Friday, February 5, 2021

पादहस्तासन करने का सही तरीका और उसके फायदे ||The right way and the Benefits of Padahastasana

 पादहस्तासन करने का सही तरीका और उसके फायदे ||The right way and the Benefits of Padahastasana 

पादहस्तासन aपादहस्तासन एक आगे झुकने का आसन है। यह आसन हठयोग प्रदीपिका के 12 मुख्य मुद्रा में से एक है। पादहस्तासन सूर्य नमस्कार की श्रृंखला का भी हिस्सा है। यह सूर्य नमस्कार के तीसरे आसन और दसवें आसन के रूप में आता है।

        इस आसन का नाम संस्कृत भाषा से लिया गया है। "पाद" का अर्थ है "पैर", "हस्त" का अर्थ है "हाथ" और "आसन" जिसका अर्थ है "पोस्टर" मतलब है "हाथ और पैरों का आसन"।
      हमारी मांसपेशियों, कण्डरा(Tendon), स्नायुबंधन(Ligaments), फासिआस(Fascias), और मूल रूप से पूरे सिस्टम (system)एक निष्क्रिय दिन के अंत में ध्यान देना चाहता है। कुर्सियों में बिताए हुए स्थिर जीवन से शरीर के अंग सख्त, तंग और बेजान हो जाते हैं। पादहस्तासन में खिंचाव के माध्यम से शारीरिक अंगों को शक्ति प्रदान करना हैं। 
     यह आपकी रीढ़ को लचीला बनाने में आपकी मदद कर सकता है जबकि आपकी पीठ, पैर और पेट को टोन करता है।  योग विशेषज्ञों द्वारा आसन की अत्यधिक अनुशंसा की जाती है, क्योंकि इसमें कई तरह के लाभ होते हैं। इसलिए पादहस्तासन और उससे होने वाले फायदों के बारे में और जानने के लिए पढ़ें।




अंग्रेजी नाम 

Hand To Feet Pose

पादहस्तासन  के अद्भुत फायदे

  • पादहस्तासन हैमस्ट्रिंग मसल्स को स्ट्रेच करता है। 
  • कार्पल टनल सिंड्रोम के लिए यह आसन चिकित्सीय है
  • यह आसन रक्त प्रवाह बेहतर करता है। 
  • पादहस्तासन तनाव को खत्म करने वाला आसन है। 
  • पादहस्तासन मेटाबॉलिज्म को गति देता है। 
  • पादहस्तासन की लगातार अभ्यास से शरीर स्वस्थ और युवा रहता है। 
  • पादहस्तासन शरीर को बहुत लचीला बनाता है। यह पीठ और पैर की मांसपेशियों को फैलाता है।
  • यह पेट की अतिरिक्त चर्बी को खत्म करने में मदद करता है।
  • यह पाचन में सुधार करता है और कब्ज को कम करता है। यह पेट की कई बीमारियों को खत्म करता है। 
  • यह रीढ़ को लचीला बनाता है और तंत्रिकाओं को टोन करता है।
  • तनाव से राहत देकर गर्दन और कंधों को आराम देता है।
  • संतुलन शरीर में समग्र कल्याण को बढ़ावा देने के लिए विरोध करता है।
  • मन को शांत करता है और केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को शांत करता है।
  • यह एकाग्रता को बढ़ाता है और चयापचय को भी बढ़ाता है।
  • पादहस्तासन हृदय रोगों के लिए फायदेमंद है।


कैसे करें पादहस्तासन  

  • सबसे पहले अपने योग मैट पर सीधे खड़े हो जाए।
  • खड़े होकर शरीर को कूल्हों से आगे की ओर झुकाएं।
  • अपने हाथों को फर्श पर स्पर्श करें। अपने घुटनों को जितना हो सके सीधा रखें।
  • बाहों को फर्श से छूने दें। यदि यह मुश्किल है तो हाथ केवल उतना ही ले जाएं जितना कि बिना तनाव के संभव है। आगे झुकते ही सांस छोड़ें।
  • माथे को पैरों के करीब ले जाए। माथे से घुटनों को छूने की कोशिश करें। इसके लिए बहुत लचीलेपन की आवश्यकता हो सकती है। शुरुआती चरणों में, इसे केवल उतना ही लें जहां तक यह आरामदायक हो।
  • पूर्ण आसन में पहुंचने के बाद 7-8 बार लंबी लंबी गहरी सांस लें
  • अब आराम-आराम से सांस लेते हुए सीधे हो आ जाएं और हाथों को ऊपर  ले जाते हुए सीधे खड़े हो जाएं।
  • जब यह आसन सूर्य नमस्कार (सूर्य नमस्कार अभ्यास) के भाग के रूप में किया जाता है तो इस आसन को करते समय एक मंत्र का जाप किया जा सकता है।  "ओम सवित्रे नमः"। इसका अर्थ है परोपकारी माता को प्रणाम।

