Sanskrit Name :-    
कोनासन 
English Name :-    
Sideways Bending Pose   


11. कटिचाक्रासन 

Asana Name :-   Katichakrasana 
Sanskrit Name :-  
कटिचाक्रासन   
English Name :-   
Standing Spinal Twist Pose


12. अर्ध चक्रासन

Asana Name :-    Ardha Chakrasana
Sanskrit Name :-      
अर्ध चक्रासन
English Name :-    
Standing Backward Bend Pose



13. वीरभद्रासन

Asana Name :-     Virabhadrasana 
Sanskrit Name :-     
वीरभद्रासन
English Name :-   
Warrior Pose



14. प्रसार पादहस्तासन 

Asana Name :-   Prasarita Padahastasana
Sanskrit Name :-    
प्रसार पादहस्तासन
English Name :-   
Standing Forward Bend with Feet Apart Pose



15. वृक्षासन 

Asana Name :-   Vrikshasana
Sanskrit Name :-    
वृक्षासन 
English Name :-   
 Tree Pose

Asana Name :-     Natarajasana 
Sanskrit Name :-       
नटराजसन  
English Name :-          
Lord of the Dance



17. ताड़ासन    

Asana Name :-     Tadasana   
Sanskrit Name :-      
ताड़ासन   
English Name :-          
 Mountain Pose



18. दुर्वासासन    

Asana Name :-    Durvasasana    
Sanskrit Name :-   
दुर्वासासन    
English Name :-      
Durvasa's Pose

19. त्रिविक्रमासन   

Asana Name :-  Trivikramasana    
Sanskrit Name :-   
त्रिविक्रमासन 
English Name :-   
  Standing Splits


                   
20. अर्ध चंद्रासन

Asana Name :-    Ardha Chandrasana
Sanskrit Name :-     
अर्ध चंद्रासन
English Name :-   
 Half Moon Pose

21. पार्श्वोत्तानासन 

Asana Name :-    Parshvottanasana    
Sanskrit Name :-    
पार्श्वोत्तानासन 
English Name :-   
 Intense Side Stretch 



Friday, October 8, 2021

मत्स्येन्द्रासन करने का सही तरीका और उसके फायदे || The right way and the Benefits of Matsyendrasana


मत्स्येन्द्रासन 

          मत्स्येन्द्रासन संस्कृत भाषा से लिया गया है| यह आसन बैठकर किया जाता है | इसके अभ्यास करने से शरीर की मुद्रा में सुधार होता है तथा पाचन तंत्र को बेहतर करने के लिए यह बहुत ही सरल आसन है | मत्स्येन्द्रासन के तीन मुख्य गुण है | यह मन, शरीर और आत्मा को उत्तेजित करता है | यदि आप तनाव महसूस कर रहे हैं | और एक ही स्थिति में काम करने से कठोर महसूस कर रहे हैं | या यदि आप बस एक कार्य दिवस में अंत में आराम करना चाहते हैं तो बैठे हुए बोर्ड के कुछ मिनट ठीक वहीं आराम पा सकते हैं | जिसकी आपको आवश्यकता हो सकती है|

मत्स्येन्द्रासन  :- Ardha Matsyendrasana 

Meaning :- Ardha -  Half ; Matsyendra - king of the fish ; Asana - Pose
English Name :- Half Spinal Twist Pose
         मत्स्येन्द्रासन हठयोग में सबसे अच्छी और सबसे महत्वपूर्ण आसनों में से एक है | इसके बहुत सारे लोग हैं जो शरीर के सभी अंगों को प्रभावित करते हैं | जैसा कि पूर्ण मत्स्येन्द्रासन करने में थोड़ा कठिन है इसलिए हम पहले अर्ध मत्स्येन्द्रासन का अभ्यास करेंगे |
         यदि आप यह यह सोच रहे हैं कि यह आसन कैसे करें यह मार्गदर्शिका आपके लिए हैं |

कैसे करें मत्स्येन्द्रासन 

  1. मत्स्येन्द्रासन आसन करने के लिए अपने अपनी चटाई पर दोनों पैरों को सीधा करके बैठ जाएं और पैरों को साथ में रखें, की हड्डी सीधी रखें |
  2. अब लंबी गहरी सांस लेते हुए बाएं पैर को मोडे और बाएं पैर के की एड़ी दाहिने के पास रखें | 
  3. दाहिने पैर को बाएं घुटने के ऊपर ले जाएं \
  4. बाएं हाथ को दाएं घुटने के ऊपर और दाएं हाथ को अपने पीछे रखें |
  5. इसी तरह अपने कमर, कंधे और गर्दन को दाएं ओर मोड़े  और दाएं कंधे के ऊपर अपनी ठोड़ी को रखें |
  6. धीरे-धीरे अपनी कमर को सीधा करने की कोशिश करें |
  7. इस आसन में थोड़ी देर रुके और लंबी गहरी सांस ले और लंबी गहरी सांस छोड़ें |
  8. वापस आने के लिए सांस छोड़ते हुए पहले दाहिने हाथ छोड़े फिर कमर फिर छाती अंत में गर्दन को आराम से सीधा करें |
  9. एक ही प्रक्रिया दूसरी तरफ भी दोहराएं |
  10. इस आसन का अभ्यास करते समय यह जरूर ध्यान रखें कि आप आसन का अभ्यास बहुत धीरे करें क्योंकि तेज गति से आपकी गर्दन या आपके पीठ के निचले हिस्से में चोट लग सकती है |
        इस आसन के अभ्यास के दौरान सांसो पर ध्यान देना अति आवश्यक है |  जैसे कि जब आप शरीर को अंतिम मुद्रा में मोड़ते हैं तो सुनिश्चित करें कि आप सांस छोड़ते हैं सांस छोड़ने से आपको झुकने में अधिक मदद मिलेगी | और जब आपका आसान पूरा हो जाता है तो आप पूरी तरह सांस छोड़ते हैं और मोड़ से अपना संतुलन पाते हैं तो सामान्य रूप से सांस लेना शुरू करें | और जो आप मूल मुद्रा में वापस आए तो धीरे-धीरे और गहरी सांस लें |

     इस आसन का अभ्यास आप 30 सेकंड से 2 मिनट तक कर सकते हैं |

सावधानी और चेतावनी

यदि इस आसन में आपको अपने पैर पकड़ने में या किसी और कदम में आपको इसी प्रकार की कोई परेशानी है तो आप इन बातों का ध्यान रख सकते हैं |
  • यदि आपकी पीठ की किसी प्रकार की कोई सर्जरी हुई है तो इस आसन का अभ्यास करने से बचना चाहिए|
  • यह आसन गर्भवती महिलाओं के लिए उचित नहीं है |
  • पेट में कोई गंभीर बीमारी हो तो इस आसन का अभ्यास नहीं करें |
  • पेप्टिक अल्सर और हर्निया से पीड़ित लोगों को का अभ्यास नहीं करना चाहिए |
  • हल्के कमर दर्द के लिए यह आसन उपयोगी हो सकता है किंतु गंभीर दर्द में का अभ्यास करना उचित नहीं है |

