Saturday, January 30, 2021

सेतुबंधासन करने का सही तरीका और उसके फायदे || The right way and the Benefits of Setu Bandha Asana


 सेतुबंधासन करने का सही तरीका और उसके फायदे  || The right way and the Benefits of Setu Bandha Asana

                             सेतुबंधासन                            

                   सेतुबंधासन एक पीछे झुकने का आसन है जिसमें हम अपने शरीर को यू आकार में या एक सेतु के आकार में रोक सकते हैं। जिस कारण इसे अंग्रेजी भाषा में ब्रिज पोज (Bridge Pose)भी कहते हैं।  सेतुबंधासन आपकी कमर, गर्दन और छाती की मांसपेशियों को लचीला बनाता है और शरीर को आराम देता है।

अंग्रेजी नाम 

Bridge pose

सेतुबंधासन करने का तरीका

  • पीठ के बल चटाई पर जमीन पर लेट जाएं।
  • अपने दोनों घुटनों को मोड़ कर अपने कूल्हों के बराबर दूरी पर रखें
  • अपने दोनों हाथों को बगल में रखें और हथेली को नीचे की ओर रखें।
  • लंबी गहरी सांस लेते हुए अपने कूल्हों को ऊपर की तरफ उठाएं।
  • अपनी पीठ को ऐसे उठाएं कि आपकी छाती आपकी ठोड़ी को स्पर्श करें, बिना किसी दबाव के।
  • संतुलन के लिए अपने हाथों से अपनी पीठ को सहयोग दे सकते हैं, परिवर्तन के लिए आप अपने दोनों हाथों को जोड़ भी सकते हैं।
  • अपनी क्षमता के अनुसार जितनी देर हो सके उतनी देर इस आसन में पकड़ रखेंगे फिर उसके बाद श्वास छोड़ते हुए अपने कूल्हों को नीचे चटाई पर लाएंगे।
  • इस आसन का अभ्यास दो से तीन बार करेंगे।

सेतुबंधासन करने के लाभ

  • यह आसन रक्तचाप और दमा के मरीजों के लिए बहुत अच्छा है।
  • यह आसन जांघों की मांसपेशियों को भी मजबूत करता है।
  • यह पाचन को बेहतर बनाने में मदद करता है।
  • यह आपकी पीठ की मांसपेशियों को मजबूत व लचीला बनाता है।
  • यह आपकी श्वास प्रणाली में सुधार करता है।
  • यह आसन थायराइड के रोगियों के लिए भी बहुत अच्छा है।
  • सेतुबंधासन पाचन अंग की मालिश करता है और पाचन में सुधार करने में मदद करता है।

सेतुबंधासन में किए जाने वाली सतर्कता

  • उचित परिणाम के लिए इस आसन का अभ्यास खाली पेट करना सुनिश्चित करें।
  • गर्दन और कंधे में दर्द के दौरान इस आसन का अभ्यास ना करें।
  • इस आसन के अभ्यास के दौरान अपनी गर्दन को दाएं या बाएं ना करें।
  • पीठ में दर्द या चोट के दौरान इस आसन का अभ्यास ना करे।

सेतुबंधासन से पहले करने वाला आसन

सेतुबंधासन का अभ्यास करने से पहले भुजंगासन और गरुण आसन का अभ्यास करना चाहिए जिससे हमें सेतुबंधासन का अभ्यास करने में अधिक परेशानी ना हो।

सेतुबंधासन के बाद करने वाले आसन

सेतुबंधासन का अभ्यास करने के बाद सर्वांगासन का अभ्यास अवश्य करना चाहिए।

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