Saturday, October 30, 2021

वजन बढ़ाने के लिए योग आसन || Yoga asanas for weight gain

      योग सामान्य अर्थ में किसी के शरीर को पोषण करने का सबसे विश्वसनीय और प्रभावी तरीका है | हालांकि आज अधिकतर लोगों का ध्यान वजन कम करने पर होता है, किंतु कुछ लोगों के लिए वजन बढ़ाना भी उतना ही मुश्किल होता है | योग जीवन का एक अविश्वसनीय तरीका है जिसमें वजन बढ़ाना सहित सभी स्वास्थ्य समस्याओं का समाधान है। यह खराब मेटाबॉलिज्म भूख ना लगना और पाचन संबंधी समस्याओं आदि समस्याएं को दूर करता है | कई विशेषज्ञ यह मानते हैं कि योग हमारी मांसपेशियों को मजबूत करने में तथा सहनशक्ति में मदद करता है लेकिन यह जरूरी नहीं  है कि वजन या मांसपेशियों को बढ़ाएं | किंतु नियमित रूप से योग का अभ्यास करने से मांसपेशियों की ताकत तथा सहनशीलता में वृद्धि होती है। आप वजन बढ़ाते हैं या नहीं यह आपके आहर और आपकी संपूर्ण फिटनेस दिनचर्या में अन्य प्रतिरोध-शैली के व्यायाम पर भी निर्भर करता है|

''यह मानना कि योग के अभ्यास से वजन को बढ़ाया नहीं जा सकता यह बिल्कुल गलत है |''

     योग में विभिन्न आसनों और प्राणायाम के अभ्यास के दौरान यह पूरे शरीर में पोषक तत्वों को जमा करते हुए रक्त का और ऑक्सीजन का अच्छे से संचार सुनिश्चित करता है| इस लेख में हम आपको कुछ ऐसे योगासनों के बारे में बताएंगे जो वजन बढ़ाने में बहुत ही ज्यादा मदद करते हैं और साथ ही जिनके अन्य कई लाभ भी हैं|

1. उत्कटासन 

                                                   Girl doing Chair pose

      उत्कटासन को अंग्रेजी भाषा में चेयर पोस्ट(Chair Pose) भी कहते हैं | यह आसन हमारे टखनों, जांघों, पिंडलियों और रीढ़ को मजबूत बनाता है | इस आसन के अभ्यास से कंधों और छाती फैलते हैं और चपटे पैर की समस्या भी कम होती है | यह पेट के अंगों और डायफार्मा को उत्तेजित करता है, हृदय की गति को बढ़ाता है संचार और चायपचय प्रणाली को उत्तेजित करता है यह आसन हमारी जांघों की मांसपेशियों को मजबूत करता है साथ ही यह आसन उन लोगों के लिए बहुत ही लाभदायक है जो खेलकूद में जुड़े रहते हैं या दौड़ भाग में जुड़े रहते हैं |

         दो से तीन महीनों के लगातार अभ्यास से आप देखेंगे कि आपके पैर मजबूत हो गए हैं और अपकी जांघों की मांसपेशियां भी बढ़ रही हैं | इस आसन का अभ्यास शुरुआत में 30 सेकंड से करना चाहिए और धीरे-धीरे इसकी समय सीमा बढ़ाते हुए 1 मिनट तक कर सकते हैं |

2. भुजंगासन

                               Girl doing Cobra pose

भुजंगासन जिसे अंग्रेजी भाषा में कोबरा पोज (Cobra Pose)भी कहते हैं | हालांकि इस आसन के अनेक लाभ हैं जैसे कि यह रक्त परिसंचरण में सुधार करता है, चायपचय को विनियमित करता है, यह आसन हमारी रीड की हड्डी के लिए भी बहुत लाभदायक है और यह पेट से जुड़ी ऐसी अनेक समस्याओं के लिए बहुत भी लाभदायक है जिन पर दवाइयों का असर भी नहीं होता | यह आसन अनेक बीमारियों में बहुत ही लाभदायक है |

