Wednesday, September 29, 2021

लोअर बैक पेन से राहत देने वाले 9 महत्वपूर्ण आसन || Yoga Pose for Lower Back Pain

लोअर बैक पेन से राहत देने वाले 9 महत्वपूर्ण आसन  || Yoga Pose for Lower Back Pain      

पीठ के निचले हिस्से में दर्द आज के समय में एक बड़ी ही आम परेशानी बन गई है |  और दर्द के कई कारण भी हो सकते हैं, कमजोर रीड की हड्डी, पूरे दिन बैठने की खराब मुद्रा, या पूरे दिन खड़े रहने का काम | पीठ के निचले हिस्से में दर्द का कारण तनाव भी हो सकता है | यह जानना अति आवश्यक है कि पीठ के दर्द का कारण क्या है | ताकि दर्द का सही कारण जानकर सही उपाय किया जा सके, और दर्द दोबारा होने से रोक सके | लेकिन ज्यादातर परिस्थितियों के लिए कुछ आसान आसन है जो सभी प्रकार के कमर के निचले दर्द से राहत दिला सकते हैं |

       योग के अभ्यास से कमर को लचीलापन और कमर की हड्डी मजबूत व मुद्रा को सही किया जा सकता है - और यह सभी स्वस्थ पीठ के लिए आवश्यक है | कई प्रोफेशनल फिजिकल थेरेपी मानते हैं कि योग का अभ्यास प्रतिदिन करना सुरक्षित है | लेकिन यह जानना भी अति आवश्यक है कि आप अपने शरीर के अनुसार तथा दर्द के कारण के अनुसार आसन का अभ्यास करें | और ऐसा कुछ भी ना करें जिसके कारण आपकी परेशानी ओर बदतर बना दे | यदि आपकी पीठ के निचले हिस्से की चोटों का कोई इतिहास है, और आपकी डिस्क में कोई समस्या है, या दर्द जो 72 घंटे से अधिक समय तक रहता है, तो कोई भी व्यायाम करने से पहले एक बार भौतिक चिकित्सक को देखना अति आवश्यक है |

     वहीं दूसरी ओर यदि आपकी पीठ के निचले हिस्से में दर्द सामान्य दर्द है, तो किसी भी जकड़न और संरेखण के मुद्दों को दूर करने के लिए कुछ योगासन करने की कोशिश करना उचित है। लेकिन अगर आपको गंभीर दर्द होता है, तो कभी-कभी दर्द या पुराने दर्द वाले लोगों को कुछ मुद्राओं से बहुत फायदा हो सकता है जो आपकी रीढ़ की हड्डी को आराम दे, आपकी मांसपेशियों को फैलाने और मजबूत करने में मदद कर सकते हैं, और अपनी पीठ को उचित संरेखण में वापस कर सकते हैं |

          इस लेख में हम आपको कुछ ऐसे आसनों के बारे में बताएंगे जो करने में बहुत ही सरल है साथ ही जिन का परिणाम बहुत ही अच्छा है |

1. बालासन  Child Pose (Balasana)

बालासन 

           बालासन को अंग्रेजी भाषा में कैट चाइल्ड पोज (Child Pose) भी कहते हैं | बालासन देखने में बहुत ही सरल आसन है, देखने वालों को ऐसा लगता है कि इस में आप आराम कर रहे हैं किंतु आसन का अभ्यास करते समय हमारे पीठ को इस मुद्रा में सक्रिय खिंचाव होता है जिसमें पीठ को लंबा करने में मदद मिलती है | यह एक लंबे दिन की थकावट को दूर करने के लिए सोने से पहले किया जाने वाला बहुत ही उत्तम आसन है |
यह मुद्रा किसी भी अभ्यास को करने से पहले पीठ को एक हल्का खिंचाव देने के लिए अति उत्तम आसन है | यह गर्दन कंधोऔर धड़ की मांसपेशियों को खुलने में मदद करता है और समय के साथ लचीलापन बढ़ाता है |

2. मार्जरी आसन  Cat/ Cow (Marjariasana)

