Wednesday, December 1, 2021

Yoga for hair growth || बालों के विकास के लिए योग

     बालों के लिए Exercise || बालों के लिए विटामिन || Can योगा regrow hair || Yoga for air Growth || Rubbing Nails yoga for hair growth इस तरह के सवाल अक्सर हमारे मन में आते हैं . 

     योग के अभ्यास से कई प्रकार के स्वास्थ्य लाभों में फायदा होता है | आज के समय में यह फिटनेस के रूप में ज्यादा प्रचलित है किंतु यह आंतरिक और मानसिक स्वास्थ्य की रक्षा करने के लिए भी जाना जाता है |  साथ ही यह त्वचा और बालों की परेशानियों को भी ठीक करता है | यदि आप अपने छोटे बालों से, रूखे बालों से, दो मुंहे बालों से, गंजेपन से परेशान हैं और  इस परेशानी से मुक्ति पाना चाहते हैं तो आप योग के अभ्यास के द्वारा अपने बालों की परेशानी से मुक्ति पा सकते हैं | वास्तव में बालों के विकास और बेहतर स्वास्थ्य के लिए योग को दुनिया भर में बहुत लोकप्रियता मिल रही है क्योंकि यह आश्चर्यजनक परिणाम दिखा रहा है |     

     योग और प्राणायाम के अभ्यास से सिर और खोपड़ी में रक्त का परिसंचरण को उत्तेजित करने में मदद मिलती है, जिससे सूखे और दो मुंहे बाल फिर से ठीक हो सकते हैं | यह साथ ही बालों के झड़ने को नियंत्रण करता है और बालों के विकास को बढ़ावा देता है | इसलिए यदि आप बालों के झड़ने का अनुभव कर रहे हैं या गंजेपन की  शुरुआती लक्षण देख रहे हैं तो रोजाना योग करने से बहुत मदद मिल सकती है |

     इस लेख में ऐसे कुछ योगासन है जो न केवल बालों के विकास को बढ़ावा देते हैं बल्कि बालों के झड़ने को कम करने और आपके स्वास्थ्य में सुधार करने में भी मदद करेंगे |

1. कपालभाति (Kapalabhati)

कपालभाति
     कपालभाती दो शब्दों कपाल और भाती से जुड़कर बनी है जिसमें कपाल का अर्थ है "खोपड़ी" और भाती का अर्थ है "प्रकाश" | यह श्वसन की ऐसी गतिविधि है जो कायाकल्प, शुद्ध और स्फूर्तिदायक है। यह सांस लेने का व्यायाम शरीर से विषाक्त पदार्थों को साफ करने में मदद करता है, स प्रकार बेहतर ऑक्सीजन की आपूर्ति को बढ़ावा देना और मुक्त कणों को कम करना, बालों के विकास को सक्षम करना। इसके साथ ही यह तनाव और चिंता को कम करने में मदद करता है जो बालों के झड़ने में भी योगदान दें रहे हैं | 
     कपालभाती का अभ्यास करते समय इन बातों का ध्यान दें कि कपालभाति आप सुबह-सुबह और खाली पेट की सलाह दी जाती है |

2.  अधो मुख संवासना (Adho Mukha Svanasana)

अधो मुख संवासना

अधो मुख संवासना, जिसे अधोमुखी मुद्रा के रूप से भी जाना जाता है | यह सूर्य नमस्कार की 12 मुद्राओं में से एक मुद्रा है | यह एक संक्रमणकालीन विश्राम  मुद्रा है, जो रक्त प्रभाव को बढ़ाती है | इससे खोपड़े तक ऑक्सीजन पहुंचता है और बालों के विकास को बढ़ावा मिलता है | इस आसन के कई अन्य शारीरिक लाभ भी है | उदाहरण के लिए, यह मन को शांत करने, शरीर को फिर से जीवित करने और सक्रिय करने में मदद करता है |

     यह कार्पल टनल सिंड्रोम, उच्च रक्तचाप, रेटिना डिटेचमेंट, एक अव्यवस्थित कंधे, कमजोर आंख केशिकाएं, दस्त जैसी किसी भी समस्या से पीड़ित हैं तो इस आसन को करने से बचें |

3. सर्वांगासन(Sarvangasana)

सर्वांगासन


     सर्वांगासन जिसे अंग्रेजी भाषा में शोल्डर स्टैंड पोस्ट भी कहते हैं, यह पूरे शरीर का व्यायाम है, जो विभिन्न मांसपेशियों समूहों पर काम करता है | यह आपके संतुलन के साथ-साथ मुद्रा में सुधार करने में मदद करता है |  लेकिन इसके अलावा यह आसन आपके सिर में रक्त संचार को बढ़ाता है | मुद्रा का दैनिक अभ्यास आपके सिर पर लंबे समय तक प्रभाव डालता है और विशेष रूप से सूखे और पतले बालों के लिए फायदेमंद है |

     यदि आप स्लिप डिस्क हृदय की समस्याओं या रक्तचाप से पीड़ित है, तो इस मुद्रा का अभ्यास करने से पहले अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें |

4. बालासन (Balasana)

बालासन

बालासन का शाब्दिक अर्थ है बच्चे की मुद्रा | यह बालों को संदर्भित नहीं करता है | हालांकि यह 2 सबसे बड़े कारकों का मुकाबला करता है जो बालों के झड़ने का कारण बनते हैं: तनाव और पाचन संबंधी समस्याएं | पेट से संबंधित किसी भी समस्या से राहत देने के लिए आमतौर पर बालासन की सलाह दी जाती है और यह जनता के साथ-साथ मदद करने के लिए भी जाना जाता है | इस मुद्रा के दैनिक अभ्यास से आपके पाचन और मानसिक स्वास्थ्य दोनों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है जिससे बालों के झड़ने का खतरा काफी कम हो जाता है |

     यदि आप दस्त, घुटने की चोट, गंभीर गर्दन या पीठ दर्द, उच्च रक्तचाप, चक्कर या स्लिप डिस्क जैसी समस्याओं से पीड़ित हैं, तो इस मुद्रा का अभ्यास करने से पहले अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें |  

5. शीर्षासन (Shirshasana) 