3. सूर्य नमस्कार

                                   Girls doing Namaskar Mudra

    जब हमारे पास व्यायाम करने के लिए समय कम होता है तो हम हमेशा ऐसी गतिविधियों की तलाश में रहते हैं जो कम समय में अधिक से अधिक हमारे शरीर की मांसपेशियों और समूहों को लक्षित करते हुए हमारी मदद कर सके | ऐसे ही एक समूह जो शरीर को व्यायाम करने में मदद करता है वह है सूर्य नमस्कार | सूर्य नमस्कार 12 आसनों का एक समूह है | सूर्य नमस्कार एक बेहतरीन कार्डियोवास्कुलर कसरत है |

4. अनुलोम विलोम प्राणायाम

                                                 Girl doing Anulom Vilom

     अनुलोम विलोम योग में एक विशेष प्रकार की श्वसन नियंत्रण करने का प्राणायाम है इसमें श्वसन लेते समय एक नथुने को बंद रखना फिर श्वसन छोड़ते हुए दूसरे नथुने को बंद रखना शामिल है। अर्थात अनुलोम विलोम प्राणायाम में नाक के दाएं छिद्र से सांस खींचते हैं तो बायीं नाक के छिद्र से सांस बाहर निकालते हैं इसी प्रकार यदि नाक के बायीं छिद्र से सांस खींचते हैं तो नाक के दाएं छिद्र से सांस को बाहर निकालते हैं। अनुलोम विलोम प्राणायाम को कुछ योग ग्रंथ में नाड़ी शोधन प्राणायाम भी कहते हैं | इसके नियमित अभ्यास से शरीर की समस्त नाड़ियों का शोधन होता है यानी व स्वच्छ व निरोग बनी रहती है  | यह प्राणायाम हमारे शरीर को समस्त रोगों से निरोग करता है। जिसके तहत हम अपने शरीर में अधिक फुर्ती और ताजगी महसूस कर सकते हैं और यही फुर्ती और ताजगी हमें स्वस्थ रहने में भी सहायता करती है |

5. पवनमुक्तासन

                                                       Girl doing Pavanamuktasana

पवनमुक्तासन उदर के लिए बहुत ही लाभदायक है | यह पेट की कई समस्याओं जैसे कि कब्ज, पाचन, गैस और पेट फूलने की समस्या को आसानी से समाप्त करता है | साथ ही यह उन महिलाओं के लिए बेहतरीन आसन है जिन्हें पीरियड्स नियमित रूप से नहीं होते | पवनमुक्तासन के नाम से ही हमे इसके बारे में अधिक जान सकते हैं अर्थात इस योग की क्रिया द्वारा शरीर से दूषित वायु को शरीर से मुक्त किया जाता है | 

     योग के अभ्यास से शुरुआत में शरीर में कोई महत्वपूर्ण या खास अंतर नहीं दिखाई देता है। इसका लंबे समय तक अभ्यास करने से ही शरीर में फर्क पड़ता है और वजन बढ़ाने के लिए जितनी महत्वपूर्ण भूमिका योग व्यायाम की है उतनी ही महत्वपूर्ण भूमिका सही आहार का सेवन करने की भी है | संतुलित आहार इस बात का अवश्य ध्यान रखें कि वजन बढ़ाने के लिए शरीर को अच्छी स्थिति में रखते हुए अच्छी तरह से पोषित रखें और जंक फूड से बचना चाहिए |

जरूरी यह नहीं वजन कम करना या बढ़ाना प्रेरणा फिट और स्वस्थ रहना होना चाहिए | 

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कपालभाति प्राणायाम करने का तरीका और फायदे || पूर्वोत्तानासन के फायदे  || अस्थमा के लिए योग || मत्स्येन्द्रासन करने का सही तरीका और उसके फायदे













                                                     

     


Tuesday, October 26, 2021

पूर्वोत्तानासन के फायदे || Benefits of Poorvottanasana

 