मार्जरी आसन 
              मार्जरी आसन को अंग्रेजी भाषा में कैट स्ट्रेच पोज (Cat Stretch Pose) भी कहते हैं | क्योंकि इस आसन के अभ्यास के दौरान शरीर को बिल्ली के सम्मान ही बढ़ाया जाता है इसलिए इसको यह नाम दिया गया था | 
मार्जरी आसन पीड़ादायक दर्द को एकदम ठीक करने और पीठ की मांसपेशियों को ढीला करने के लिए उत्तम आसन है | इस असम का अभ्यास आप प्रतिदिन योगाभ्यास के रूप में भी कर सकते हैं |

3. अधोमुख श्वानासन Downward Facing Dog (Adho Mukha Shvanasana)

अधोमुख श्वानासन

           अधोमुख श्वानासन को अंग्रेजी भाषा में Downward Facing Dog भी कहते हैं | यह आसन हैमस्ट्रिंग Hamstring Muscles और बछड़ों की मांसपेशियों और हाथ पैरों की मांसपेशियों को मजबूत करता है | यह पीठ और साइटिका के दर्द को कम करता है और कंधों को मजबूत करता है | यह  पेट की मांसपेशियां abdominal muscles को भी  मजबूत करता है | यह आसन हमें तनाव मुक्त करता है | रक्त परिसंचरण को उत्तेजित करता है | 

4. पादहस्तासन Standing Forward Bend (Padahastasana)

पादहस्तासन 

          पादहस्तासन को अंग्रेजी भाषा में स्टैंडिंग फॉरवर्ड बैंड (Standing Forward Bend) भी कहते हैं |यह आसन हैमस्ट्रिंग मांसपेशियों Hamstring Muscles  और पीठ की मांसपेशियों को लचीलापन बढ़ाता है | इस असम के कई फायदे हैं | जैसे कि : यह पाचन अंगों की मालिश करता है , पेट फूलना, अपचन, कब्ज और गैस की परेशानी कम करता है, चयापचय में सुधार करता है, जीवन शक्ति बढ़ाता है, शरीर में लचीलापन बढ़ाता है | इस आसन के अभ्यास से कंधों की मांसपेशियां तनाव रहित होती है |

5. भुजंगासन  Cobra Pose (Bhujangasana )

भुजंगासन 

          भुजंगासन को अंग्रेजी भाषा में कोबरा पोज (Cobra Pose ) भी कहते हैं | यह आसन पेट के बल उल्टा लेट कर किया जाता है | यह मुद्रा आपकी छाती की मांसपेशियों को खोलने में, आपके पेट की मांसपेशियों को फैलाने में और आपकी पीठ को जोड़ने का काम करता है |

6. कपोतासन Reclined Pigeon Pose (Kapotasana)



                   कपोतासन को अंग्रेजी भाषा में रिक्लाइंड पिजन पोज (Reclined Pigeon Pose) भी कहते हैं | यह आसन योग के नए छात्रों के लिए थोड़ा मुश्किल है | हिप रोटेटर और फ्लेक्सर्स को फैलाता है। यह आसन पीठ दर्द से राहत नहीं दिला सकता किंतु तंग कूल्हे पीठ के निचले हिस्से में दर्द में योगदान कर सकते हैं। यह कूल्हों को खोलने के लिए सबसे अच्छे स्ट्रेच में से एक है। जो लोग पूरे दिन बैठकर काम करते हैं उनके लिए यह प्रतिदिन किए जाने वाला अच्छा आसन है

7. मत्स्येन्द्रासन  Reclined Supine Twist (Matsyendrasana)

मत्स्येन्द्रासन 

            मत्स्येन्द्रासन को अंग्रेजी भाषा में रिक्लाइंड सुपाइन ट्विस्ट पोज (Reclined Supine Twist) भी कहते हैं | |मत्स्येन्द्रासन आसन का अभ्यास करने से बहुत से रोग दूर होते हैं | इस आसन का अभ्यास करने से कमर हमेशा स्वस्थ और लचीला बना रहता है | इसका अभ्यास करने से पेट, कमर और जोड़ों के दर्द की समस्या से राहत मिलती है | पाचन शक्ति को सुचारू रूप से करने के लिए आसन का अभ्यास किया जाता है |

8. उत्थित त्रिकोणासन  Extended Triangle Pose (Utthita Trikonasana)