शीर्षासन 
     शीर्षासन जिसे अंग्रेजी भाषा में हेड स्टैंड कहते हैं | शीर्षासन खोपड़ी में रक्त परिसंचरण में सुधार करता है | जो बालों के झड़ने, बालों के पतले होने और गंजापन को कम करने में मदद करता है | यह आसन नए बालों के विकास में मदद करता है और बालों को सफेद होने से रोकता है | यह बालों के लिए बहुत ही उत्तम आसन है | यह निष्क्रिय बालों के रोग को उनकी अधिकतम विकास क्षमता तक पहुंचाने में मदद करता है और इस प्रकार बालों के विकास में सुधार करता है |
     इस मुद्रा को पूर्ण करने के लिए बहुत अभ्यास की आवश्यकता होती है | कोशिश करें कि मुद्रा का अभ्यास किसी योग शिक्षक के द्वारा ही करें और किसी अन्य व्यक्ति की मदद ले या यदि आप एक नौसिखिया है तो दीवार की सहायता से करें |

6.वज्रासन (Vajrasana)

वज्रासन 


     वैसे तो वज्रासन बहुत ही सरल मुद्रा है किंतु यह काफी शक्तिशाली है | यह सीधे पेट से संबंधित मुद्रा से संबंधित है, जिस पर आप विश्वास कर सकते हैं या हो सकता है, जहां तक बालों के झड़ने की बात है, इसमें बड़ी भूमिका है | वज्रासन के लगातार  अभ्यास से रीड की हड्डी सीधी होती है | अध्ययनों के अनुसार, खराब गट फ्लोरा बालों के पतले होने का कारण बन सकता है और अंततः बालों के झड़ने का कारण बन सकता है | वज्रासन इनमें से बहुत सी समस्याओं को दूर करने और ठीक करने में मदद करता है | और यह आपके भोजन को बेहतर ढंग से पचाने में भी मदद करता है | यह बालों के विकास के लिए फायदेमंद होता है क्योंकि जब आप का पाचन शीघ्र रूप से होता है तो पोषक तत्व शरीर द्वारा बेहतर तरीके से अवशोषित होता है | बेशक लंबे घने और स्वस्थ बालों के लिए स्वस्थ आहार बनाए रखना बहुत ही आवश्यक है | 

     यह एकमात्र ऐसा आसन है जो भोजन करने के बाद भी किया जा सकता है | कई अध्ययनों से यह पता चला है कि भोजन करने के बाद इसका अभ्यास करने से भोजन भी अच्छे से पता है | पेट को ट्रिमर करने के लिए रोजाना वज्रासन में बैठने की कोशिश करें।

7. उत्तानासन (Uttanasana)

उत्तानासन 
     उत्तानासन जिसे पादहस्तासन के रूप से भी जाना जाता है | इस आसन में महारत हासिल करने में कुछ समय ही लगता है | यह योग मुद्रा मांसपेशियों को फैलाने के साथ-साथ आराम भी देता है और यह ऑक्सीजन की स्तर और सिर में रक्त के प्रभाव को भी बेहतर करता है | यह बदले में, बालों के रूम को मजबूत जड़ को मजबूत बनाता है और आपके बाल लंबे होते हैं | यह ना केवल आपके बालों की गुणवत्ता को बढ़ाने में सुधार करता है बल्कि इसे निरोशन और चमकदार बनाता है |
     अगर आपकी पीठ के निचले हिस्से में चोट है यह आपके घुटनों के जोड़ों और टखनों के जोड़ में चोट है तो इस आसन का अभ्यास ना करें |

8.मत्स्यासन (Matsyasana)

मत्स्यासन

     मत्स्यासन इसे अंग्रेजी भाषा में फिश पोज से भी जाना जाता है | यह मजबूत, लंबी और स्वस्थ बालों के लिए सबसे प्रभावी और लोकप्रिय स्थलों में से एक है | इसका अभ्यास करना काफी आसान है और इसे घर पर ही बिना किसी उपकरण की आवश्यकता के जल्द ही किया जा सकता है,जैसे कि ऊपर उपस्थित अन्य आसनों में किया गया है | यह योगासन बालों की अधिकांश समस्याओं को रोजाना अभ्यास से दूर करने में सहायता करता है |

     झुकते समय सुनिश्चित करें कि आप की पीठ पर कोई दबाव न पड़े क्योंकि इससे गंभीर चोट लगने की संभावना रहती है |




Wednesday, November 24, 2021

कमर के बल लेटकर किए जाने वाले योगासन || Lying Down on Back Yoga Poses

      कमर के बल लेटकर किए जाने वाले योगासन को स्पाइनल योगासन के नाम से जाना जाता है, ये आसन योग अभ्यास को समाप्त करने का एक शानदार तरीका है | इन योगा आसनो को सीखने के लिए एक योग्य योगा शिक्षक की तलाश करना सबसे अच्छा है क्योंकि आपके शरीर का अधिकांश वजन पृथ्वी द्वारा समर्थित है या गुरुत्वाकर्षण के निम्न केंद्र के साथ स्थित है| इसलिए अन्य श्रेणियों के आसनों की तुलना में लापरवाह पोज़ को अक्सर अधिक समय तक रखा जा सकता है। 
 इस सूची में लेट कर किए जाने वाले कई योगासनों के नाम दिए गए हैं तथा उनके संस्कृत और अंग्रेजी में भी नाम दिए गए हैं |