मत्स्येन्द्रासन के अद्भुत फायदे

  1. मत्स्येन्द्रासन रीढ़ की हड्डी लचीली बनाता है |
  2. मत्स्येन्द्रासन फेफड़ों की ऑक्सीजन की आपूर्ति पूरी करता है |
  3. यह आसन पीठ के दर्द और कठोरता में राहत देता है |
  4. यह आसन आपके पाचन तंत्र को नियंत्रण करता है और इस प्रकार पाचन में यह सुधार करता है|
  5. यह मेरुदंड को मजबूत करता है और उसमें लचीलापन बढ़ाता है |
  6. इस आसन का अभ्यास करने से शरीर की मुद्रा में सुधार होता है |
  7. यह कब्ज से बचने के लिए बहुत ही अच्छा उपाय है |
  8. यह आसन कंधे, गर्दन और कूल्हों को मजबूत करता है |
  9. यह जांघों की आंतरिक मांसपेशियों में खिंचाव देता है जिससे उसे आवश्यकता होती है |
  10. यह रीढ़ की सामान्य घुमाओ को बनाए रखने में सहायता करता है जिससे इसकी प्राकृतिक संरेखण बनी रहती है |
  11. पीठ के निचले हिस्से की मांसपेशियों को मुक्त करता है और पीठ के निचले हिस्से के दर्द से राहत देता है |
  12. चिंता और तनाव जैसी परेशानियों से मुक्ति पाने में सहयोग करता है |
  13. साइटिका और स्लिप डिस्क के रोगियों के लिए यह रामबाण इलाज है |
  14. मत्स्येन्द्रासन आसन मन को शांत करने में मदद करता है, और आप तनावमुक्त महसूस कर बेहतर नींद ले पाते हैं |

मत्स्येन्द्रासन के बाद किए जाने वाले आसन

  • पश्चिमोत्तानासन (Paschimottanasana)
  • जानू सिरसासन (Janu sirsasana)

मत्स्येन्द्रासन के पहले किए जाने वाले आसन

  • बधा कोणासन (Baddha Konasana)
  • सुप्त पदंगुष्ठासन (Supta padangusthasana)
  • विरासन (Virasana)

    Healthy Long Life के इस ब्लॉग पे हम आपको  कुछ ऐसे ही असनो के बारे में बताये गे | ओर जानकारी के लिए हमारे साथ जुड़े रहे और अपनी टिप्पणी देना न भूले | 


    Monday, October 4, 2021

    अधोमुख श्वानासन करने का सही तरीका और उसके फायदे || The right way and the Benefits of Adho Mukha Svanasana

    अधोमुख श्वानासन


        अधोमुख श्वानासन हिंदी में अधोमुख संवासन कहते हैं | योग के अभ्यास में यह बहुत ही आम आसन है | योगा के छात्रों को शुरुआत में इस आसन का अभ्यास करने में चुनौती हो सकती है | किंतु बहुत जल्द ही यह छात्रों का सबसे प्रिय आसनों में से एक आसन बन जाता है | क्योंकि यह मांसपेशियों को बहुत ही आसानी से खोलता है और साथ ही कई बड़े आसनों का अभ्यास करने के लिए भी यह आसन बहुत ही उत्तम है |

    अधोमुख श्वानासन :- Adhomukha Svanasana

    Meaning :- Adho -  Forward ; Mukha - Face ; Svana- Dog ; Asana - Pose
    English Name :- Downward facing Dog Pose. 

    अधोमुख श्वानासन के अद्भुत फायदे

    • इस आसन के अभ्यास से पूरा शरीर हाथ, कंधे, पेट और पैर मजबूत होते हैं | 
    • यह मन को शांत करता है |
    • रक्त संचार बेहतर करता है |
    • यह आसन रीढ़ की हड्डी में खिंचाव से शरीर के विभिन्न अंगों में ऑक्सीजन की आपूर्ति में सुधार करता है |
    • इस आसन के अभ्यास के दौरान आपका शरीर उल्टी V की स्थिति में है | इसका अर्थ है आपका ह्रदय आपके सिर के ऊपर है | इससे आपके सिर में रक्त का प्रभाव बेहतर होता है | इस योगासन का रोजाना अभ्यास करने से आपको ऊर्जा मिलती है |
    • इस आसन का लगातार अभ्यास करने से हमारे शरीर की मुद्रा में सुधार होता है |
    • यह आसन बैक बैंडिंग और फॉरवर्ड बेंडिंग के आसन के बीच में रीड की हड्डी को आराम देने के लिए एक बेहतरीन मुद्रा है |
    • यह आसन ना केवल रीढ़ की हड्डियों के लिए बल्कि बछड़ों (Calves) और हैमस्ट्रिंग (Hamstrings) मांसपेशियों को मजबूत करता है |
    • यह असर कमर के निचले भाग के दर्द में राहत देने के लिए बहुत ही उपयोगी माना जाता है

    कैसे करें अधोमुख श्वानासन

    • अधोमुख श्वानासन आसन करने के लिए अपने योग कटाई पर मार्जारियासन (Marjariasana) में आ जाएं | इस आसन में अपनी कलाइयों को कंधों के नीचे और घुटनों को कूल्हों (Hips)के नीचे रखें |
    • आप अपने पैरों को और अपने हाथों को सीधा करते हुए और सांस को छोड़ते हुए (Hips)कूल्हों को ऊपर उठाएं, आसन पूर्ण होने पर आपका शरीर उल्टी V के आकार का बनेगा |
    • हाथ और पैर की उंगलियां सीधे आगे की ओर इशारा करते हुए फैलाएं और अग्र-भुजाओं (Forearms) से  नीचे की और उंगलियों तक पहुंचाएं |
    • कानों को भीतरी भुजाओं से छूकर गर्दन को लंबा रखें | कॉलर बोन को चौड़ा करने के लिए अपनी ऊपरी भुजाओं को बाहर की और घूमाए |
    • अपने हाथों को जमीन में दबाएं और नाभि की और देखें | अपने सिर को लटकने दे और और अपने कंधों के ब्लेड को अपने कानों से दूर अपने कूल्हों की ओर ले जाए |
    • मुद्रा में आने के बाद लंबी गहरी सांस ले |
    •  सांस छोड़ते हुए घुटनों को मोड़ मार्जारियासन (Marjariasana) और में आ जाएं और आराम करें |