सावधानी और चेतावनी

  • पीठ झुकने वाले आसन से पहले या बाद में पादहस्तासन करें जैसे कि:- भुजंगासन, चक्रासन , सेतु-बंधासन।
  • आगे बढ़ते समय, सिर और घुटनों को एक इकाई के रूप में सीधा रखें। कूल्हों के सहारे झुकें न कि कमर के सहारे।
  • जितना हो सके उतना स्ट्रेच करें और आराम से ज्यादा से ज्यादा समय तक आसन में रहें।
  • अगर कोई कूल्हे की चोट से पीड़ित है तो इस मुद्रा ना करें।
  • जो लोग पीठ दर्द या कूल्हे की चोट से पीड़ित हैं, उन्हें विशेषज्ञ योग प्रशिक्षक से शिक्षा लेनी चाहिए।
  • यदि आप अल्सर से पीड़ित हैं तो आपको इस आसन का अभ्यास नहीं करना चाहिए।
  • जिन लोगों को उच्च रक्तचाप होता है, उन्हें यह आसन  योग प्रशिक्षक की देखरेख में करना चाहिए।
  • जिन लोगों को दिल की समस्या है, उन्हें यह आसन योग प्रशिक्षक की देखरेख में करना चाहिए।
  • जिन लोगों को घुटने की समस्या है, उन्हें यह आसन योग प्रशिक्षक की देखरेख में करना चाहिए।
  • जिन लोगों को पेट की हर्निया है, उन्हें यह आसन योग प्रशिक्षक की देखरेख में करना चाहिए।

पादहस्तासन  के बाद किए जाने वाले आसन

  • सुषमा व्यायाम (Sushma Exercise)
  • उत्थिता पार्सवकोनासन (Uttitha Parsvakonasana)
  • प्रसारिता पादोत्तानासन (Prasarita Padottanasana)
  • परिव्रत त्रिकोणासन (Parivrtta Trikonasana)
  • उदिता त्रिकोनासन (Udita Trikonasana)

पादहस्तासन  के पहले किए जाने वाले आसन

  • जनुसिरसाना (Janusirsana)
  • सुपता पद्यंगुशासन (Supta Padyungushasana)
  • पस्चिमोत्तानासन (Paschimottanasana)
  • अधो मुख अवनसाना (Adho Mukh Savasana)

Healthy Long Life के इस ब्लॉग पे हम आपको  कुछ ऐसे ही असनो के बारे में बताये गे | ओर जानकारी के लिए हमारे साथ जुड़े रहे और अपनी टिप्पणी देना न भूले | 


Monday, February 1, 2021

भुजंगासन करने का सही तरीका और उसके फायदे || Right way to do Bhujangasana and its benefits

भुजंगासन करने का सही तरीका और उसके फायदे || Right way to do Bhujangasana and its benefits


भुजंगासन 

 भुजंग शब्द संस्कृत भाषा से लिया गया है जिसका अर्थ है सर्प इसलिए भुजंगासन को सर्प आसन भी कहते हैं| जिसका अंग्रेजी में अर्थ है कोबरा पोज |भुजंगासन भुजाओ पर किए जाने वाला आसन है इस आसन में आपके शरीर का अधिकतर वजन आपकी भुजाओं पर होता है| यह आसन पीठ दर्द के रोगियों के लिए अत्यधिक गुणकारी होता है| भुजंगासन का अभ्यास खाली पेट ही करना चाहिए| इसका अभ्यास खाना खाने के 4 घंटे बाद भी किया जा सकता है| 