1. नौकासन

Asana Name :-   Naukasana 

Sanskrit Name :-  नौकासन

English Name :- Boat Pose

2. सेतु बंधासन 

Asana Name :-  Setu Bandhasana 

Sanskrit Name :-   सेतु बंधासन

English Name :- Bridge Pose


Asana Name :-  Matsyasana 

Sanskrit Name :-  मत्स्यासन

English Name :- Fish Pose



4. पवनमुक्तासन 

Asana Name :-  Pavanamuktasana 

Sanskrit Name :-   पवनमुक्तासन

English Name :- Wind-Relieving Pose



5. सर्वांगासन

Asana Name :-    Sarvangasana 

Sanskrit Name :-   सर्वांगासन

English Name :- Shoulder Stand

6. हलासन



Asana Name :- Halasana  

Sanskrit Name :-     हलासन

English Name :-  Plow Pose

7. सुप्त मत्स्येन्द्रसाण



Asana Name :-   Supta Matsyendrasan 

Sanskrit Name :-   सुप्त मत्स्येन्द्रसाण

English Name :-  Supine Spinal Twist Yoga Pose

8. विष्णुआसन 

Asana Name :-   Vishnuasana 

Sanskrit Name :-    विष्णुआसन

English Name :-  Lying-Down on Sides

9. शवासन  

Asana Name :-  Shavasana 

Sanskrit Name :-   शवासन

English Name :- Corpse Pose



10. पद-चलनासन

Asana Name :-   Pad-Chalanasan 

Sanskrit Name :-  पद-चलनासन

English Name :-    Leg Rotation

11. सुप्त पवन मुक्तासन



Asana Name :-  Supta pavan Muktasana

Sanskrit Name :-   सुप्त पवन मुक्तासन

English Name :-  Wind Relieving Pose  

12. अनंतसानी 

Asana Name :-   Anantasan

Sanskrit Name :-  अनंतसानी

English Name :-     Sleeping Vishnu Pose

 13.  उत्तान-पड़ासन

Asana Name :-  Uttan-padasan 

Sanskrit Name :-  उत्तान-पड़ासन

English Name :-     Raised Feet Posture




Monday, November 22, 2021

बैठकर किए जाने वाले योगासन || Sitting Yoga Posture

     क्या आप अपने अभ्यास में जोड़ने के लिए बैठने के योग मुद्राओं की तलाश कर रहे हैं ? इस सूची में सभी बैठे हुए पोस्ट शामिल है जिन्हें आप अपने अभ्यास में जोड़ सकते हैं | बैठकर किए जाने वाले आसन पैरों, पीठ और श्रोणि के आसपास की मांसपेशियों को खींचकर लचीलापन में सुधार के लिए आदर्श है | जिन्हें कूल्हों के रूप में भी जाना जाता है | अपनी योग चटाई पर फर्श पर बैठने से स्थिरता की स्थिति मिलती है जिससे शरीर को खोलने में सुविधा होती है लेकिन यह सभी के लिए आरामदायक नहीं है | यदि आपको सीधा बैठना मुश्किल लगता है तो आप अपने कूल्हों के नीचे एक मुड़ा हुआ कंबल, बोल्ट या ब्लॉक लेने का प्रयास कर सकते हैं |


1. जानुशीर्षासन 

Asana Name :-  Janu Sirsasana 

Sanskrit Name :- जानुशीर्षासन

English Name :-   One-Legged Forward Bend




2. पश्चिमोत्तानासन

Asana Name :-  Paschimottanasana 

Sanskrit Name :- पश्चिमोत्तानासन

English Name :- Seated Forward Bend 



3. पूर्वोत्तानासन 

Asana Name :-  Poorvottanasana 

Sanskrit Name :-  पूर्वोत्तानासन

English Name :-  Upward Plank Pose


Asana Name :-   Ardha Matsyendrasana  

Sanskrit Name :-     अर्ध मत्स्येन्द्रासन

English Name :-  Half Spinal Twist



5. बधाकोनासन 

Asana Name :-  Badhakonasana 

Sanskrit Name :-   बधाकोनासन

English Name :- Butterfly Pose


6. पद्मासन

Asana Name :-  Padmasana

Sanskrit Name :-   पद्मासन

English Name :- Lotus Pose



7. मार्जारियासन  


Asana Name :-   Marjariasana 

Sanskrit Name :-    मार्जारियासन

English Name :- Cat Stretch



8.एका पद राजा कपोतासन

Asana Name :-  Eka Pada Rajakapotasana

Sanskrit Name :-   एका पद राजा कपोतासन

English Name :-  One-Legged Pigeon Pose


9. बालासन  

Asana Name :-  Shishuasana 

Sanskrit Name :- बालासन

English Name :- Child Pose



10. वज्रासन

Asana Name :-  Vajrasana 

Sanskrit Name :-   वज्रासन

English Name :-  Thunderbolt Pose



11. गोमुखासन



Saturday, November 20, 2021

थायराइड के लिए योग आसन || Yoga For Thyroid

      थायराइड Thyroid, यह कोई बीमारी नहीं है बल्कि शरीर का एक अंग है जो हमारी गर्दन में नीचे की तरफ तितली के आकार की ग्रंथि gland के रूप में होता है | ह 8 अंतःस्रावी ग्रंथियों Endocrine System  में से एक है | थायराइड ग्लैंड कैलोरी बर्न के ठीक ऊपर उपस्थित होती है। 
     यह कई कार्यों को नियंत्रण करती है जैसे कि:- यह वजन घटाने या बढ़ने पर नियंत्रण करती है, दिल की धड़कन को धीमा या तेज कर सकती है, शरीर का तापमान बढ़ा या घटा सकती है, उस दर को प्रभावित कर सकती है जिस दर पर भोजन पाचन तंत्र के माध्यम से चलता है, मांसपेशियों के अनुबंध के तरीकों को नियंत्रण कर सकती है, उस दर पूर्ण निर्णय कर सकती है जिस पर मरने वाली कोशिकाओं को बदला जाता है | और जब थायराइड ग्रंथि पर्याप्त थायराइड हार्मोन का उत्पादन नहीं कर पाती तब हमें थकान, ठंड के प्रति संवेदनशीलता, कब्ज, शुष्क त्वचा और अस्पष्ट व्रत वजन बढ़ने या घटने जैसे लक्षण अपने शरीर में दिखाई देते हैं |
     योगासन ना केवल थायराइड ग्लैंड बल्कि सभी ग्रंथियों को स्वस्थ और चायपचय को बनाए रखने में मदद कर सकता है | कई अध्ययनों में यह पाया गया है कि योग के लगातार व नियमित अभ्यास से थायराइड की परेशानी को जड़ से समाप्त की जा सकता है और इस बात को वैज्ञानिक भी मानते हैं | यह पांच योगासन है जो थायराइड के लिए फायदेमंद है |
     यह कई कार्यों को नियंत्रण करती है जैसे कि:- यह वजन घटाने या बढ़ने पर नियंत्रण करती है, दिल की धड़कन को धीमा या तेज कर सकती है, शरीर का तापमान बढ़ा या घटा सकती है, उस दर को प्रभावित कर सकती है जिस दर पर भोजन पाचन तंत्र के माध्यम से चलता है, मांसपेशियों के अनुबंध के तरीकों को नियंत्रण कर सकती है, उस दर पूर्ण निर्णय कर सकती है जिस पर मरने वाली कोशिकाओं को बदला जाता है | और जब थायराइड ग्रंथि पर्याप्त थायराइड हार्मोन का उत्पादन नहीं कर पाती तब हमें थकान, ठंड के प्रति संवेदनशीलता, कब्ज, शुष्क त्वचा और अस्पष्ट व्रत वजन बढ़ने या घटने जैसे लक्षण अपने शरीर में दिखाई देते हैं |
     योगासन ना केवल थायराइड ग्लैंड बल्कि सभी ग्रंथियों को स्वस्थ और चायपचय को बनाए रखने में मदद कर सकता है | कई अध्ययनों में यह पाया गया है कि योग के लगातार व नियमित अभ्यास से थायराइड की परेशानी को जड़ से समाप्त की जा सकता है और इस बात को वैज्ञानिक भी मानते हैं | यह पांच योगासन है जो थायराइड के लिए फायदेमंद है |

