Wednesday, September 22, 2021

मत्स्यासन करने का सही तरीका और उसके फायदे || The right way and the Benefits of Matsyasana

मत्स्यासन  करने का सही तरीका और उसके फायदे || The right way and the Benefits of Matsyasana

मत्स्यासन 

मत्स्यासन
एक महत्वपूर्ण आसन है जो हठ योग का हिस्सा है | मत्स्यासन जिसमें मत्स्य का अर्थ मछली है और आसन की मुद्रा में आने के बाद आपका शरीर मछली के आकार का होता है | इस योग आसन का अभ्यास करने से शरीर में लचीलापन और ध्यान की समता भर्ती है | इस आसन लगातार अभ्यास करने से आप अपने शरीर में ऊर्जा महसूस करेंगे | यह आसन आपके पूरे शरीर में संतुलन ला सकता है | यदि इस आसन का अभ्यास पानी में किया जाए तो शरीर मछली की तरह महसूस होता है इसलिए इसे मत्स्यासन कहते हैं |

अंग्रेजी नाम 

Fish Pose

मत्स्यासन के अद्भुत फायदे

  • इस आसन से गर्दन और छाती की मांसपेशियों में खिंचाव होता है| और कंधे, गर्दन की मांसपेशियों से टेंशन को मुक्ति मिलती है
  • यह आसन पेट को स्ट्रेच करता है और उसे टोन करता है इससे पेट और कमर में दर्द की समस्या से राहत मिल सकती है |
  • मत्स्यासन पीठ, कंधों और गर्दन की मांसपेशियों को मजबूत करता है |
  • यह आसन कूल्हों के जोड़ों और मांसपेशियों को अच्छा खिंचाव देता है |
  • इस आसन के लगातार अभ्यास से पेट की चर्बी को भी कम किया जा सकता है लेकिन पेट की चर्बी को कम करने के लिए इस आसन में कुछ देर के लिए रुकना अति आवश्यक है जिससे पेट में खिंचाव आए |
  • इस आसन के अभ्यास से छाती चौड़ी होती है जिन लोगों को फेफड़े और साँस से संबंधित रोग हैं उनके लिए यह आसन लाभकारी है |
  • यह आसन पेट की मालिश करता है जिससे यह कब्ज जैसी बीमारियों में भी लाभकारी है |
  • थायराइड के पेशेंट भी इसका लगातार अभ्यास करने से अपना थायराइड सही कर सकते हैं यह उन लोगों के लिए एक रामबाण इलाज है क्योंकि यह थायराइड जैसी परेशानी को जड़ से समाप्त करने की क्षमता रखता है |
  • मत्स्यासन के अभ्यास से गले और पाचन अंगों को अच्छी मसाज मिलती है |
  • मत्स्यासन के लगातार अभ्यास करने से कब्ज, सांस संबंधि बीमारियां, हल्का पीठ दर्द, थकान और बेचैनी जैसी कई परेशानियों से मुक्ति मिल सकती है|
  • बॉडी की एनर्जी को बूस्ट करने और थकान को दूर करने के लिए मत्स्यासन करें |

कैसे करें मत्स्यासन

  • कमर के बल चटाई पर लेट जाएं और अपने हाथों को और पैरों को शरीर के साथ सीधा करें |
  • हाथों को कूल्हों के नीचे और हथेलियां जमीन की तरफ रखें और अपनी कोहनी को अपने शरीर के पास रखें|
  • अपने पैरों की पालथी मार ले या पद्मासन (Padmasana) भी लगा सकते हैं, जांघ और घुटने जमीन पर स्पर्श रखें |
  • सांस अंदर लेते हुए सीने को ऊपर की तरफ उठाएं, सिर को भी ऊपर की तरफ उठाएं और सिर का ऊपरी हिस्सा जमीन को छूता रहेगा |
  • यह ध्यान रखें कि आपका पूरा वजन आपकी कहानियों पर हो ना कि सिर पर |
  • आप जितना अपने सीने को और सिर को ऊपर उठाएंगे उतना ही आपके कंधों की मांसपेशियों पर हल्का दबाव पड़ेगा |
  • सांस की गति सामान्य रखें |
  • जब तक हो सके आसन में रहने की कोशिश करें लंबी गहरी सांस लेते रहें | 
  • सांस बाहर निकालते हुए अपने सीने और सिर को सामान्य स्थिति में वापस लौट आए | फिर धीरे से पैरों को वापस ले आए|
  • इस आसन का अभ्यास 15 से 50 सेकंड तक किया जा सकता है शुरुआत में कम देर इस आसन का अभ्यास करें और फिर धीरे-धीरे समय बढ़ाएं |

सावधानी और चेतावनी

  • अगर घुटनों में ज्यादा दर्द हो तो यह आसन न करें |
  • हर्निया के पेशेंट को यह आसन नहीं करना चाहिए |
  • रीढ़ की किसी भी प्रकार की गंभीर बीमारी से ग्रस्त व्यक्तियों को यह आसन करना चाहिए |
  • यदि आपको किसी भी प्रकार की रक्त-चाप की समस्या है तो यह आसन ना करें |
  • माइग्रेन के पेशेंट को भी मत्स्यासन नहीं करना चाहिए |
  • मत्स्यासन आसन का अभ्यास खाली पेट करना चाहिए |
  • अगर आप शाम को यह आसन कर रहे हैं तो आसन से कम से कम 4 - 6 घंटा पहले भोजन कर ले |

मत्स्यासन के बाद किए जाने वाले आसन

मत्स्यासन के पहले किए जाने वाले आसन

  • वीरासना (Hero Pose)
  • सर्वांगासन (Shoulderstand)
  • हलासना (Bow Pose)
  • कर्णपिडासन (Knee To ear Pose)

Healthy Long Life के इस ब्लॉग पे हम आपको  कुछ ऐसे ही असनो के बारे में बताये गे | ओर जानकारी के लिए हमारे साथ जुड़े रहे और अपनी टिप्पणी देना न भूले | 




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