    सावधानी और चेतावनी
    • इस आसन का अभ्यास गर्भवती महिलाएं नहीं कर सकती |
    • अगर आपकी कलाई में किसी प्रकार की पुरानी चोट है तो इस आसन का अभ्यास ना करें |
    • यदि आपको उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, रीड की हड्डी में किसी प्रकार की परेशानी है तो इस आसन का अभ्यास ना करें |

    अधोमुख श्वानासन के बाद किए जाने वाले आसन

    • चतुरंगा धंडासन
    • उर्ध्व मुख संवासना

    अधोमुख श्वानासन के पहले किए जाने वाले आसन

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    Wednesday, September 29, 2021

    लोअर बैक पेन से राहत देने वाले 9 महत्वपूर्ण आसन || Yoga Pose for Lower Back Pain

    लोअर बैक पेन से राहत देने वाले 9 महत्वपूर्ण आसन  || Yoga Pose for Lower Back Pain      

    पीठ के निचले हिस्से में दर्द आज के समय में एक बड़ी ही आम परेशानी बन गई है |  और दर्द के कई कारण भी हो सकते हैं, कमजोर रीड की हड्डी, पूरे दिन बैठने की खराब मुद्रा, या पूरे दिन खड़े रहने का काम | पीठ के निचले हिस्से में दर्द का कारण तनाव भी हो सकता है | यह जानना अति आवश्यक है कि पीठ के दर्द का कारण क्या है | ताकि दर्द का सही कारण जानकर सही उपाय किया जा सके, और दर्द दोबारा होने से रोक सके | लेकिन ज्यादातर परिस्थितियों के लिए कुछ आसान आसन है जो सभी प्रकार के कमर के निचले दर्द से राहत दिला सकते हैं |

           योग के अभ्यास से कमर को लचीलापन और कमर की हड्डी मजबूत व मुद्रा को सही किया जा सकता है - और यह सभी स्वस्थ पीठ के लिए आवश्यक है | कई प्रोफेशनल फिजिकल थेरेपी मानते हैं कि योग का अभ्यास प्रतिदिन करना सुरक्षित है | लेकिन यह जानना भी अति आवश्यक है कि आप अपने शरीर के अनुसार तथा दर्द के कारण के अनुसार आसन का अभ्यास करें | और ऐसा कुछ भी ना करें जिसके कारण आपकी परेशानी ओर बदतर बना दे | यदि आपकी पीठ के निचले हिस्से की चोटों का कोई इतिहास है, और आपकी डिस्क में कोई समस्या है, या दर्द जो 72 घंटे से अधिक समय तक रहता है, तो कोई भी व्यायाम करने से पहले एक बार भौतिक चिकित्सक को देखना अति आवश्यक है |

         वहीं दूसरी ओर यदि आपकी पीठ के निचले हिस्से में दर्द सामान्य दर्द है, तो किसी भी जकड़न और संरेखण के मुद्दों को दूर करने के लिए कुछ योगासन करने की कोशिश करना उचित है। लेकिन अगर आपको गंभीर दर्द होता है, तो कभी-कभी दर्द या पुराने दर्द वाले लोगों को कुछ मुद्राओं से बहुत फायदा हो सकता है जो आपकी रीढ़ की हड्डी को आराम दे, आपकी मांसपेशियों को फैलाने और मजबूत करने में मदद कर सकते हैं, और अपनी पीठ को उचित संरेखण में वापस कर सकते हैं |

              इस लेख में हम आपको कुछ ऐसे आसनों के बारे में बताएंगे जो करने में बहुत ही सरल है साथ ही जिन का परिणाम बहुत ही अच्छा है |

    1. बालासन  Child Pose (Balasana)

    बालासन 

               बालासन को अंग्रेजी भाषा में कैट चाइल्ड पोज (Child Pose) भी कहते हैं | बालासन देखने में बहुत ही सरल आसन है, देखने वालों को ऐसा लगता है कि इस में आप आराम कर रहे हैं किंतु आसन का अभ्यास करते समय हमारे पीठ को इस मुद्रा में सक्रिय खिंचाव होता है जिसमें पीठ को लंबा करने में मदद मिलती है | यह एक लंबे दिन की थकावट को दूर करने के लिए सोने से पहले किया जाने वाला बहुत ही उत्तम आसन है |
    यह मुद्रा किसी भी अभ्यास को करने से पहले पीठ को एक हल्का खिंचाव देने के लिए अति उत्तम आसन है | यह गर्दन कंधोऔर धड़ की मांसपेशियों को खुलने में मदद करता है और समय के साथ लचीलापन बढ़ाता है |

    2. मार्जरी आसन  Cat/ Cow (Marjariasana)

    मार्जरी आसन 
                  मार्जरी आसन को अंग्रेजी भाषा में कैट स्ट्रेच पोज (Cat Stretch Pose) भी कहते हैं | क्योंकि इस आसन के अभ्यास के दौरान शरीर को बिल्ली के सम्मान ही बढ़ाया जाता है इसलिए इसको यह नाम दिया गया था | 
    मार्जरी आसन पीड़ादायक दर्द को एकदम ठीक करने और पीठ की मांसपेशियों को ढीला करने के लिए उत्तम आसन है | इस असम का अभ्यास आप प्रतिदिन योगाभ्यास के रूप में भी कर सकते हैं |

    3. अधोमुख श्वानासन Downward Facing Dog (Adho Mukha Shvanasana)

    अधोमुख श्वानासन

               अधोमुख श्वानासन को अंग्रेजी भाषा में Downward Facing Dog भी कहते हैं | यह आसन हैमस्ट्रिंग Hamstring Muscles और बछड़ों की मांसपेशियों और हाथ पैरों की मांसपेशियों को मजबूत करता है | यह पीठ और साइटिका के दर्द को कम करता है और कंधों को मजबूत करता है | यह  पेट की मांसपेशियां abdominal muscles को भी  मजबूत करता है | यह आसन हमें तनाव मुक्त करता है | रक्त परिसंचरण को उत्तेजित करता है | 

    4. पादहस्तासन Standing Forward Bend (Padahastasana)

    पादहस्तासन 

              पादहस्तासन को अंग्रेजी भाषा में स्टैंडिंग फॉरवर्ड बैंड (Standing Forward Bend) भी कहते हैं |यह आसन हैमस्ट्रिंग मांसपेशियों Hamstring Muscles  और पीठ की मांसपेशियों को लचीलापन बढ़ाता है | इस असम के कई फायदे हैं | जैसे कि : यह पाचन अंगों की मालिश करता है , पेट फूलना, अपचन, कब्ज और गैस की परेशानी कम करता है, चयापचय में सुधार करता है, जीवन शक्ति बढ़ाता है, शरीर में लचीलापन बढ़ाता है | इस आसन के अभ्यास से कंधों की मांसपेशियां तनाव रहित होती है |

    5. भुजंगासन  Cobra Pose (Bhujangasana )