थायराइड की परेशानी में योग का अभ्यास किस प्रकार किया जाए वह नीचे दी गई वीडियो में उपस्थित है |



1. सर्वांगासन (Sarvangasana)


सर्वांगासन
सर्वांगासन
   सर्वांगासन को अंग्रेजी भाषा में शोल्डर स्टैंड पोस्ट Shoulder Stand Pose कहते हैं | सर्वांगासन कंधों के सारे किए जाने वाला योगासन है| इसे करते हुए पूरे शरीर का भार कंधों पर आता है | सर्वांगासन करते समय गर्दन और कंधों पर जोर पड़ता है | इससे ना सिर्फ आपके कंधे मजबूत होते हैं बल्कि पाचन को बेहतर करने में भी मदद मिलती है | यह आसन थायराइड ग्लैंड को उत्तेजित करने में मदद करता है | यह आसन पूरे शरीर में खिंचाव लाने का काम करता है | 
     यह आसन मस्तिष्क की ओर रक्त के प्रभाव को बढ़ाने के लिए बहुत प्रभावशाली है | इस आसन के अभ्यास से पेट और श्रोणि विसरा का अस्थायी प्रतिस्थापन।
     इस मुद्रा के दौरान आपकी गर्दन का ध्यान रखें और यदि आपको कोई असुविधा हुआ तो अभ्यास बंद कर दें | इस आसन का अभ्यास किसी योग शिक्षक के संरक्षण में सीखे जिससे योग का पूर्ण ज्ञान हूं, याद रहे कि चोट लगने के संभावना के कारण ही यह मुद्रा सभी के लिए सुनिश्चित नहीं है | इस आसन का अभ्यास करते समय आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता में योगदान करते हुए दिमाग को सतर्क करें | इस आसन के अभ्यास की अवधि कम से कम यानी शुरुआत में 20 सेकंड से लेकर ज्यादा से ज्यादा 2 मिनट तक तय करनी चाहिए |

2. हलासन (Halasan)

हलासन 
     स्वस्थ रहने का सबसे सरल और सटीक उपाय योग का अभ्यास है | इसके नियमित अभ्यास से ना केवल आप स्वस्थ और सुखी रह सकते हैं बल्कि अपनी इम्यूनिटी सिस्टम को मजबूत कर सकते हैं | और योग के अभ्यास से ऐसी कई बीमारियों का इलाज किया जा सकता है जिन का इलाज दवाइयों से नहीं होता जैसे कि थायराइड |  माना जाता है कि हलासन की मुद्रा से थायराइड को उत्तेजित किया जाता है | इसे अंग्रेजी भाषा में Plough Pose  भी कहते हैं लेकिन अधिक वजन वाले या बड़े स्तन वाली महिलाओं के लिए यह आसन मुश्किल हो सकता है | और यदि किसी को अभ्यास के दौरान ऐसा लगता है कि मुद्रा में सांस लेने में कठिनाई हो रही है तो उसे धीरे-धीरे स्थिति से बाहर आना चाहिए |
     हलासन का नियमित अभ्यास करने से वजन कम होता है, शरीर को मजबूती मिलती है, यह पाचन तंत्र के अंगों की मसाज करता है और पाचन सुधारने में मदद करता है |  


     

3. मत्स्यासन (Matsyasana)

मत्स्यासन 

     

     मत्स्य का अर्थ है - मछली। इस आसन में शरीर का आकार मछली के जैसा बनता है| अतः  मत्स्यासन कहलाता है| इसे अंग्रेजी भाषा में मछली मुद्रा Fish Pose भी कहते हैं |  यह आसन छाती को चौड़ा कर उसे स्वस्थ बनाए रखने में लाभकारी है |

मत्स्यासन हलासन के बाद करने के लिए एक श्रेष्ठ आसन है, मत्स्यासन के अभ्यास से कंधों के मुद्रा को ठीक किया जा सकता है | क्योंकि यह शरीर को विपरीत दिशा में फैलाता है | यह आसन बहुत ही सरल है और इस आसन का अभ्यास आप अपने आप भी कर सकते हैं| 

     थायराइड फंक्शन को बेहतर बनाने के लिए मत्स्यासन को सबसे प्रभावी माना जाता है | जैसे ही आप अपने सिर को मत्स्यासन की मुद्रा में लटका आते हैं, आप गले के क्षेत्र को उजागर कर करके अपने थायराइड को उत्तेजित करते हैं |

4. सेतुबंध आसन (Setu Bandh Asana)

सेतुबंध आसन

     सेतुबंध आसन को अंग्रेजी भाषा में ब्रिज पोज Bridge Pose भी कहा जाता है क्योंकि इसका आकार बहुत हद तक ब्रिज के समान है | 

     यह पीठ के बल लेट कर किया जाने वाला बहुत ही महत्वपूर्ण आसनों में से एक है।सेतुबंध आसन कमर दर्द, थायराइड, डिप्रेशन इत्यादि के लिए बहुत ही कारगर है | यह आसन पीठ को मजबूत बनाने के लिए अच्छा है, यह थायराइड स्वास्थ्य को बढ़ावा देने में भी मदद कर सकता है | यह रीड को फैलाता है, दर्द और तनाव से राहत देता है, शरीर पर इसका धीरे-धीरे उत्तेजक प्रभाव परिसंचरण को बढ़ाता है | इस आसन को करने की विधि बहुत ही सरल है| इस आसन को करने के बाद थायराइड की अच्छी तरह से मसाज हो जाता है । और  यह थायराइड हार्मोन के स्त्राव में मदद मिलती है जो थायराइड को रोकने में सहायक होता है ।

5. भुजंगासन (Bhujangasana)

भुजंगासन

     भुजंगासन को कोबरा पोज Cobra Pose भी कहा जाता है क्योंकि इसे करने पर शरीर की आकृति फेल कर सांप के समान दिखाई देती है । भुजंगासन शरीर के लिए बहुत ही लाभकारी है | यह शरीर को लचीला तो बनाता है साथ ही पीठ, गर्दन और रीढ़ की हड्डियों को मजबूत बनाता है. यह आसन अभ्यास करने के लिए बहुत ही सरल आसनों की श्रेणी में आता है | 

     भुजंगासन गले और थायराइड को धीरे से उत्तेजित करता है | इस आसन के अभ्यास से थकान और तनाव से मुक्ति मिलती है | यह आसन छाती व फेफड़ों, कंधों और पेट में खिंचाव लाता है | पेट के अंगों को उत्तेजित करता है, साइटिका से राहत दिलाता है, अस्थमा (दमा) के लिए चिकित्सक है | 