उत्थित त्रिकोणासन 
        उत्थित त्रिकोणासन को अंग्रेजी भाषा में कैट एक्सटेंड ट्रायंगल पोज ( Extended Triangle Pose ) भी कहते हैं | यह खड़े होकर किए जाने वाले आसन है | यह आसन रीड, कूल्हों और कमर सहित सभी मांसपेशियों को होता है | साथ ही यह है कंधों, छाती और पैरों को भी मजबूत बनाता है | यह आसन पीठ और गर्दन के दर्द को कम करने में मदद करता है |

9. शलभासन  Locust Pose  (Salabhasana)

         शलभासन को अंग्रेजी भाषा में कैट लोकस्ट पोज (Locust Pose) भी कहते हैं | यह आसन पेट के बल किए जाने वाला एक बहुत ही सरल आसन है | यह कमल आसन पीठ के निचले हिस्से में दर्द और थकान को दूर करने में मदद करता है | यह पीठ धड़ और हाथों को मजबूत करता है |

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Sunday, September 26, 2021

कमजोर पाचन के लिए योग || Best 10 Yoga asanas for digestion

 पाचन के लिए योग || Best 10 Yoga asanas for weak digestion

         जब आपको पाचन संबंधी समस्याएं होती हैं, तो आप तेजी से राहत पाना चाहते हैं। कमजोर पाचन आज के समय में बड़ी आम परेशानी है | कमजोर पाचन होने के कई कारण होते हैं जैसे कि डायरिया कॉन्स्टिपेशन और आदि कई परेशानियां | च के कारण पेट फूलना, पेट दर्द, एसिडिटी, कब्ज और लूज मोशन जैसी कई स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। भोजन का पाचन आपके मुंह में शुरू होता है और फिर पेट और फिर आंतों तक जाता है। भोजन टूट जाता है और शरीर द्वारा अवशोषित कर लिया जाता है। पाचन प्रक्रिया से अपशिष्ट उत्पाद गुदा के माध्यम से समाप्त हो जाते हैं और इसे शौच कहा जाता है। कमजोर पाचन हमारे गलत खान पीन के तरीके और अस्वस्थ जीवन शैली के कारण भी हो सकता है | पाचन तंत्र को बेहतर करने के लिए आजकल बाजार में कई प्रकार की दवाइयां उपलब्ध कराई जा रही हैं किंतु यह दवाइयां हमें फायदे के साथ-साथ कई प्रकार के नुकसान भी देती है और साथ ही यह पाचन की समस्या को जड़ से समाप्त भी नहीं करती अगर हमें पाचन की समस्या के जड़ से मुक्ति चाहिए तो हमें इसके लिए कोई बेहतर उपाय देखना होगा और योग एक ऐसा ही बेहतर उपाय हैं | जो हमें कमजोर पाचन से मुक्ति दिला सकता है | जी हां, कई अध्ययनों से  यह पाया गया है कि योग के लगातार अभ्यास करने से ना ही हमारा शरीर लचीला और मजबूत होता है बल्कि यह हमारे पाचन तंत्र को बेहतर करता है | स्वस्थ शरीर के लिए भोजन का उचित पाचन आवश्यक है। आपकी खाने की आदतें और गतिविधियां सीधे पाचन प्रक्रिया को प्रभावित करती हैं। आप अपनी जीवनशैली या खाने की आदतों में बदलाव करके अपने पाचन तंत्र को स्वस्थ और मजबूत रख सकते हैं। 

योग क्या है?

         योग एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके निरंतर उपयोग से हम अपने शरीर को सभी परेशानियों से अपने मन को सभी चिंताओं से मुक्त कर सकते हैं | योग तनाव को कम करके रक्त संचार में वृद्धि करता है तथा आंतों की गतिशीलता को बढ़ाकर पाचन संबंधित सभी समस्याओं को दूर करने में मदद करता है | हालांकि पाचन संबंधित समस्याओं में इसकी भूमिका को समझने के लिए वैज्ञानिकों को और अधिक शोध करने की आवश्यकता है | पाचन तंत्र को सुधारने के लिए तथा इससे संबंधित सभी परेशानियों को कम करने के लिए एलोपैथिक दवाइयां है किंतु इन सभी दवाइयों से हमारे शरीर पर किसी ना किसी प्रकार का आहत होता हैं तथा दूसरी तरफ योग जिसकी निरंतर अभ्यास से हम अपने पाचन तंत्र को सुधार सकते हैं साथ ही इससे शरीर को परेशानी नहीं होती |

योगासन पाचन में सुधार कैसे कर सकते हैं ?