पूर्वोत्तानासन 

पूर्वोत्तानासन को अंग्रेजी भाषा में अपवर्ड प्लैंक पोज़ (Upward Plank Pose)के रूप में जाना जाता है, यह स्पाइन लिफ्टिंग पोज़ है | पूर्वोत्तानासन का अर्थ है तीव्र पूर्व की ओर मुख वाला खिंचाव | यह शरीर के सामने के हिस्से को एक तीव्र खिंचाव देता है | इसके लिए मजबूत कलाई, टखनो और सबसे महत्वपूर्ण रूप से एक मजबूत कोर की आवश्यकता होती है | इस आसन का अभ्यास नियमित रूप से प्रतिदिन किया जा सकता है | यदि आपको इस आसन को करते समय किसी भी प्रकार की परेशानी आ रही है तो कुर्सी के सहारे अपनी मुद्रा का अभ्यास कर सकते हैं | 

पूर्वोत्तानासन का शाब्दिक अर्थ:-

पूर्वा = पूर्व

उन्ताना = तीव्र खिंचाव

आसन = मुद्रा

English = Upward Plank Pose

पूर्वोत्तानासन करने का तरीका :-

किसी भी आसन को करने के लिए सही तरीके का पता होना बहुत जरूरी है | जिससे होने वाली चोट से बचा जा सकता है और आसन का अधिकतम लाभ पाया जा सकता है | यह पूर्वोत्तानासन को सही तरीके से अभ्यास करने के चरण दिए हुए हैं:-
  • सबसे पहले, अपने योगा मैट पर पैरों को आगे की दिशा में फैला कर जमीन पर सीधे बैठ जाएं |
  • रीढ़ की हड्डी बिल्कुल सीधी करें आराम से कूल्हों की हड्डी से लेकर गर्दन की हड्डी एक ही एलाइनमेंट में बिल्कुल सीधी रखें |
  • हथेलियों को शरीर के बगल में जमीन पर रखें |
  • हाथों को कूल्हों से लगभग 30 सेंटीमीटर पीछे रखें।कोहनियों को सीधा रखें।
  • उंगलियों को कूल्हों की तरफ की ओर इंगित करें। गर्दन को थोड़ा झुकाएं। यह आसन की प्रारंभिक स्थिति है |
  • लंबी गहरी सांस भरते हुए शरीर को ऊपर की दिशा में उठाएं। शरीर पर दबाव डाले बिना जितना हो सके उतना ऊपर उठाएं |
  • शरीर के भार को पैरों और बाजुओं पर संतुलित करें |
  • बाजुओं को फर्श से बिल्कुल सीधा रखें और अपने पैरों के तलवों को जमीन पर दिखाने की कोशिश करें |
  • कोहनियों और घुटनों को टाइट रखें।
  • सिर को पीछे की दिशा में ढीला और नीचे लटकने दे | सामान्य रूप से सांस ले |
  • अब इस मुद्रा में 5-10 बार लंबी गहरी सांस ले | या इस स्थिति में तब तक रहे जब तक यह आरामदायक हो |
  • आदर्श शुरू से, अंतिम स्थिति में शरीर फर्श के समांतर होता है |
  • प्रारंभिक स्थिति में वापस आए। सांस छोड़ते हुए शरीर को धीरे-धीरे नीचे करें। आराम करें और गहरी सांसे लें। 