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Wednesday, November 3, 2021

मधुमेह के लिए योग || Yoga for Diabetes

     योग एक लोकप्रिय अभ्यास है जिससे बहुत से लोग अपने स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद पाते हैं | एक प्रकार का व्यायाम होने के साथ-साथ यह तनाव और चिंता को भी कम कर सकता है | योग आपके शरीर और दिमाग को आराम देने के अलावा और भी बहुत सी बीमारियों में उपयोग आता है | खासकर यदि आप मधुमेह के साथ जी रहे हैं तो कुछ आसन मधुमेह के स्तर को कम करने में मदद करते हैं साथ ही परिसंचरण में सुधार भी पड सकता हैं जिससे कई विशेषज्ञ मधुमेह प्रबंधन के लिए योग की सलाह देते हैं |

     इसके नियमित अभ्यास से मधुमेह की अन्य जटिलताओं जैसे हृदय संबंधी समस्याएं,छाती में दर्द, दिल का दौरा, आघात, धमनियों का सिकुड़ना, गुर्दे की बीमारी और आदि की संभावना को कम करने में भी मदद करता है | कई अध्ययनों के अनुसार टाइप 2 मधुमेह के रोगियों में रक्त संकरा के स्तर को कम करने में योग अधिक मददगार हो सकता है। मधुमेह के प्रबंधन के लिए योग शिक्षकों द्वारा निम्नलिखित कुछ आसन महत्वपूर्ण बताए गए हैं |

     मधुमेह के मरीजों के लिए सबसे अच्छी बात यह है कि योग किसी भी उम्र के व्यक्ति कर सकते हैं और इसका नियमित अभ्यास करने से अन्य परेशानी भी नहीं होती  |

     योग में मधुमेह को कम करने के लिए कौन से आसनों का अभ्यास करना चाहिए यह जानने के लिए इस लेख को पूरा पढ़ें |


1. विपरीत करणी

                                    
     विपरीत करणी आसन पुनस्थापनात्मक उल्टा विश्राम की अनुमति देता है | यह तनाव व चिंता के स्तर को कम करने में मदद करता है | जो बदले में रक्तचाप और मधुमेह के स्तर को कम करने में मदद कर सकता है | यह सिरदर्द को दूर करता है, पैरों के दर्द को दूर करता है, ऊर्जा को बढ़ावा देने और परिसंचरण को मजबूत बनाने में भी मदद कर सकता है | यह आसन बालों से जुड़ी समस्याएं जैसे कि बाल झड़ना, सफेद बाल, और गंजापन जैसी कई समस्याओं से भी राहत देता है | 
     इस आसन की सबसे खास बात यह है कि इस आसन का अभ्यास किसी भी उम्र के लोग कर सकते हैं अर्थात वृद्ध से वृद्ध लोग भी इसका अभ्यास नियमित रूप से बड़ी आसानी से और अकेले कर सकते हैं |

2.  बद्धकोणासन 

                                       
     इस आसन को सरल भाषा में तितली आसन भी कहते हैं | इस मुद्रा में हमारे पैर व जांघ तितली की मुद्रा में होती है | यह आसन तंत्रिका तंत्र को शांत करने में मदद करती है | यह महिलाओं में मासिक धर्म से जुड़ी कई समस्याओं से राहत देती है | यह मुद्रा जांघों की चर्बी अधिक चर्बी को कम करके उसे प्राकृतिक आकृति में लाती है | यह आसन पेट के अंगों पर भी काफी गहरा प्रभाव डालती है इस आसन के नियमित अभ्यास से मधुमेह की परेशानी समाप्त होती है | यह आसन घुटनों के दर्द के रोगियों के लिए एक रामबाण इलाज है |

3. पश्चिमोत्तानासन

                                  
     पश्चिमोत्तानासन बैठ के किए जाने वाला आसन है | यह आसन शुरुआती अभ्यास के लिए विद्यार्थियों को करवाया जाता है | इसका तंत्रिका तंत्र पर गहरा प्रभाव डालता है जो तानाव और हल्के अवसाद को दूर करने में मदद करता है | इस बात से तो हम अच्छी तरह से परिचित है कि योग मन और शरीर को आराम देने का एक शानदार तरीका है और यह आपके चितित मन को शांत करने, तनाव और चिंता को दूर करने में मदद करता है। जबकि आपको कई शारीरिक लाभ में भी मदद करता है |
     यह आसन अग्न्याशय अंग पर बहुत गहरा असर डालता है जिस कारण मधुमेह की परेशानी जड़ से समाप्त होती है |
     यह आसन पैल्विक मांसपेशियां,खड़ा रखने वाला मेरुदंड, ग्लूटस मेक्सीमस, जठराग्न,  जैसी कई मांसपेशियों पर भी प्रभाव डालता है |

4. सर्वांगासन

                                               
     सर्वांगासन में हमारा पूरा शरीर हमारे कंधों पर संतुलित होता है | सर्वांगासन आपके शरीर के सभी अंगों के कामकाज को प्रभावित करता है यह अनशन मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को बनाए रखने में अत्यधिक फल फायदेमंद है और कई पुस्तकों में इसे आसनों की माता या आसनों की रानी भी कहा गया है | आसन में हमारा रक्त संचार हमारी बॉडी से विपरीत दिशा में अर्थात सिर की और होता है | यह आसन अग्न्याशय अंग के लिए बहुत ही अच्छा आसन है |
     यह आसन रेक्टस एब्डोमिनिस, त्रपेजियस, रोटेटर कफ, चतुशिरस्क, जैसी कई मांसपेशियों पर भी प्रभाव डालता है |

5. हलासन

                                           
     हल आसन हठयोग प्रदीपिका में एक उल्टा आसन और व्यायाम के रूप में आधुनिक योगासन है | यह आसन थायराइड ग्लैंड को उत्तेजित करने, परिसंचरण को बढ़ाने और तनाव को कम करने में मदद करता है | इसके चिकित्सीय प्रभाव पीठ दर्द, सिर दर्द और अनिद्रा को दूर करने में भी मदद करते हैं | इस आसन के नियमित अभ्यास से मधुमेह की परेशानी और थायराइड की परेशानी जड़ से समाप्त हो जाती है |
     यह आसन रोटेटर कफ, हैमस्ट्रिंग, त्रपेजियस, स्पाइनल एक्सटेंसर, जैसी मांसपेशियों पर प्रभावी असर डालता है |

6. भुजंगासन

                                     

