भुजंगासन करने का सही तरीका और उसके फायदे || Right way to do Bhujangasana and its benefits

भुजंगासन 

 भुजंग शब्द संस्कृत भाषा से लिया गया है जिसका अर्थ है सर्प इसलिए भुजंगासन को सर्प आसन भी कहते हैं| जिसका अंग्रेजी में अर्थ है कोबरा पोज |भुजंगासन भुजाओ पर किए जाने वाला आसन है इस आसन में आपके शरीर का अधिकतर वजन आपकी भुजाओं पर होता है| यह आसन पीठ दर्द के रोगियों के लिए अत्यधिक गुणकारी होता है| भुजंगासन का अभ्यास खाली पेट ही करना चाहिए| इसका अभ्यास खाना खाने के 4 घंटे बाद भी किया जा सकता है| 

अंग्रेजी नाम 

Cobra Pose

भुजंगासन के 10 फायदे

  • भुजंगासन रीढ़ की हड्डियों को मजबूत और लचीला बनाता है |
  • भुजंगासन वजन और मोटे पेट को कम करने में फायदेमंद है|
  • भुजंगासन  के नियमित अभ्यास से कब्ज रोग दूर होता है गैस की समस्या घटती है पाचन तंत्र मजबूत होता है |
  • भुजंगासन रक्त परिसंचरण में सुधार करने में आपकी मदद करता है| जब एक बार शरीर में रक्त संचार अच्छा होता है तो आपके शरीर की कोशिकाओं को पूर्ण पोषण और ऑक्सीजन तत्व मिलते हैं| बेहतर रक्त संचार के कारण हार्मोनल संतुलन बना रहता है|
  • हार्मोनल असंतुलन के कारण यह आसन महिलाओं के लिए भी लाभकारी माना जाता है, यह आसन मानसिक धर्म की अनियमितता को नियंत्रण करने के लिए बहुत ही लाभकारी होता है|
  • भुजंग आसन के अभ्यास से पेट की स्ट्रेचिंग होती है जिससे यह आपके पेट के अंगों को सीधे प्रभावित करता है, इसी कारण भुजंगासन पाचन शक्ति को बढ़ाता है|
  • तनाव को कम करने के लिए योग एक रामबाण उपाय माना जाता है| योग के अभ्यास में भुजंगासन तनाव को कम करने के लिए बड़ा ही उत्तम आसन है इस आसन के अभ्यास के दौरान हमारे शरीर में कुछ हार्मोन उत्पादित होते हैं, जो तनाव, चिंता, और थकान आदि से छुटकारा दिलाते हैं|
  • नियमित रूप से भुजंगासन करने से श्वास क्रिया बेहतर हो जाती है|
  • फेफड़ों और हार्ट की नसों के ब्लॉकेज को खोलने में भी भुजंगासन मदत करता है|
  • क्षय रोग जिसे हम टीवी के नाम से भी जानते हैं,भुजंगासन के लगातार अभ्यास से हम इसको भी जड़ से समाप्त कर सकते हैं|

कैसे करें भुजंगासन

  • भुजंगासन के अभ्यास के लिए सर्वप्रथम अपने मैट पर पेट के बल उल्टा लेट जाएं| पैरों के तलवे छत की ओर होने चाहिए|
  • दोनों कोहनी दोनों तरफ की पसलियों से सटी हुई रखकर, दोनों हाथों की हथेलियां जमीन पर लगा दे| याद रहे कि आपके हाथ के पंजे सीधे होने चाहिए और जमीन की और होनी चाहिए, तथा दोनों कोनिया सीधी आकार की और मुड़ी होनी चाहिए|
  • अपने दोनों पैरों को एक साथ और सीधा रखें|
  • अब धीरे से अपने शरीर का वजन अपनी हथेलियों पर डालें, सांस भीतर खींचे और अपने सिर को उठाकर पीठ की तरफ खींचे| 
  • सबसे पहले मस्तक फिर छाती और आखरी में नाभि वाले हिस्से को ऊपर की तरफ उठाएंगे| ध्यान दें इस प्रक्रिया के दौरान आप की कोहनी मुड़ी ना हो|
  • इस आसन में रहकर ऊपर आसमान की ओर देखें और कोशिश करें कि इस आसन में कुछ देर ठहरें|
  • पीठ जितनी मोड सके आराम से उतनी ही मोड़े अपनी क्षमता से अधिक ना मोड़े|
  • इस स्थिति में 15 से 30 सेकंड के लिए रूठे उसके बाद गहरी सांस लेते हुए सामान्य अवस्था में आ जाए और इस आसन को फिर से दोहराएं| आसन में 30 से 70 सेकंड तक रह सकते हैं, धीरे-धीरे जैसे आपके शरीर में ताकत और लचीलापन भरने लगे, आप समय बढा सकते हैं - 2 मिनट से अधिक ना करें|

सावधानी और चेतावनी

  • आपकी पीठ में चोट हो तो यह आसन ना करें|
  • गर्भवती महिलाएं  को यह आसन नहीं करना चाहिए|
  • यदि अपने हाल में पेट का ऑपरेशन करवाया है तो कम से कम 3 महीने तक इस आसन का अभ्यास ना करें|
  • हर्निया के रोगी को भुजंग आसन का अभ्यास नहीं करना चाहिए|
  • अल्सर के रोगियों को भी इसका अभ्यास नहीं करना चाहिए|
  • अधिक सिरदर्द जैसी परेशानियों में इस आसन का अभ्यास ना करें|
  • कलाइयों या पसलियों के फ्रैक्चर की स्थिति में भुजंगासन का अभ्यास ना करें|

भुजंगासन के बाद किए जाने वाले आसन

  • मरज्यरासन
  • उर्ध्व मुख संवासन
  • सेतु बंधासन
  • सर्वांगासन

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