       योग के नियमित अभ्यास से शरीर को प्रभावी ढंग से विषहरण किया जाता है, खराब आहार, अस्वस्थकर  जीवन शैली और तनाव से जमा हुआ विषहरण पदार्थ बाहर निकल जाता है | इसका नियमित रूप से अभ्यास करके, अपने तनाव को कम कर तथा अपनी दिनचर्या में कुछ शांति जोड़कर हम सहानुभूति तंत्रिका तंत्र को भी शांत कर सकते हैं | आसन के नियमित अभ्यास से हमारे पेट पर हल्का दबाव डालता है और यह हमारे पेट की आंतों की मालिश करता है | पाचन अंगों में रक्त का संचार बनाता है जिससे पाचन में सहायता मिलती है | मल त्याग नियंत्रित होता है और कब्ज की परेशानी भी दूर होती है |

कमजोर पाचन के लिए 10 योग आसन

1. भारद्वाजासन (Seated Twist Pose)
                     भारद्वाजासन के अभ्यास से शरीर की मांसपेशियां तथा कमर की और कंधों की मांसपेशियां लचीली बनती है | यह आसन पीठ दर्द, पेट की चर्बी, कमर की चर्बी, कब्ज की समस्या,गर्दन के दर्द, कमर दर्द जैसी परेशानियों को भी दूर करता है | साथ ही इस आसन के नियमित अभ्यास से कूल्हों, कंधों, कमर, गर्दन की मांसपेशियां मजबूत व लचीली बनती है |  यह आसन कमर और कंधों को लचीला और मजबूत बनाता है | कमर में होने वाले खिंचाव के कारण यह आसन हमारे मेटाबॉलिज्म को बूस्ट पड़ता है तथा हमारी पाचन शक्ति को भी बढ़ाता है जिससे हमारे पेट से जुड़ी कई समस्याएं भी समाप्त होती हैं |

                           पादांगुष्ठासन आगे की ओर झुकने वाला आसन है | इस आसन के अभ्यास से हमारे कमर की मांसपेशियों लचीली बनती है | यह आसन पेट की चर्बी को कम करता है | यह आसन श्रोणि  मांसपेशियों को मजबूत करता है और लचीला बनाता है | यह आसन तनाव, टेंशन, डिप्रैशन, एंजायटी जैसी कई समस्याओं के खतरे से भी बचाता है | खराब लाइफस्टाइल के कारण मोटापे और डायबिटीज जैसी समस्याएं होती है, इस आसन के अभ्यास से हम इन समस्याओं से भी मुक्ति पा सकते हैं | पादांगुष्ठासन के अभ्यास से लोअर बैक, पैर और एड़ी हैमस्ट्रिंग मसल, पेल्विक मसल और आदि कई मांसपेशियां मजबूत होती है और लचीलापन आता है |      
पादांगुष्ठासन 


3. नौकासन (Boat Pose)
                  नौकासन बैठकर किए जाने वाले आसनों की श्रेणी मे आता है | इस आसन को करने के दौरान हमारा    शरीर V अक्षर की आकृति का बन जाता है | नौकासन के अभ्यास से लोअर बैक, बायसेप्स मसल्स,  ट्राइसेप्स मसल्स, पैर के पंजे और टकले मजबूत बनाया जाता है | इस आसन को करने के कई फायदे हैं, यह आसन शरीर के एलाइनमेंट को सुधारता है, पाचन शक्ति को बढ़ाता है, शरीर के संतुलन को बेहतर करता है|
नौकासन 