     भुजंगासन सूर्य नमस्कार के 12 मुख्य आसनों में से एक महत्वपूर्ण आसन है | यह आसन मुख्य रूप से कमर और कंधों की मांसपेशियों पर असर देता है पर साथ ही यह पेट की मांसपेशियों तथा पाचन तंत्र पर भी असर देता है | यह पाचन तंत्र के सभी अंगों की अच्छे से मालिश करता है जिसके कारण पाचन तंत्र से संबंधित सभी समस्याएं समाप्त होती है यह आसन मधुमेह की परेशानी के लिए भी बहुत ही बेहतरीन आसन है |
     यह आसन ग्लूटस मेक्सीमस, ट्रिपेप्स ब्रेची, स्पाइनल एक्सटेंसर, चतुशिरस्क, हैमस्ट्रिंग जैसी मांसपेशियों पर प्रभावी असर डालता है|

7. धनुरासन

                             
     धनुरासन उल्टा लेट कर किए जाने वाला आसन है | यह आसन पेट के बल लेटकर किया जाता है यह आसन अग्रिम मुद्रों में से एक महत्वपूर्ण आसन है | यह आसन पेट की सभी समस्याओं को समाप्त करता है। यह पाचन तंत्र को सुचारू रूप से चलाता है और मधुमेह की परेशानी को भी समाप्त करता है | यह बैग बैंडिंग आपकी छाती को खोलता है और आपके पेट के अंगों को उत्तेजित करता है। यह आसन कब्ज और सांस की बीमारियों में राहत दिला सकता है |
     यह आसन ग्लूटस मेक्सीमस, हैमस्ट्रिंग, चतुशिरस्क, अंसपेशी मेजर जैसी मांसपेशियों पर प्रभावी असर डालता है |

8. मत्स्येंद्रासन

                                              
     मत्स्येन्द्रासन बैठते हुए मोड़ कर किए जाने वाला आसन है | जिसका अभ्यास शरीर की मुद्रा में सुधार और पाचन तंत्र को बहाल करने के लिए किया जाता है | यह आसन रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाए रखने में सहायता कर है | यह आपके पाचन तंत्र को नियंत्रित करता है और इस प्रकार पाचन में सुधार करता है तथा मधुमेह की परेशानी समाप्त करता है |
     यह आसन समचतुर्भुज, धड़ की अग्रवर्ती मांसपेशी, खड़ा रखने वाला मेरुदंड, अंसपेशी मेजर, Psoas मांसपेशियों  जैसी मांसपेशियों पर प्रभावी असर डालता है |

9. सुप्त मत्स्येन्द्रासन

                                      
     सुप्त मत्स्येन्द्रासन पेट के अंगों को उत्तेजित करने में मदद करती है जिससे रक्त में शक्कर के स्तर को कम करने में मदद मिल सकती है | यह मुद्रा आपकी जीत पीठ और गुणों में दर्द और जकड़न को कम करने में भी मदद कर सकती है | सुप्त मत्स्येन्द्रासन अनेक कोमल मोड़ है जो पेट के अंगों की मालिश करता है,पेट  और अग्न्याशय की मदद करता है, पाचन की सुविधा देता है और कब्ज को कम करता है। यह ब्लूटूथ और पीठ को फैलाता है कूल्हों में रिलीज की अनुमति देता है और तंग कंधों को खोलता है |
     यह आसन खड़ा रखने वाला मेरुदंड,  रेक्टस एब्डोमिनिस, त्रपेजियस, अंसपेशी मेजर जैसी मांसपेशियों पर प्रभावी असर डालता है|
                                              

10. बालासन 

                         
     बालासन सभी आयु वर्ग के लिए एक योग्य योगासन है। इसे वह लोग बड़ी आसानी से कर सकते हैं जिन्होंने योग करने की शुरुआत की है। बालासन अक्सर योगा सीखने वाले लोगों के लिए पहला आसन होता है। इस आसन को करने में अधिक परेशानी नहीं होती। इस आसन का अभ्यास अक्सर योग सत्र के कठिन आसनो के बीच में सिलेक्ट करने के लिए किया जाता है | यह आसन एक आराम की मुद्रा होने के साथ-साथ यह पाचन तंत्र के अंगों की मालिश करता है और मधुमेह की समस्या को बड़ी आसानी से समाप्त करता है | यह पीठ और गर्दन के दर्द, तनाव और थकान को दूर करने में भी मदद करता है |
     यह आसन ग्लूटस मेक्सीमस, रोटेटर मांसपेशियां, हैमस्ट्रिंग, स्पाइनल एक्सटेंसर जैसी मांसपेशियों पर प्रभावी असर डालता है |

"मधुमेह को प्रबंधित करने का प्रयास करना कठिन है क्योंकि यदि आप ऐसा नहीं करते हैं, तो इसके परिणाम आपको जीवन में बाद में भुगतने होंगे।"      --ब्रायन एडम्स

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Saturday, October 30, 2021

वजन बढ़ाने के लिए योग आसन || Yoga asanas for weight gain

      योग सामान्य अर्थ में किसी के शरीर को पोषण करने का सबसे विश्वसनीय और प्रभावी तरीका है | हालांकि आज अधिकतर लोगों का ध्यान वजन कम करने पर होता है, किंतु कुछ लोगों के लिए वजन बढ़ाना भी उतना ही मुश्किल होता है | योग जीवन का एक अविश्वसनीय तरीका है जिसमें वजन बढ़ाना सहित सभी स्वास्थ्य समस्याओं का समाधान है। यह खराब मेटाबॉलिज्म भूख ना लगना और पाचन संबंधी समस्याओं आदि समस्याएं को दूर करता है | कई विशेषज्ञ यह मानते हैं कि योग हमारी मांसपेशियों को मजबूत करने में तथा सहनशक्ति में मदद करता है लेकिन यह जरूरी नहीं  है कि वजन या मांसपेशियों को बढ़ाएं | किंतु नियमित रूप से योग का अभ्यास करने से मांसपेशियों की ताकत तथा सहनशीलता में वृद्धि होती है। आप वजन बढ़ाते हैं या नहीं यह आपके आहर और आपकी संपूर्ण फिटनेस दिनचर्या में अन्य प्रतिरोध-शैली के व्यायाम पर भी निर्भर करता है|

''यह मानना कि योग के अभ्यास से वजन को बढ़ाया नहीं जा सकता यह बिल्कुल गलत है |''