    भुजंगासन 

              भुजंगासन को अंग्रेजी भाषा में कोबरा पोज (Cobra Pose ) भी कहते हैं | यह आसन पेट के बल उल्टा लेट कर किया जाता है | यह मुद्रा आपकी छाती की मांसपेशियों को खोलने में, आपके पेट की मांसपेशियों को फैलाने में और आपकी पीठ को जोड़ने का काम करता है |

    6. कपोतासन Reclined Pigeon Pose (Kapotasana)



                       कपोतासन को अंग्रेजी भाषा में रिक्लाइंड पिजन पोज (Reclined Pigeon Pose) भी कहते हैं | यह आसन योग के नए छात्रों के लिए थोड़ा मुश्किल है | हिप रोटेटर और फ्लेक्सर्स को फैलाता है। यह आसन पीठ दर्द से राहत नहीं दिला सकता किंतु तंग कूल्हे पीठ के निचले हिस्से में दर्द में योगदान कर सकते हैं। यह कूल्हों को खोलने के लिए सबसे अच्छे स्ट्रेच में से एक है। जो लोग पूरे दिन बैठकर काम करते हैं उनके लिए यह प्रतिदिन किए जाने वाला अच्छा आसन है

    7. मत्स्येन्द्रासन  Reclined Supine Twist (Matsyendrasana)

    मत्स्येन्द्रासन 

                मत्स्येन्द्रासन को अंग्रेजी भाषा में रिक्लाइंड सुपाइन ट्विस्ट पोज (Reclined Supine Twist) भी कहते हैं | |मत्स्येन्द्रासन आसन का अभ्यास करने से बहुत से रोग दूर होते हैं | इस आसन का अभ्यास करने से कमर हमेशा स्वस्थ और लचीला बना रहता है | इसका अभ्यास करने से पेट, कमर और जोड़ों के दर्द की समस्या से राहत मिलती है | पाचन शक्ति को सुचारू रूप से करने के लिए आसन का अभ्यास किया जाता है |

    8. उत्थित त्रिकोणासन  Extended Triangle Pose (Utthita Trikonasana)

    उत्थित त्रिकोणासन 
            उत्थित त्रिकोणासन को अंग्रेजी भाषा में कैट एक्सटेंड ट्रायंगल पोज ( Extended Triangle Pose ) भी कहते हैं | यह खड़े होकर किए जाने वाले आसन है | यह आसन रीड, कूल्हों और कमर सहित सभी मांसपेशियों को होता है | साथ ही यह है कंधों, छाती और पैरों को भी मजबूत बनाता है | यह आसन पीठ और गर्दन के दर्द को कम करने में मदद करता है |

    9. शलभासन  Locust Pose  (Salabhasana)

             शलभासन को अंग्रेजी भाषा में कैट लोकस्ट पोज (Locust Pose) भी कहते हैं | यह आसन पेट के बल किए जाने वाला एक बहुत ही सरल आसन है | यह कमल आसन पीठ के निचले हिस्से में दर्द और थकान को दूर करने में मदद करता है | यह पीठ धड़ और हाथों को मजबूत करता है |

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    Sunday, September 26, 2021

    कमजोर पाचन के लिए योग || Best 10 Yoga asanas for digestion

     पाचन के लिए योग || Best 10 Yoga asanas for weak digestion

             जब आपको पाचन संबंधी समस्याएं होती हैं, तो आप तेजी से राहत पाना चाहते हैं। कमजोर पाचन आज के समय में बड़ी आम परेशानी है | कमजोर पाचन होने के कई कारण होते हैं जैसे कि डायरिया कॉन्स्टिपेशन और आदि कई परेशानियां | च के कारण पेट फूलना, पेट दर्द, एसिडिटी, कब्ज और लूज मोशन जैसी कई स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। भोजन का पाचन आपके मुंह में शुरू होता है और फिर पेट और फिर आंतों तक जाता है। भोजन टूट जाता है और शरीर द्वारा अवशोषित कर लिया जाता है। पाचन प्रक्रिया से अपशिष्ट उत्पाद गुदा के माध्यम से समाप्त हो जाते हैं और इसे शौच कहा जाता है। कमजोर पाचन हमारे गलत खान पीन के तरीके और अस्वस्थ जीवन शैली के कारण भी हो सकता है | पाचन तंत्र को बेहतर करने के लिए आजकल बाजार में कई प्रकार की दवाइयां उपलब्ध कराई जा रही हैं किंतु यह दवाइयां हमें फायदे के साथ-साथ कई प्रकार के नुकसान भी देती है और साथ ही यह पाचन की समस्या को जड़ से समाप्त भी नहीं करती अगर हमें पाचन की समस्या के जड़ से मुक्ति चाहिए तो हमें इसके लिए कोई बेहतर उपाय देखना होगा और योग एक ऐसा ही बेहतर उपाय हैं | जो हमें कमजोर पाचन से मुक्ति दिला सकता है | जी हां, कई अध्ययनों से  यह पाया गया है कि योग के लगातार अभ्यास करने से ना ही हमारा शरीर लचीला और मजबूत होता है बल्कि यह हमारे पाचन तंत्र को बेहतर करता है | स्वस्थ शरीर के लिए भोजन का उचित पाचन आवश्यक है। आपकी खाने की आदतें और गतिविधियां सीधे पाचन प्रक्रिया को प्रभावित करती हैं। आप अपनी जीवनशैली या खाने की आदतों में बदलाव करके अपने पाचन तंत्र को स्वस्थ और मजबूत रख सकते हैं। 

    योग क्या है?

             योग एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके निरंतर उपयोग से हम अपने शरीर को सभी परेशानियों से अपने मन को सभी चिंताओं से मुक्त कर सकते हैं | योग तनाव को कम करके रक्त संचार में वृद्धि करता है तथा आंतों की गतिशीलता को बढ़ाकर पाचन संबंधित सभी समस्याओं को दूर करने में मदद करता है | हालांकि पाचन संबंधित समस्याओं में इसकी भूमिका को समझने के लिए वैज्ञानिकों को और अधिक शोध करने की आवश्यकता है | पाचन तंत्र को सुधारने के लिए तथा इससे संबंधित सभी परेशानियों को कम करने के लिए एलोपैथिक दवाइयां है किंतु इन सभी दवाइयों से हमारे शरीर पर किसी ना किसी प्रकार का आहत होता हैं तथा दूसरी तरफ योग जिसकी निरंतर अभ्यास से हम अपने पाचन तंत्र को सुधार सकते हैं साथ ही इससे शरीर को परेशानी नहीं होती |

    योगासन पाचन में सुधार कैसे कर सकते हैं ?