                                   
                         धनुरासन पेट के बल किए जाने वाला एक बहुत ही महत्वपूर्ण आसन है क्योंकि इस आसन के अभ्यास करते समय हमारा शरीर धनुष के आकार का हो जाता है इसलिए इसका नाम धनुरासन है | यह आसन डायबिटीज, अस्थमा, कब्ज, थायराइड जैसी कई बीमारियों के लिए रामबाण इलाज है | इस  आसन के अभ्यास से स्लिप डिस्क मे बहुत हद तक आराम मिलता है | धनुरासन वजन कम करने के लिए एक उत्तम योगासन है |
इस आसन को करने से पेट पर दबाव पड़ता है जिससे पाचन तंत्र बेहतर होता है |
                           
धनुरासन 

                       
                           सेतुबंध आसन में आप अपने शरीर को एक सेतु के आकार में बांधकर रोक सकते हैं इसलिए इसका नाम सेतुबंध आसन रखा गया है | सेतुबंध आसन कंधों, रीड की हड्डी को मजबूत करता है | यह आपकी गर्दन और रीढ़ की हड्डी में लचीलापन लाता है | सेतुबंध आसन पेट के के अंगों, फेफड़ों और थायराइड को उत्तेजित बनाता है तथा इनमें  रक्त संचार बढ़ाता है | यह आसन छाती, गर्दन और रीढ़ की हड्डी में खिंचाव लाता है | इस आसन के अभ्यास से चिंता, थकान, सिर दर्द और अनिद्रा कम होती है | यह आसन पाचन में भी सुधार लाता है | सेतुबंध आसन दमा हाई बीपी के पेशेंट के लिए बहुत ही उत्तम आसन है |
                       

सेतुबंधासन 

                                           
6.भुजंगासन (Cobra Pose)   
भुजंगासन

भुजंगासन 

                       भुजंगासन पेट के बल की जाने वाला आसन है यह आसन सूर्य नमस्कार के 12 मुद्राओं में से एक मुद्रा है | इस आसन में शरीर सांप की आकृति का बन जाता है जिस कारण इसे अंग्रेजी भाषा में Cobra pose भी कहते हैं | इस आसन से हमारी रीढ़ की हड्डी मजबूत व लचीली बनती है | भुजंगासन हर्निया के मरीजों को नहीं करना चाहिए | इस आसन के कई लाभ हैं जैसे की यह आसन पेट के नीचे हिस्से में मौजूद सभी अंगों के काम करने की क्षमता बढ़ाता है, पाचन तंत्र, मूत्र मार्ग की समस्याएं दूर होती हैं, फेफड़े, के, सीने और पेट के निचले हिस्से को अच्छे से खिंचाव मिलता है, टेंशन दूर होती है और डिप्रेशन से भी राहत मिलती है|                

7.अधोमुख श्वानासन (Downward facing Dog Pose)  
                                         अधोमुख श्वानासन एक बहुत ही महत्वपूर्ण आसन है | यह आसन सूर्य नमस्कार के 12  आसनों में से एक आसान है | यह पेट की निचली मांसपेशियों को मजबूत बनाता है, रक्त संचार बढ़ता है, पाचन तंत्र सुधरता है, एंजाइटी, सिरदर्द, थकान जैसी परेशानियां कम करता है | मस्तिष्क में रक्त संचार बढ़ता है |
                       

अधोमुख श्वानासन 




8.त्रिकोणासन (Triangle Pose)
                     त्रिकोणासन खड़े होकर किए जाने वाला एक बहुत ही महत्वपूर्ण आसन है | इस आसन में हमारा शरीर त्रिकोण की आकृति का हो जाता है इसलिए इसे त्रिकोणासन कहते हैं | त्रिकोणासन कमर को कम करने के लिए एक अति उत्तम योगासन है यह मोटापा घटाने के साथ-साथ शरीर में लचीलापन भी लाता है | यह आसन हाइट बढ़ाने के लिए, फेफड़ों के लिए, शरीर में ऊर्जा बढ़ाने के लिए अति उत्तम आसन है | यह मधुमेह, कमर दर्द, एसिडिटी, चिंता व तनाव को भी कम करता है | यह स्टैमिना बनाता है शरीर को लचीला बनाता है शरीर में संतुलन बनाने के लिए उत्तम आसन है |
त्रिकोणासन 