     योग में विभिन्न आसनों और प्राणायाम के अभ्यास के दौरान यह पूरे शरीर में पोषक तत्वों को जमा करते हुए रक्त का और ऑक्सीजन का अच्छे से संचार सुनिश्चित करता है| इस लेख में हम आपको कुछ ऐसे योगासनों के बारे में बताएंगे जो वजन बढ़ाने में बहुत ही ज्यादा मदद करते हैं और साथ ही जिनके अन्य कई लाभ भी हैं|

1. उत्कटासन 

                                                   

      उत्कटासन को अंग्रेजी भाषा में चेयर पोस्ट(Chair Pose) भी कहते हैं | यह आसन हमारे टखनों, जांघों, पिंडलियों और रीढ़ को मजबूत बनाता है | इस आसन के अभ्यास से कंधों और छाती फैलते हैं और चपटे पैर की समस्या भी कम होती है | यह पेट के अंगों और डायफार्मा को उत्तेजित करता है, हृदय की गति को बढ़ाता है संचार और चायपचय प्रणाली को उत्तेजित करता है यह आसन हमारी जांघों की मांसपेशियों को मजबूत करता है साथ ही यह आसन उन लोगों के लिए बहुत ही लाभदायक है जो खेलकूद में जुड़े रहते हैं या दौड़ भाग में जुड़े रहते हैं |

         दो से तीन महीनों के लगातार अभ्यास से आप देखेंगे कि आपके पैर मजबूत हो गए हैं और अपकी जांघों की मांसपेशियां भी बढ़ रही हैं | इस आसन का अभ्यास शुरुआत में 30 सेकंड से करना चाहिए और धीरे-धीरे इसकी समय सीमा बढ़ाते हुए 1 मिनट तक कर सकते हैं |

2. भुजंगासन

                               

भुजंगासन जिसे अंग्रेजी भाषा में कोबरा पोज (Cobra Pose)भी कहते हैं | हालांकि इस आसन के अनेक लाभ हैं जैसे कि यह रक्त परिसंचरण में सुधार करता है, चायपचय को विनियमित करता है, यह आसन हमारी रीड की हड्डी के लिए भी बहुत लाभदायक है और यह पेट से जुड़ी ऐसी अनेक समस्याओं के लिए बहुत भी लाभदायक है जिन पर दवाइयों का असर भी नहीं होता | यह आसन अनेक बीमारियों में बहुत ही लाभदायक है |

3. सूर्य नमस्कार

                                   

    जब हमारे पास व्यायाम करने के लिए समय कम होता है तो हम हमेशा ऐसी गतिविधियों की तलाश में रहते हैं जो कम समय में अधिक से अधिक हमारे शरीर की मांसपेशियों और समूहों को लक्षित करते हुए हमारी मदद कर सके | ऐसे ही एक समूह जो शरीर को व्यायाम करने में मदद करता है वह है सूर्य नमस्कार | सूर्य नमस्कार 12 आसनों का एक समूह है | सूर्य नमस्कार एक बेहतरीन कार्डियोवास्कुलर कसरत है |

4. अनुलोम विलोम प्राणायाम

                                                 

     अनुलोम विलोम योग में एक विशेष प्रकार की श्वसन नियंत्रण करने का प्राणायाम है इसमें श्वसन लेते समय एक नथुने को बंद रखना फिर श्वसन छोड़ते हुए दूसरे नथुने को बंद रखना शामिल है। अर्थात अनुलोम विलोम प्राणायाम में नाक के दाएं छिद्र से सांस खींचते हैं तो बायीं नाक के छिद्र से सांस बाहर निकालते हैं इसी प्रकार यदि नाक के बायीं छिद्र से सांस खींचते हैं तो नाक के दाएं छिद्र से सांस को बाहर निकालते हैं। अनुलोम विलोम प्राणायाम को कुछ योग ग्रंथ में नाड़ी शोधन प्राणायाम भी कहते हैं | इसके नियमित अभ्यास से शरीर की समस्त नाड़ियों का शोधन होता है यानी व स्वच्छ व निरोग बनी रहती है  | यह प्राणायाम हमारे शरीर को समस्त रोगों से निरोग करता है। जिसके तहत हम अपने शरीर में अधिक फुर्ती और ताजगी महसूस कर सकते हैं और यही फुर्ती और ताजगी हमें स्वस्थ रहने में भी सहायता करती है |

5. पवनमुक्तासन

                                                       

पवनमुक्तासन उदर के लिए बहुत ही लाभदायक है | यह पेट की कई समस्याओं जैसे कि कब्ज, पाचन, गैस और पेट फूलने की समस्या को आसानी से समाप्त करता है | साथ ही यह उन महिलाओं के लिए बेहतरीन आसन है जिन्हें पीरियड्स नियमित रूप से नहीं होते | पवनमुक्तासन के नाम से ही हमे इसके बारे में अधिक जान सकते हैं अर्थात इस योग की क्रिया द्वारा शरीर से दूषित वायु को शरीर से मुक्त किया जाता है | 

     योग के अभ्यास से शुरुआत में शरीर में कोई महत्वपूर्ण या खास अंतर नहीं दिखाई देता है। इसका लंबे समय तक अभ्यास करने से ही शरीर में फर्क पड़ता है और वजन बढ़ाने के लिए जितनी महत्वपूर्ण भूमिका योग व्यायाम की है उतनी ही महत्वपूर्ण भूमिका सही आहार का सेवन करने की भी है | संतुलित आहार इस बात का अवश्य ध्यान रखें कि वजन बढ़ाने के लिए शरीर को अच्छी स्थिति में रखते हुए अच्छी तरह से पोषित रखें और जंक फूड से बचना चाहिए |

जरूरी यह नहीं वजन कम करना या बढ़ाना प्रेरणा फिट और स्वस्थ रहना होना चाहिए | 

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कपालभाति प्राणायाम करने का तरीका और फायदे || पूर्वोत्तानासन के फायदे  || अस्थमा के लिए योग || मत्स्येन्द्रासन करने का सही तरीका और उसके फायदे













                                                     

     


Tuesday, October 26, 2021

पूर्वोत्तानासन के फायदे || Benefits of Poorvottanasana

 

पूर्वोत्तानासन 

पूर्वोत्तानासन को अंग्रेजी भाषा में अपवर्ड प्लैंक पोज़ (Upward Plank Pose)के रूप में जाना जाता है, यह स्पाइन लिफ्टिंग पोज़ है | पूर्वोत्तानासन का अर्थ है तीव्र पूर्व की ओर मुख वाला खिंचाव | यह शरीर के सामने के हिस्से को एक तीव्र खिंचाव देता है | इसके लिए मजबूत कलाई, टखनो और सबसे महत्वपूर्ण रूप से एक मजबूत कोर की आवश्यकता होती है | इस आसन का अभ्यास नियमित रूप से प्रतिदिन किया जा सकता है | यदि आपको इस आसन को करते समय किसी भी प्रकार की परेशानी आ रही है तो कुर्सी के सहारे अपनी मुद्रा का अभ्यास कर सकते हैं | 