           योग के नियमित अभ्यास से शरीर को प्रभावी ढंग से विषहरण किया जाता है, खराब आहार, अस्वस्थकर  जीवन शैली और तनाव से जमा हुआ विषहरण पदार्थ बाहर निकल जाता है | इसका नियमित रूप से अभ्यास करके, अपने तनाव को कम कर तथा अपनी दिनचर्या में कुछ शांति जोड़कर हम सहानुभूति तंत्रिका तंत्र को भी शांत कर सकते हैं | आसन के नियमित अभ्यास से हमारे पेट पर हल्का दबाव डालता है और यह हमारे पेट की आंतों की मालिश करता है | पाचन अंगों में रक्त का संचार बनाता है जिससे पाचन में सहायता मिलती है | मल त्याग नियंत्रित होता है और कब्ज की परेशानी भी दूर होती है |

    कमजोर पाचन के लिए 10 योग आसन

    1. भारद्वाजासन (Seated Twist Pose)
                         भारद्वाजासन के अभ्यास से शरीर की मांसपेशियां तथा कमर की और कंधों की मांसपेशियां लचीली बनती है | यह आसन पीठ दर्द, पेट की चर्बी, कमर की चर्बी, कब्ज की समस्या,गर्दन के दर्द, कमर दर्द जैसी परेशानियों को भी दूर करता है | साथ ही इस आसन के नियमित अभ्यास से कूल्हों, कंधों, कमर, गर्दन की मांसपेशियां मजबूत व लचीली बनती है |  यह आसन कमर और कंधों को लचीला और मजबूत बनाता है | कमर में होने वाले खिंचाव के कारण यह आसन हमारे मेटाबॉलिज्म को बूस्ट पड़ता है तथा हमारी पाचन शक्ति को भी बढ़ाता है जिससे हमारे पेट से जुड़ी कई समस्याएं भी समाप्त होती हैं |

                               पादांगुष्ठासन आगे की ओर झुकने वाला आसन है | इस आसन के अभ्यास से हमारे कमर की मांसपेशियों लचीली बनती है | यह आसन पेट की चर्बी को कम करता है | यह आसन श्रोणि  मांसपेशियों को मजबूत करता है और लचीला बनाता है | यह आसन तनाव, टेंशन, डिप्रैशन, एंजायटी जैसी कई समस्याओं के खतरे से भी बचाता है | खराब लाइफस्टाइल के कारण मोटापे और डायबिटीज जैसी समस्याएं होती है, इस आसन के अभ्यास से हम इन समस्याओं से भी मुक्ति पा सकते हैं | पादांगुष्ठासन के अभ्यास से लोअर बैक, पैर और एड़ी हैमस्ट्रिंग मसल, पेल्विक मसल और आदि कई मांसपेशियां मजबूत होती है और लचीलापन आता है |      
    पादांगुष्ठासन 


    3. नौकासन (Boat Pose)
                      नौकासन बैठकर किए जाने वाले आसनों की श्रेणी मे आता है | इस आसन को करने के दौरान हमारा    शरीर V अक्षर की आकृति का बन जाता है | नौकासन के अभ्यास से लोअर बैक, बायसेप्स मसल्स,  ट्राइसेप्स मसल्स, पैर के पंजे और टकले मजबूत बनाया जाता है | इस आसन को करने के कई फायदे हैं, यह आसन शरीर के एलाइनमेंट को सुधारता है, पाचन शक्ति को बढ़ाता है, शरीर के संतुलन को बेहतर करता है|
    नौकासन 

                                       
                             धनुरासन पेट के बल किए जाने वाला एक बहुत ही महत्वपूर्ण आसन है क्योंकि इस आसन के अभ्यास करते समय हमारा शरीर धनुष के आकार का हो जाता है इसलिए इसका नाम धनुरासन है | यह आसन डायबिटीज, अस्थमा, कब्ज, थायराइड जैसी कई बीमारियों के लिए रामबाण इलाज है | इस  आसन के अभ्यास से स्लिप डिस्क मे बहुत हद तक आराम मिलता है | धनुरासन वजन कम करने के लिए एक उत्तम योगासन है |
    इस आसन को करने से पेट पर दबाव पड़ता है जिससे पाचन तंत्र बेहतर होता है |
                               
    धनुरासन 

                           
                               सेतुबंध आसन में आप अपने शरीर को एक सेतु के आकार में बांधकर रोक सकते हैं इसलिए इसका नाम सेतुबंध आसन रखा गया है | सेतुबंध आसन कंधों, रीड की हड्डी को मजबूत करता है | यह आपकी गर्दन और रीढ़ की हड्डी में लचीलापन लाता है | सेतुबंध आसन पेट के के अंगों, फेफड़ों और थायराइड को उत्तेजित बनाता है तथा इनमें  रक्त संचार बढ़ाता है | यह आसन छाती, गर्दन और रीढ़ की हड्डी में खिंचाव लाता है | इस आसन के अभ्यास से चिंता, थकान, सिर दर्द और अनिद्रा कम होती है | यह आसन पाचन में भी सुधार लाता है | सेतुबंध आसन दमा हाई बीपी के पेशेंट के लिए बहुत ही उत्तम आसन है |
                           

    सेतुबंधासन 

                                               
    6.भुजंगासन (Cobra Pose)   
    भुजंगासन

    भुजंगासन 

                           भुजंगासन पेट के बल की जाने वाला आसन है यह आसन सूर्य नमस्कार के 12 मुद्राओं में से एक मुद्रा है | इस आसन में शरीर सांप की आकृति का बन जाता है जिस कारण इसे अंग्रेजी भाषा में Cobra pose भी कहते हैं | इस आसन से हमारी रीढ़ की हड्डी मजबूत व लचीली बनती है | भुजंगासन हर्निया के मरीजों को नहीं करना चाहिए | इस आसन के कई लाभ हैं जैसे की यह आसन पेट के नीचे हिस्से में मौजूद सभी अंगों के काम करने की क्षमता बढ़ाता है, पाचन तंत्र, मूत्र मार्ग की समस्याएं दूर होती हैं, फेफड़े, के, सीने और पेट के निचले हिस्से को अच्छे से खिंचाव मिलता है, टेंशन दूर होती है और डिप्रेशन से भी राहत मिलती है|                

    7.अधोमुख श्वानासन (Downward facing Dog Pose)  
                                             अधोमुख श्वानासन एक बहुत ही महत्वपूर्ण आसन है | यह आसन सूर्य नमस्कार के 12  आसनों में से एक आसान है | यह पेट की निचली मांसपेशियों को मजबूत बनाता है, रक्त संचार बढ़ता है, पाचन तंत्र सुधरता है, एंजाइटी, सिरदर्द, थकान जैसी परेशानियां कम करता है | मस्तिष्क में रक्त संचार बढ़ता है |
                           