पूर्वोत्तानासन में किए जाने वाले एहतियाद :-

  • शरीर को उसकी सीमा से अधिक खींचने से बचें क्योंकि इससे मांसपेशियों में खिंचाव की परेशानी हो सकती है |
  • कलाइयों को कंधे के नीचे रखें |
  • कमजोर दिल, कमजोर कलाई या कमजोर टकने, उच्च रक्तचाप, पेट के अल्सर, हर्निया, सर्वाइकल, स्लिप डिस्क, गर्दन का दर्द, घुटने का दर्द, पेट या कंधे में किसी भी प्रकार की चोट -अगर आपको इनमें से किसी भी प्रकार की कोई भी परेशानी है तो इस आसन का अभ्यास नहीं करना चाहिए |
  • अगर आपको कलाई, गर्दन या कंधे में किसी प्रकार की चोट है तो आप संभवत पूर्वोत्तानासन का अभ्यास करने से बचना चाहेंगे तब तक कि आपकी चोट ठीक ना हो जाए।
  • अगर आपको माइग्रेन की परेशानी है तो पूर्वोत्तानासन के अभ्यास से बचें |
  • अगर आपको सिरदर्द, उच्च रक्तचाप या गर्दन पर खिंचाव है तो गर्दन को ना गिराए, इसके बजाय छाती से लगाते हुए मुद्रा करें |
  • अगर आपको सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस है तो बेहतर होगा कि आप इस मुद्रा का अभ्यास ना करें |
  • कंधों को पीछे की ओर घुमाते हुए अपनी छाती को पूरी तरह से खोलें |

पूर्वोत्तानासन से होने वाले लाभ :-

  • यह आसन थायराइड की समस्या को जड़ से समाप्त करने में सहयोग करता है |
  • यह कमर दर्द की समस्या को समाप्त करता है |
  • यह पाचन शक्ति को बढ़ाता है |
  • यह वजन कम करने में सहयोग करता है |
  • इस आसन के अभ्यास से तनाव और चिंता से मुक्ति मिलती है |
  • इस आसन का अभ्यास स्री रोगी सभी विकारों के लिए सहायक होता है|
  • श्वसन प्रणाली को मजबूत करता है जिससे अस्थमा के परेशानी से राहत मिलती है
  • यह आसन निम्न लिखित मांसपेशियों पर बहुत ही प्रभावशाली असर छोड़ता है जो हमारी मांसपेशियों के लिए बहुत ही बेहतर है :-


पूर्वोत्तानासन के अभ्यास से प्रभावित मांसपेशियां :-

  • आपके ट्राइसेप्स को मजबूत करता है।
  • आपके क्वाड्रिसेप्स को मजबूत करता है।
  • आपके हैमस्ट्रिंग को मजबूत करता है।
  • अपनी कलाई के एक्सटेंसर को मजबूत करें।
  • आपके पोस्टीरियर डेल्टोइड्स को मजबूत करता है।
  • आपके ट्रेपेज़ियस को मजबूत करता है।
  • आपके इरेक्टर स्पाइना को मजबूत करता है।
  • आपके ग्लूटस मैक्सिमस को मजबूत करता है।
  • आपके पैरों और कूल्हों के जोड़ को मजबूत करता है।
  • आपके बछड़े (Calf) की मांसपेशियों को मजबूत करता है।
  • आपके पूर्वकाल डेल्टोइड्स को फैलाता है।
  • अपनी कलाई के फ्लेक्सर्स को स्ट्रेच करता है।
  • अपने पेक्टरलिस मेजर (Pectoralis Major) को स्ट्रेच करना है।
  • आपके Psoas पेशी को फैलाता है और खोलता है।
  • अपने पिंडलियों के सामने फैलाया है।
  • उचित ध्यान के साथ यह आपके रेक्टस एब्डोमिनिस और ट्रांसवर्सस एब्डोमिनिस को मजबूत करता है।
  • यह एक बेहतरीन हिप ओपनर है।

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Monday, October 25, 2021

कपालभाति प्राणायाम करने का तरीका और फायदे || Method and benefits of doing Kapalbhati Pranayama

     