अंग्रेजी नाम 

Cobra Posees

भुजंगासन के 10 फायदे

  • भुजंगासन रीढ़ की हड्डियों को मजबूत और लचीला बनाता है |
  • भुजंगासन वजन और मोटे पेट को कम करने में फायदेमंद है|
  • भुजंगासन  के नियमित अभ्यास से कब्ज रोग दूर होता है गैस की समस्या घटती है पाचन तंत्र मजबूत होता है |
  • भुजंगासन रक्त परिसंचरण में सुधार करने में आपकी मदद करता है| जब एक बार शरीर में रक्त संचार अच्छा होता है तो आपके शरीर की कोशिकाओं को पूर्ण पोषण और ऑक्सीजन तत्व मिलते हैं| बेहतर रक्त संचार के कारण हार्मोनल संतुलन बना रहता है|
  • हार्मोनल असंतुलन के कारण यह आसन महिलाओं के लिए भी लाभकारी माना जाता है, यह आसन मानसिक धर्म की अनियमितता को नियंत्रण करने के लिए बहुत ही लाभकारी होता है|
  • भुजंग आसन के अभ्यास से पेट की स्ट्रेचिंग होती है जिससे यह आपके पेट के अंगों को सीधे प्रभावित करता है, इसी कारण भुजंगासन पाचन शक्ति को बढ़ाता है|
  • तनाव को कम करने के लिए योग एक रामबाण उपाय माना जाता है| योग के अभ्यास में भुजंगासन तनाव को कम करने के लिए बड़ा ही उत्तम आसन है इस आसन के अभ्यास के दौरान हमारे शरीर में कुछ हार्मोन उत्पादित होते हैं, जो तनाव, चिंता, और थकान आदि से छुटकारा दिलाते हैं|
  • नियमित रूप से भुजंगासन करने से श्वास क्रिया बेहतर हो जाती है|
  • फेफड़ों और हार्ट की नसों के ब्लॉकेज को खोलने में भी भुजंगासन मदत करता है|
  • क्षय रोग जिसे हम टीवी के नाम से भी जानते हैं,भुजंगासन के लगातार अभ्यास से हम इसको भी जड़ से समाप्त कर सकते हैं|

कैसे करें भुजंगासन

  • भुजंगासन के अभ्यास के लिए सर्वप्रथम अपने मैट पर पेट के बल उल्टा लेट जाएं| पैरों के तलवे छत की ओर होने चाहिए|
  • दोनों कोहनी दोनों तरफ की पसलियों से सटी हुई रखकर, दोनों हाथों की हथेलियां जमीन पर लगा दे| याद रहे कि आपके हाथ के पंजे सीधे होने चाहिए और जमीन की और होनी चाहिए, तथा दोनों कोनिया सीधी आकार की और मुड़ी होनी चाहिए|
  • अपने दोनों पैरों को एक साथ और सीधा रखें|
  • अब धीरे से अपने शरीर का वजन अपनी हथेलियों पर डालें, सांस भीतर खींचे और अपने सिर को उठाकर पीठ की तरफ खींचे| 
  • सबसे पहले मस्तक फिर छाती और आखरी में नाभि वाले हिस्से को ऊपर की तरफ उठाएंगे| ध्यान दें इस प्रक्रिया के दौरान आप की कोहनी मुड़ी ना हो|
  • इस आसन में रहकर ऊपर आसमान की ओर देखें और कोशिश करें कि इस आसन में कुछ देर ठहरें|
  • पीठ जितनी मोड सके आराम से उतनी ही मोड़े अपनी क्षमता से अधिक ना मोड़े|
  • इस स्थिति में 15 से 30 सेकंड के लिए रूठे उसके बाद गहरी सांस लेते हुए सामान्य अवस्था में आ जाए और इस आसन को फिर से दोहराएं| आसन में 30 से 70 सेकंड तक रह सकते हैं, धीरे-धीरे जैसे आपके शरीर में ताकत और लचीलापन भरने लगे, आप समय बढा सकते हैं - 2 मिनट से अधिक ना करें|

सावधानी और चेतावनी

  • आपकी पीठ में चोट हो तो यह आसन ना करें|
  • गर्भवती महिलाएं  को यह आसन नहीं करना चाहिए|
  • यदि अपने हाल में पेट का ऑपरेशन करवाया है तो कम से कम 3 महीने तक इस आसन का अभ्यास ना करें|
  • हर्निया के रोगी को भुजंग आसन का अभ्यास नहीं करना चाहिए|
  • अल्सर के रोगियों को भी इसका अभ्यास नहीं करना चाहिए|
  • अधिक सिरदर्द जैसी परेशानियों में इस आसन का अभ्यास ना करें|
  • कलाइयों या पसलियों के फ्रैक्चर की स्थिति में भुजंगासन का अभ्यास ना करें|

भुजंगासन के बाद किए जाने वाले आसन

  • मरज्यरासन
  • उर्ध्व मुख संवासन
  • सेतु बंधासन
  • सर्वांगासन

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