पूर्वोत्तानासन का शाब्दिक अर्थ:-

पूर्वा = पूर्व

उन्ताना = तीव्र खिंचाव

आसन = मुद्रा

English = Upward Plank Pose

पूर्वोत्तानासन करने का तरीका :-

किसी भी आसन को करने के लिए सही तरीके का पता होना बहुत जरूरी है | जिससे होने वाली चोट से बचा जा सकता है और आसन का अधिकतम लाभ पाया जा सकता है | यह पूर्वोत्तानासन को सही तरीके से अभ्यास करने के चरण दिए हुए हैं:-
  • सबसे पहले, अपने योगा मैट पर पैरों को आगे की दिशा में फैला कर जमीन पर सीधे बैठ जाएं |
  • रीढ़ की हड्डी बिल्कुल सीधी करें आराम से कूल्हों की हड्डी से लेकर गर्दन की हड्डी एक ही एलाइनमेंट में बिल्कुल सीधी रखें |
  • हथेलियों को शरीर के बगल में जमीन पर रखें |
  • हाथों को कूल्हों से लगभग 30 सेंटीमीटर पीछे रखें।कोहनियों को सीधा रखें।
  • उंगलियों को कूल्हों की तरफ की ओर इंगित करें। गर्दन को थोड़ा झुकाएं। यह आसन की प्रारंभिक स्थिति है |
  • लंबी गहरी सांस भरते हुए शरीर को ऊपर की दिशा में उठाएं। शरीर पर दबाव डाले बिना जितना हो सके उतना ऊपर उठाएं |
  • शरीर के भार को पैरों और बाजुओं पर संतुलित करें |
  • बाजुओं को फर्श से बिल्कुल सीधा रखें और अपने पैरों के तलवों को जमीन पर दिखाने की कोशिश करें |
  • कोहनियों और घुटनों को टाइट रखें।
  • सिर को पीछे की दिशा में ढीला और नीचे लटकने दे | सामान्य रूप से सांस ले |
  • अब इस मुद्रा में 5-10 बार लंबी गहरी सांस ले | या इस स्थिति में तब तक रहे जब तक यह आरामदायक हो |
  • आदर्श शुरू से, अंतिम स्थिति में शरीर फर्श के समांतर होता है |
  • प्रारंभिक स्थिति में वापस आए। सांस छोड़ते हुए शरीर को धीरे-धीरे नीचे करें। आराम करें और गहरी सांसे लें। 

पूर्वोत्तानासन में किए जाने वाले एहतियाद :-

  • शरीर को उसकी सीमा से अधिक खींचने से बचें क्योंकि इससे मांसपेशियों में खिंचाव की परेशानी हो सकती है |
  • कलाइयों को कंधे के नीचे रखें |
  • कमजोर दिल, कमजोर कलाई या कमजोर टकने, उच्च रक्तचाप, पेट के अल्सर, हर्निया, सर्वाइकल, स्लिप डिस्क, गर्दन का दर्द, घुटने का दर्द, पेट या कंधे में किसी भी प्रकार की चोट -अगर आपको इनमें से किसी भी प्रकार की कोई भी परेशानी है तो इस आसन का अभ्यास नहीं करना चाहिए |
  • अगर आपको कलाई, गर्दन या कंधे में किसी प्रकार की चोट है तो आप संभवत पूर्वोत्तानासन का अभ्यास करने से बचना चाहेंगे तब तक कि आपकी चोट ठीक ना हो जाए।
  • अगर आपको माइग्रेन की परेशानी है तो पूर्वोत्तानासन के अभ्यास से बचें |
  • अगर आपको सिरदर्द, उच्च रक्तचाप या गर्दन पर खिंचाव है तो गर्दन को ना गिराए, इसके बजाय छाती से लगाते हुए मुद्रा करें |
  • अगर आपको सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस है तो बेहतर होगा कि आप इस मुद्रा का अभ्यास ना करें |
  • कंधों को पीछे की ओर घुमाते हुए अपनी छाती को पूरी तरह से खोलें |

पूर्वोत्तानासन से होने वाले लाभ :-

  • यह आसन थायराइड की समस्या को जड़ से समाप्त करने में सहयोग करता है |
  • यह कमर दर्द की समस्या को समाप्त करता है |
  • यह पाचन शक्ति को बढ़ाता है |
  • यह वजन कम करने में सहयोग करता है |
  • इस आसन के अभ्यास से तनाव और चिंता से मुक्ति मिलती है |
  • इस आसन का अभ्यास स्री रोगी सभी विकारों के लिए सहायक होता है|
  • श्वसन प्रणाली को मजबूत करता है जिससे अस्थमा के परेशानी से राहत मिलती है
  • यह आसन निम्न लिखित मांसपेशियों पर बहुत ही प्रभावशाली असर छोड़ता है जो हमारी मांसपेशियों के लिए बहुत ही बेहतर है :-


पूर्वोत्तानासन के अभ्यास से प्रभावित मांसपेशियां :-

  • आपके ट्राइसेप्स को मजबूत करता है।
  • आपके क्वाड्रिसेप्स को मजबूत करता है।
  • आपके हैमस्ट्रिंग को मजबूत करता है।
  • अपनी कलाई के एक्सटेंसर को मजबूत करें।
  • आपके पोस्टीरियर डेल्टोइड्स को मजबूत करता है।
  • आपके ट्रेपेज़ियस को मजबूत करता है।
  • आपके इरेक्टर स्पाइना को मजबूत करता है।
  • आपके ग्लूटस मैक्सिमस को मजबूत करता है।
  • आपके पैरों और कूल्हों के जोड़ को मजबूत करता है।
  • आपके बछड़े (Calf) की मांसपेशियों को मजबूत करता है।
  • आपके पूर्वकाल डेल्टोइड्स को फैलाता है।
  • अपनी कलाई के फ्लेक्सर्स को स्ट्रेच करता है।
  • अपने पेक्टरलिस मेजर (Pectoralis Major) को स्ट्रेच करना है।
  • आपके Psoas पेशी को फैलाता है और खोलता है।
  • अपने पिंडलियों के सामने फैलाया है।
  • उचित ध्यान के साथ यह आपके रेक्टस एब्डोमिनिस और ट्रांसवर्सस एब्डोमिनिस को मजबूत करता है।
  • यह एक बेहतरीन हिप ओपनर है।

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