9.मत्स्यासन (Fish Pose)
                 मत्स्यासन पीठ के बल किए जाने वाला आसन है | यह आसन सीने और गर्दन की मांसपेशियों में खिंचाव लाता है तथा कंधों गर्दन की मांसपेशियों को टेंशन से मुक्ति देता है | यह आसन दमा की परेशानी से भी मुक्ति देता है | इसके अभ्यास से गले और पाचन अंगों को अच्छी मसाज मिलती है | यह आसन कब्ज, सांस से संबंधित बीमारियां, हल्का पीठ दर्द, थकान बेचैनी जैसी परेशानियों से मुक्ति देता है | मत्स्यासन से पीठ और कमर मजबूत होती हैं तथा आसन के दौरान गर्दन में बनने वाले मोड़ से थायराइड में फायदा पहुंचता है |
मत्स्यासन 


10. अर्ध मत्स्येन्द्रासन (Half hold of Fish Pose)
               अर्धमत्स्येंद्रासन को  हाफ स्पाइनल पोज या वक्रासन भी कहते हैं | अर्धमत्स्येंद्रासन आप की रीड की हड्डी के लिए अत्यंत लाभकारी है | यह आसन रीड की हड्डी को लचीली बनाता है, मसल को खोलता है| शरीर को तनाव और चिंता से मुक्त करता है |  पाचन तंत्र बेहतर करता है , मधुमेह को कंट्रोल करता है , कमर की अकड़न कम करता है, साथ ही पाचन तंत्र से संबंधित सभी परेशानियों से मुक्ति देता है | 
अर्धमत्स्येंद्रासन 

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Wednesday, September 22, 2021

मत्स्यासन करने का सही तरीका और उसके फायदे || The right way and the Benefits of Matsyasana

मत्स्यासन  करने का सही तरीका और उसके फायदे || The right way and the Benefits of Matsyasana

मत्स्यासन 

मत्स्यासन
एक महत्वपूर्ण आसन है जो हठ योग का हिस्सा है | मत्स्यासन जिसमें मत्स्य का अर्थ मछली है और आसन की मुद्रा में आने के बाद आपका शरीर मछली के आकार का होता है | इस योग आसन का अभ्यास करने से शरीर में लचीलापन और ध्यान की समता भर्ती है | इस आसन लगातार अभ्यास करने से आप अपने शरीर में ऊर्जा महसूस करेंगे | यह आसन आपके पूरे शरीर में संतुलन ला सकता है | यदि इस आसन का अभ्यास पानी में किया जाए तो शरीर मछली की तरह महसूस होता है इसलिए इसे मत्स्यासन कहते हैं |

अंग्रेजी नाम 

Fish Pose

मत्स्यासन के अद्भुत फायदे

  • इस आसन से गर्दन और छाती की मांसपेशियों में खिंचाव होता है| और कंधे, गर्दन की मांसपेशियों से टेंशन को मुक्ति मिलती है
  • यह आसन पेट को स्ट्रेच करता है और उसे टोन करता है इससे पेट और कमर में दर्द की समस्या से राहत मिल सकती है |
  • मत्स्यासन पीठ, कंधों और गर्दन की मांसपेशियों को मजबूत करता है |
  • यह आसन कूल्हों के जोड़ों और मांसपेशियों को अच्छा खिंचाव देता है |
  • इस आसन के लगातार अभ्यास से पेट की चर्बी को भी कम किया जा सकता है लेकिन पेट की चर्बी को कम करने के लिए इस आसन में कुछ देर के लिए रुकना अति आवश्यक है जिससे पेट में खिंचाव आए |
  • इस आसन के अभ्यास से छाती चौड़ी होती है जिन लोगों को फेफड़े और साँस से संबंधित रोग हैं उनके लिए यह आसन लाभकारी है |
  • यह आसन पेट की मालिश करता है जिससे यह कब्ज जैसी बीमारियों में भी लाभकारी है |
  • थायराइड के पेशेंट भी इसका लगातार अभ्यास करने से अपना थायराइड सही कर सकते हैं यह उन लोगों के लिए एक रामबाण इलाज है क्योंकि यह थायराइड जैसी परेशानी को जड़ से समाप्त करने की क्षमता रखता है |
  • मत्स्यासन के अभ्यास से गले और पाचन अंगों को अच्छी मसाज मिलती है |
  • मत्स्यासन के लगातार अभ्यास करने से कब्ज, सांस संबंधि बीमारियां, हल्का पीठ दर्द, थकान और बेचैनी जैसी कई परेशानियों से मुक्ति मिल सकती है|
  • बॉडी की एनर्जी को बूस्ट करने और थकान को दूर करने के लिए मत्स्यासन करें |