    अधोमुख श्वानासन 




    8.त्रिकोणासन (Triangle Pose)
                         त्रिकोणासन खड़े होकर किए जाने वाला एक बहुत ही महत्वपूर्ण आसन है | इस आसन में हमारा शरीर त्रिकोण की आकृति का हो जाता है इसलिए इसे त्रिकोणासन कहते हैं | त्रिकोणासन कमर को कम करने के लिए एक अति उत्तम योगासन है यह मोटापा घटाने के साथ-साथ शरीर में लचीलापन भी लाता है | यह आसन हाइट बढ़ाने के लिए, फेफड़ों के लिए, शरीर में ऊर्जा बढ़ाने के लिए अति उत्तम आसन है | यह मधुमेह, कमर दर्द, एसिडिटी, चिंता व तनाव को भी कम करता है | यह स्टैमिना बनाता है शरीर को लचीला बनाता है शरीर में संतुलन बनाने के लिए उत्तम आसन है |
    त्रिकोणासन 


    9.मत्स्यासन (Fish Pose)
                     मत्स्यासन पीठ के बल किए जाने वाला आसन है | यह आसन सीने और गर्दन की मांसपेशियों में खिंचाव लाता है तथा कंधों गर्दन की मांसपेशियों को टेंशन से मुक्ति देता है | यह आसन दमा की परेशानी से भी मुक्ति देता है | इसके अभ्यास से गले और पाचन अंगों को अच्छी मसाज मिलती है | यह आसन कब्ज, सांस से संबंधित बीमारियां, हल्का पीठ दर्द, थकान बेचैनी जैसी परेशानियों से मुक्ति देता है | मत्स्यासन से पीठ और कमर मजबूत होती हैं तथा आसन के दौरान गर्दन में बनने वाले मोड़ से थायराइड में फायदा पहुंचता है |
    मत्स्यासन 


    10. अर्ध मत्स्येन्द्रासन (Half hold of Fish Pose)
                   अर्धमत्स्येंद्रासन को  हाफ स्पाइनल पोज या वक्रासन भी कहते हैं | अर्धमत्स्येंद्रासन आप की रीड की हड्डी के लिए अत्यंत लाभकारी है | यह आसन रीड की हड्डी को लचीली बनाता है, मसल को खोलता है| शरीर को तनाव और चिंता से मुक्त करता है |  पाचन तंत्र बेहतर करता है , मधुमेह को कंट्रोल करता है , कमर की अकड़न कम करता है, साथ ही पाचन तंत्र से संबंधित सभी परेशानियों से मुक्ति देता है | 
    अर्धमत्स्येंद्रासन 

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    Wednesday, September 22, 2021

    मत्स्यासन करने का सही तरीका और उसके फायदे || The right way and the Benefits of Matsyasana

    मत्स्यासन  करने का सही तरीका और उसके फायदे || The right way and the Benefits of Matsyasana

    मत्स्यासन 

    मत्स्यासन
    एक महत्वपूर्ण आसन है जो हठ योग का हिस्सा है | मत्स्यासन जिसमें मत्स्य का अर्थ मछली है और आसन की मुद्रा में आने के बाद आपका शरीर मछली के आकार का होता है | इस योग आसन का अभ्यास करने से शरीर में लचीलापन और ध्यान की समता भर्ती है | इस आसन लगातार अभ्यास करने से आप अपने शरीर में ऊर्जा महसूस करेंगे | यह आसन आपके पूरे शरीर में संतुलन ला सकता है | यदि इस आसन का अभ्यास पानी में किया जाए तो शरीर मछली की तरह महसूस होता है इसलिए इसे मत्स्यासन कहते हैं |

    अंग्रेजी नाम 

    Fish Pose

    मत्स्यासन के अद्भुत फायदे

    • इस आसन से गर्दन और छाती की मांसपेशियों में खिंचाव होता है| और कंधे, गर्दन की मांसपेशियों से टेंशन को मुक्ति मिलती है
    • यह आसन पेट को स्ट्रेच करता है और उसे टोन करता है इससे पेट और कमर में दर्द की समस्या से राहत मिल सकती है |
    • मत्स्यासन पीठ, कंधों और गर्दन की मांसपेशियों को मजबूत करता है |
    • यह आसन कूल्हों के जोड़ों और मांसपेशियों को अच्छा खिंचाव देता है |
    • इस आसन के लगातार अभ्यास से पेट की चर्बी को भी कम किया जा सकता है लेकिन पेट की चर्बी को कम करने के लिए इस आसन में कुछ देर के लिए रुकना अति आवश्यक है जिससे पेट में खिंचाव आए |
    • इस आसन के अभ्यास से छाती चौड़ी होती है जिन लोगों को फेफड़े और साँस से संबंधित रोग हैं उनके लिए यह आसन लाभकारी है |
    • यह आसन पेट की मालिश करता है जिससे यह कब्ज जैसी बीमारियों में भी लाभकारी है |
    • थायराइड के पेशेंट भी इसका लगातार अभ्यास करने से अपना थायराइड सही कर सकते हैं यह उन लोगों के लिए एक रामबाण इलाज है क्योंकि यह थायराइड जैसी परेशानी को जड़ से समाप्त करने की क्षमता रखता है |
    • मत्स्यासन के अभ्यास से गले और पाचन अंगों को अच्छी मसाज मिलती है |
    • मत्स्यासन के लगातार अभ्यास करने से कब्ज, सांस संबंधि बीमारियां, हल्का पीठ दर्द, थकान और बेचैनी जैसी कई परेशानियों से मुक्ति मिल सकती है|
    • बॉडी की एनर्जी को बूस्ट करने और थकान को दूर करने के लिए मत्स्यासन करें |

    कैसे करें मत्स्यासन

    • कमर के बल चटाई पर लेट जाएं और अपने हाथों को और पैरों को शरीर के साथ सीधा करें |
    • हाथों को कूल्हों के नीचे और हथेलियां जमीन की तरफ रखें और अपनी कोहनी को अपने शरीर के पास रखें|
    • अपने पैरों की पालथी मार ले या पद्मासन (Padmasana) भी लगा सकते हैं, जांघ और घुटने जमीन पर स्पर्श रखें |
    • सांस अंदर लेते हुए सीने को ऊपर की तरफ उठाएं, सिर को भी ऊपर की तरफ उठाएं और सिर का ऊपरी हिस्सा जमीन को छूता रहेगा |
    • यह ध्यान रखें कि आपका पूरा वजन आपकी कहानियों पर हो ना कि सिर पर |
    • आप जितना अपने सीने को और सिर को ऊपर उठाएंगे उतना ही आपके कंधों की मांसपेशियों पर हल्का दबाव पड़ेगा |
    • सांस की गति सामान्य रखें |
    • जब तक हो सके आसन में रहने की कोशिश करें लंबी गहरी सांस लेते रहें | 
    • सांस बाहर निकालते हुए अपने सीने और सिर को सामान्य स्थिति में वापस लौट आए | फिर धीरे से पैरों को वापस ले आए|
    • इस आसन का अभ्यास 15 से 50 सेकंड तक किया जा सकता है शुरुआत में कम देर इस आसन का अभ्यास करें और फिर धीरे-धीरे समय बढ़ाएं |