कैसे करें मत्स्यासन

  • कमर के बल चटाई पर लेट जाएं और अपने हाथों को और पैरों को शरीर के साथ सीधा करें |
  • हाथों को कूल्हों के नीचे और हथेलियां जमीन की तरफ रखें और अपनी कोहनी को अपने शरीर के पास रखें|
  • अपने पैरों की पालथी मार ले या पद्मासन (Padmasana) भी लगा सकते हैं, जांघ और घुटने जमीन पर स्पर्श रखें |
  • सांस अंदर लेते हुए सीने को ऊपर की तरफ उठाएं, सिर को भी ऊपर की तरफ उठाएं और सिर का ऊपरी हिस्सा जमीन को छूता रहेगा |
  • यह ध्यान रखें कि आपका पूरा वजन आपकी कहानियों पर हो ना कि सिर पर |
  • आप जितना अपने सीने को और सिर को ऊपर उठाएंगे उतना ही आपके कंधों की मांसपेशियों पर हल्का दबाव पड़ेगा |
  • सांस की गति सामान्य रखें |
  • जब तक हो सके आसन में रहने की कोशिश करें लंबी गहरी सांस लेते रहें | 
  • सांस बाहर निकालते हुए अपने सीने और सिर को सामान्य स्थिति में वापस लौट आए | फिर धीरे से पैरों को वापस ले आए|
  • इस आसन का अभ्यास 15 से 50 सेकंड तक किया जा सकता है शुरुआत में कम देर इस आसन का अभ्यास करें और फिर धीरे-धीरे समय बढ़ाएं |

सावधानी और चेतावनी

  • अगर घुटनों में ज्यादा दर्द हो तो यह आसन न करें |
  • हर्निया के पेशेंट को यह आसन नहीं करना चाहिए |
  • रीढ़ की किसी भी प्रकार की गंभीर बीमारी से ग्रस्त व्यक्तियों को यह आसन करना चाहिए |
  • यदि आपको किसी भी प्रकार की रक्त-चाप की समस्या है तो यह आसन ना करें |
  • माइग्रेन के पेशेंट को भी मत्स्यासन नहीं करना चाहिए |
  • मत्स्यासन आसन का अभ्यास खाली पेट करना चाहिए |
  • अगर आप शाम को यह आसन कर रहे हैं तो आसन से कम से कम 4 - 6 घंटा पहले भोजन कर ले |

मत्स्यासन के बाद किए जाने वाले आसन

मत्स्यासन के पहले किए जाने वाले आसन

  • वीरासना (Hero Pose)
  • सर्वांगासन (Shoulderstand)
  • हलासना (Bow Pose)
  • कर्णपिडासन (Knee To ear Pose)

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Tuesday, September 21, 2021

धनुरासन करने का सही तरीका और उसके फायदे || The right way and the Benefits of Dhanurasana

धनुरासन करने का सही तरीका और उसके फायदे || The right way and the Benefits of Dhanurasana 

धनुरासन 


 धनुरासन अर्थात धनुष + आसन | इस आसन के अभ्यास के दौरान हमारा शरीर धनुष के आकार का हो जाता है |इसके अभ्यास से आप की रीढ़ की हड्डी हमेशा स्वस्थ रहेगी | यह आसन कमर और रीढ़ की हड्डी के लिए लाभदायक है | यह एक महत्वपूर्ण आसन है जिसे करने के कई फायदे है | इस लेख में हम आपको धनुरासन के अद्भुत फायदे, धनुरासन करने का तरीका, आसन में की जाने वाली सावधानी और चेतावनी, धनुरासन के बाद किए जाने वाले आसन और धनुरासन से पहले किए जाने वाले आसन के बारे में बताएंगे | 