    सावधानी और चेतावनी

    • अगर घुटनों में ज्यादा दर्द हो तो यह आसन न करें |
    • हर्निया के पेशेंट को यह आसन नहीं करना चाहिए |
    • रीढ़ की किसी भी प्रकार की गंभीर बीमारी से ग्रस्त व्यक्तियों को यह आसन करना चाहिए |
    • यदि आपको किसी भी प्रकार की रक्त-चाप की समस्या है तो यह आसन ना करें |
    • माइग्रेन के पेशेंट को भी मत्स्यासन नहीं करना चाहिए |
    • मत्स्यासन आसन का अभ्यास खाली पेट करना चाहिए |
    • अगर आप शाम को यह आसन कर रहे हैं तो आसन से कम से कम 4 - 6 घंटा पहले भोजन कर ले |

    मत्स्यासन के बाद किए जाने वाले आसन

    मत्स्यासन के पहले किए जाने वाले आसन

    • वीरासना (Hero Pose)
    • सर्वांगासन (Shoulderstand)
    • हलासना (Bow Pose)
    • कर्णपिडासन (Knee To ear Pose)

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    Tuesday, September 21, 2021

    धनुरासन करने का सही तरीका और उसके फायदे || The right way and the Benefits of Dhanurasana

    धनुरासन करने का सही तरीका और उसके फायदे || The right way and the Benefits of Dhanurasana 

    धनुरासन 


     धनुरासन अर्थात धनुष + आसन | इस आसन के अभ्यास के दौरान हमारा शरीर धनुष के आकार का हो जाता है |इसके अभ्यास से आप की रीढ़ की हड्डी हमेशा स्वस्थ रहेगी | यह आसन कमर और रीढ़ की हड्डी के लिए लाभदायक है | यह एक महत्वपूर्ण आसन है जिसे करने के कई फायदे है | इस लेख में हम आपको धनुरासन के अद्भुत फायदे, धनुरासन करने का तरीका, आसन में की जाने वाली सावधानी और चेतावनी, धनुरासन के बाद किए जाने वाले आसन और धनुरासन से पहले किए जाने वाले आसन के बारे में बताएंगे | 

    अंग्रेजी नाम 

    Bow Pose

    धनुरासन के अद्भुत फायदे

    • धनुरासन करने से शरीर की कार्यप्रणाली मजबूत होती है | पेट से जुड़ी जटिल रोग जैसे कि एसिडिटी, गैस, खट्टी डकार और सामान्य पेट दर्द दूर होते हैं | यह आसन पाचन कार्यकौशलता बढ़ाता है |
    • यह आसन रीढ़ की हड्डी को मजबूत और लचीली बनाता है | यह आसन पेट दर्द के लिए रामबाण योग है| अगर आप इसका रोजाना अभ्यास करते हैं तो हमेशा के लिए कमर दर्द की परेशानी से निजात पा सकते है |
    • यह आसन बाजुओं, जांघ और पेट की मांसपेशियों को भी मजबूत करता है |
    • यह आसन अस्थमा रोगियों के लिए बहुत लाभकारी है | इसके अभ्यास से फेफड़ों की क्षमता को बढ़ाया जा सकता है जो अस्थमा रोगियों के लिए बहुत जरूरी है |
    • धनुरासन के अभ्यास से कब्ज,थकान, चिंता और मासिक धर्म में परेशानी को दूर किया जा सकता है |

    कैसे करें धनुरासन

    • किसी आसन पर पेट के बल लेट जाएं |
    • घुटनों को मोड़कर कमर के पास लाएं और हाथों से टखनों को टाइट से पकड़े ले |
    • श्वास भरते हुए अपने दोनों घुटनों और छाती को जमीन से ऊपर उठाने का प्रयत्न करें |
    • जितना हो सके अपनी जांघ और छाती को ऊपर उठाने की कोशिश करें |
    • इस आसन के दौरान आपका शरीर धनुष के समान लगेगा |
    • इस आसन में अपने शरीर के साथ ज्यादा जोर जबरदस्ती ना करें| आपका शरीर आपको जितनी इजाजत दे रहा है आप इस आसन को उतना ही करें|
    • श्वास पर ध्यान रखते हुए आसन में स्थिर रहे और चेहरे पर मुस्कान रखें |
    • 15 से 20 सेकंड के लिए मुद्रा में रहे | अभ्यास करते हुए आप इस आसन में रुकने का समय अपने हिसाब से बढ़ा या घटा सकते हैं | 
    • श्वास छोड़ते हुए पैर और छाती को धीरे-धीरे वापस जमीन पर लाएं | टखनों को छोड़ते हुए विश्राम करें |

    सावधानी और चेतावनी

    • यदि रीढ़ की हड्डी में चोट या लंबे समय से कोई गंभीर समस्या है तो यह आसन नहीं करना चाहिए |
    • यदि आपको उच्च रक्तचाप(High Blood Pressure), हर्निया(Hernia), कमर दर्द(Back Pain), सिर दर्द(Headaches), माइग्रेन(Migraine), गर्दन में चोट या हाल ही में कोईऑपरेशन हुआ है तो धनुरासन का अभ्यास ना करें |
    • गर्भवती महिलाएं इस आसन का अभ्यास ना करें तथा मासिक धर्म में भी इस आसन का अभ्यास नहीं करना चाहिए |
    • अगर आपको कंधों में किसी प्रकार की परेशानी है या आपके घुटने और कंधों की हड्डियों में किसी प्रकार की चोट है तो इस आसन का अभ्यास ना करें |
    • हृदय से संबंधित समस्याओं से पीड़ित लोगों को इस आसन से नहीं करना चाहिए |
    • भोजन के तुरंत बाद इस आसन का अभ्यास नहीं करना चाहिए |
    • अगर आपको पथरी की शिकायत है तो इस आसन का अभ्यास ना करें |


    धनुरासन के बाद किए जाने वाले आसन

    धनुरासन के पहले किए जाने वाले आसन

    • उड़ध मुख सवनसाना (Upward-Facing Dog Pose)
    • भुजंगासन ( Cobra Pose)
    • पदमासन ( Lotus Pose)
    • शलभासन ( Locust Pose ) 

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              Friday, February 5, 2021

              पादहस्तासन करने का सही तरीका और उसके फायदे ||The right way and the Benefits of Padahastasana

               पादहस्तासन करने का सही तरीका और उसके फायदे ||The right way and the Benefits of Padahastasana 

              पादहस्तासन aपादहस्तासन एक आगे झुकने का आसन है। यह आसन हठयोग प्रदीपिका के 12 मुख्य मुद्रा में से एक है। पादहस्तासन सूर्य नमस्कार की श्रृंखला का भी हिस्सा है। यह सूर्य नमस्कार के तीसरे आसन और दसवें आसन के रूप में आता है।

                      इस आसन का नाम संस्कृत भाषा से लिया गया है। "पाद" का अर्थ है "पैर", "हस्त" का अर्थ है "हाथ" और "आसन" जिसका अर्थ है "पोस्टर" मतलब है "हाथ और पैरों का आसन"।
                    हमारी मांसपेशियों, कण्डरा(Tendon), स्नायुबंधन(Ligaments), फासिआस(Fascias), और मूल रूप से पूरे सिस्टम (system)एक निष्क्रिय दिन के अंत में ध्यान देना चाहता है। कुर्सियों में बिताए हुए स्थिर जीवन से शरीर के अंग सख्त, तंग और बेजान हो जाते हैं। पादहस्तासन में खिंचाव के माध्यम से शारीरिक अंगों को शक्ति प्रदान करना हैं। 
                   यह आपकी रीढ़ को लचीला बनाने में आपकी मदद कर सकता है जबकि आपकी पीठ, पैर और पेट को टोन करता है।  योग विशेषज्ञों द्वारा आसन की अत्यधिक अनुशंसा की जाती है, क्योंकि इसमें कई तरह के लाभ होते हैं। इसलिए पादहस्तासन और उससे होने वाले फायदों के बारे में और जानने के लिए पढ़ें।




              अंग्रेजी नाम 

              Hand To Feet Pose

              पादहस्तासन  के अद्भुत फायदे

              • पादहस्तासन हैमस्ट्रिंग मसल्स को स्ट्रेच करता है। 
              • कार्पल टनल सिंड्रोम के लिए यह आसन चिकित्सीय है
              • यह आसन रक्त प्रवाह बेहतर करता है। 
              • पादहस्तासन तनाव को खत्म करने वाला आसन है। 
              • पादहस्तासन मेटाबॉलिज्म को गति देता है। 
              • पादहस्तासन की लगातार अभ्यास से शरीर स्वस्थ और युवा रहता है। 
              • पादहस्तासन शरीर को बहुत लचीला बनाता है। यह पीठ और पैर की मांसपेशियों को फैलाता है।
              • यह पेट की अतिरिक्त चर्बी को खत्म करने में मदद करता है।
              • यह पाचन में सुधार करता है और कब्ज को कम करता है। यह पेट की कई बीमारियों को खत्म करता है। 
              • यह रीढ़ को लचीला बनाता है और तंत्रिकाओं को टोन करता है।
              • तनाव से राहत देकर गर्दन और कंधों को आराम देता है।
              • संतुलन शरीर में समग्र कल्याण को बढ़ावा देने के लिए विरोध करता है।
              • मन को शांत करता है और केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को शांत करता है।
              • यह एकाग्रता को बढ़ाता है और चयापचय को भी बढ़ाता है।
              • पादहस्तासन हृदय रोगों के लिए फायदेमंद है।


              कैसे करें पादहस्तासन  

              • सबसे पहले अपने योग मैट पर सीधे खड़े हो जाए।
              • खड़े होकर शरीर को कूल्हों से आगे की ओर झुकाएं।
              • अपने हाथों को फर्श पर स्पर्श करें। अपने घुटनों को जितना हो सके सीधा रखें।
              • बाहों को फर्श से छूने दें। यदि यह मुश्किल है तो हाथ केवल उतना ही ले जाएं जितना कि बिना तनाव के संभव है। आगे झुकते ही सांस छोड़ें।
              • माथे को पैरों के करीब ले जाए। माथे से घुटनों को छूने की कोशिश करें। इसके लिए बहुत लचीलेपन की आवश्यकता हो सकती है। शुरुआती चरणों में, इसे केवल उतना ही लें जहां तक यह आरामदायक हो।
              • पूर्ण आसन में पहुंचने के बाद 7-8 बार लंबी लंबी गहरी सांस लें
              • अब आराम-आराम से सांस लेते हुए सीधे हो आ जाएं और हाथों को ऊपर  ले जाते हुए सीधे खड़े हो जाएं।
              • जब यह आसन सूर्य नमस्कार (सूर्य नमस्कार अभ्यास) के भाग के रूप में किया जाता है तो इस आसन को करते समय एक मंत्र का जाप किया जा सकता है।  "ओम सवित्रे नमः"। इसका अर्थ है परोपकारी माता को प्रणाम।

              सावधानी और चेतावनी

              • पीठ झुकने वाले आसन से पहले या बाद में पादहस्तासन करें जैसे कि:- भुजंगासन, चक्रासन , सेतु-बंधासन।
              • आगे बढ़ते समय, सिर और घुटनों को एक इकाई के रूप में सीधा रखें। कूल्हों के सहारे झुकें न कि कमर के सहारे।
              • जितना हो सके उतना स्ट्रेच करें और आराम से ज्यादा से ज्यादा समय तक आसन में रहें।
              • अगर कोई कूल्हे की चोट से पीड़ित है तो इस मुद्रा ना करें।
              • जो लोग पीठ दर्द या कूल्हे की चोट से पीड़ित हैं, उन्हें विशेषज्ञ योग प्रशिक्षक से शिक्षा लेनी चाहिए।
              • यदि आप अल्सर से पीड़ित हैं तो आपको इस आसन का अभ्यास नहीं करना चाहिए।
              • जिन लोगों को उच्च रक्तचाप होता है, उन्हें यह आसन  योग प्रशिक्षक की देखरेख में करना चाहिए।
              • जिन लोगों को दिल की समस्या है, उन्हें यह आसन योग प्रशिक्षक की देखरेख में करना चाहिए।
              • जिन लोगों को घुटने की समस्या है, उन्हें यह आसन योग प्रशिक्षक की देखरेख में करना चाहिए।
              • जिन लोगों को पेट की हर्निया है, उन्हें यह आसन योग प्रशिक्षक की देखरेख में करना चाहिए।

              पादहस्तासन  के बाद किए जाने वाले आसन

              • सुषमा व्यायाम (Sushma Exercise)
              • उत्थिता पार्सवकोनासन (Uttitha Parsvakonasana)
              • प्रसारिता पादोत्तानासन (Prasarita Padottanasana)
              • परिव्रत त्रिकोणासन (Parivrtta Trikonasana)
              • उदिता त्रिकोनासन (Udita Trikonasana)

              पादहस्तासन  के पहले किए जाने वाले आसन

              • जनुसिरसाना (Janusirsana)
              • सुपता पद्यंगुशासन (Supta Padyungushasana)
              • पस्चिमोत्तानासन (Paschimottanasana)
              • अधो मुख अवनसाना (Adho Mukh Savasana)

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