अंग्रेजी नाम 

Bow Pose

धनुरासन के अद्भुत फायदे

  • धनुरासन करने से शरीर की कार्यप्रणाली मजबूत होती है | पेट से जुड़ी जटिल रोग जैसे कि एसिडिटी, गैस, खट्टी डकार और सामान्य पेट दर्द दूर होते हैं | यह आसन पाचन कार्यकौशलता बढ़ाता है |
  • यह आसन रीढ़ की हड्डी को मजबूत और लचीली बनाता है | यह आसन पेट दर्द के लिए रामबाण योग है| अगर आप इसका रोजाना अभ्यास करते हैं तो हमेशा के लिए कमर दर्द की परेशानी से निजात पा सकते है |
  • यह आसन बाजुओं, जांघ और पेट की मांसपेशियों को भी मजबूत करता है |
  • यह आसन अस्थमा रोगियों के लिए बहुत लाभकारी है | इसके अभ्यास से फेफड़ों की क्षमता को बढ़ाया जा सकता है जो अस्थमा रोगियों के लिए बहुत जरूरी है |
  • धनुरासन के अभ्यास से कब्ज,थकान, चिंता और मासिक धर्म में परेशानी को दूर किया जा सकता है |

कैसे करें धनुरासन

  • किसी आसन पर पेट के बल लेट जाएं |
  • घुटनों को मोड़कर कमर के पास लाएं और हाथों से टखनों को टाइट से पकड़े ले |
  • श्वास भरते हुए अपने दोनों घुटनों और छाती को जमीन से ऊपर उठाने का प्रयत्न करें |
  • जितना हो सके अपनी जांघ और छाती को ऊपर उठाने की कोशिश करें |
  • इस आसन के दौरान आपका शरीर धनुष के समान लगेगा |
  • इस आसन में अपने शरीर के साथ ज्यादा जोर जबरदस्ती ना करें| आपका शरीर आपको जितनी इजाजत दे रहा है आप इस आसन को उतना ही करें|
  • श्वास पर ध्यान रखते हुए आसन में स्थिर रहे और चेहरे पर मुस्कान रखें |
  • 15 से 20 सेकंड के लिए मुद्रा में रहे | अभ्यास करते हुए आप इस आसन में रुकने का समय अपने हिसाब से बढ़ा या घटा सकते हैं | 
  • श्वास छोड़ते हुए पैर और छाती को धीरे-धीरे वापस जमीन पर लाएं | टखनों को छोड़ते हुए विश्राम करें |

सावधानी और चेतावनी

  • यदि रीढ़ की हड्डी में चोट या लंबे समय से कोई गंभीर समस्या है तो यह आसन नहीं करना चाहिए |
  • यदि आपको उच्च रक्तचाप(High Blood Pressure), हर्निया(Hernia), कमर दर्द(Back Pain), सिर दर्द(Headaches), माइग्रेन(Migraine), गर्दन में चोट या हाल ही में कोईऑपरेशन हुआ है तो धनुरासन का अभ्यास ना करें |
  • गर्भवती महिलाएं इस आसन का अभ्यास ना करें तथा मासिक धर्म में भी इस आसन का अभ्यास नहीं करना चाहिए |
  • अगर आपको कंधों में किसी प्रकार की परेशानी है या आपके घुटने और कंधों की हड्डियों में किसी प्रकार की चोट है तो इस आसन का अभ्यास ना करें |
  • हृदय से संबंधित समस्याओं से पीड़ित लोगों को इस आसन से नहीं करना चाहिए |
  • भोजन के तुरंत बाद इस आसन का अभ्यास नहीं करना चाहिए |
  • अगर आपको पथरी की शिकायत है तो इस आसन का अभ्यास ना करें |


धनुरासन के बाद किए जाने वाले आसन

धनुरासन के पहले किए जाने वाले आसन

  • उड़ध मुख सवनसाना (Upward-Facing Dog Pose)
  • भुजंगासन ( Cobra Pose)
  • पदमासन ( Lotus Pose)
  • शलभासन ( Locust Pose ) 

Healthy Long Life के इस ब्लॉग पे हम आपको  कुछ ऐसे ही असनो के बारे में बताये गे | ओर जानकारी के लिए हमारे साथ जुड़े रहे और अपनी टिप्पणी देना न भूले |