     योग की उत्पत्ति प्राचीन भारत में हुई थी और तब से ही यह हमारी संस्कृति का एक महत्वपूर्ण भाग है | पश्चिमी सभ्यता में योग केवल शारीरिक व्यायाम के रूप में अपनाया जाता है, किंतु योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं है | यह आध्यात्मिक, मानसिक और शारीरिक व्यायाम का एक समूह है, जिसका अध्ययन हमारी भलाई के लिए किया जाता है | योग तनाव को कम करता है और अच्छे शारीरिक स्वास्थ्य और मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देता है| आज कई लोग योग का अध्ययन कर रहे हैं | किंतु योग में वह केवल आसन करते हैं योग में जितना महत्वपूर्ण आसान है, उतने ही महत्वपूर्ण प्राणायाम भी है | कपालभाति प्राणायाम एक लोकप्रिय योग प्राणायाम है |
          कपालभाति प्राणायाम के एक प्रकार का श्वास बनाया है जो अच्छे स्वास्थ्य को बढ़ावा देता है| इसका अभ्यास करने से मानसिक स्वास्थ्य और बुद्धि में सुधार होता है। यह एक ही योग तकनीक है, जो आप एक विशेष मुद्रा में बैठते हैं और सांस लेने के व्यायाम करते हैं|
          यह प्राणायाम का एक जटिल रूप है। सटीक होने के लिए, यह तेजी से सांस लेने की तकनीकों का एक सेट है । यह योगिक सांस लेने का व्यायाम आपके शरीर को हानिकारक विषाक्त पदार्थों से मुक्त करता चाहता है| कपालभाती में न्यूनतम प्रयास की आवश्यकता होती है, यह एक बहुत ही तकनीकी क्रिया है जो बहुत सारे लाभों के साथ आती है | इसमें तेजी से सांस लेने की तकनीक में आपके पेट की मांसपेशियों का उपयोग करके धीमी, निष्क्रिय सांस लेना और बलपूर्वक सक्रिय सांस छोड़ना शामिल है| 

कपालभाति करने का तरीका :-

  1.  किसी भी शांत वातावरण में ध्यान मुद्रा में आराम से बैठे |आप सुखासन, पद्मासन या वज्रासन या अपनी पसंद के किसी भी मुद्रा में योग मैट पर आराम से बैठ जाएं। अपनी रीड की हड्डी को सीधा करके आराम से बैठे हाथों को घुटनों पर रखें और हथेलियां आसमान की ओर खुली रखें |
  2. अपने कंधों को आराम दे अपनी आंखें बंद करें और अपने सिर और पेट को सीधा रखें |
  3. अपना सारा ध्यान अपने पेट पर केंद्रित करें और लंबी गहरी सांस लें |
  4. जैसे ही आप सांस छोड़ते हैं अपने पेट को खींचे । अपनी नाभि को पीछे की ओर रीड की ओर खींचे |
  5. पेट की मांसपेशियों की गतिविधियों को महसूस करने के लिए अपना दाहिना हाथ पेट पर रख सकते हैं |
  6. यह अवश्य ध्यान दें जैसे ही आप सांस ले तो पेट बाहर की ओर आना चाहिए और सांस छोड़ते समय अंदर की ओर जाना चाहिए |
  7. कपालभाति प्राणायाम का एक चक्कर पूरा करने के लिए ऐसी 20 सांसे ले | और प्रतिदिन इसके 4 से 5 राउंड करें |
  8. जैसे ही आप नाभि और पेट को आराम देंगे सांस अपने आप आपके फेफड़ों में चली जाएगी |
  9. एक चक्कर पूरा होने के बाद अपनी आंखें बंद रखें और आराम करें और अपने शरीर में संवेदनाओं का निरीक्षण करें |
  10. याद रखें कि आपका ध्यान सांस छोड़ने पर होना चाहिए और कुछ दिनों के लगातार अभ्यास के बाद सांस छोड़ने और सांस लेने की प्रक्रिया स्वचालित और सुचारू हो जाएगी | यह आपको सभी प्रकार के तनाव से मुक्त करता है और आपके दिमाग को उज्जवल करता है | 

कपालभाति प्राणायाम के लाभ :-

  • मस्तिष्क के लिए लाभ यह आपको सभी प्रकार के तनाव से मुक्त करता है और आपके दिमाग को उज्जवल करता है | 
  • कपालभाति प्राणायाम करने से काल वृत्त के घेरे दूर होते हैं |
  • यह एसिडिटी, कब्ज और गैस की परेशानी से छुटकारा दिलाता है |
  • इससे फेफड़ों की क्षमता बढ़ती है और फेफड़े मजबूत बनते हैं |
  • एकाग्रता में सुधार होता है |
  • यह अस्थमा जैसी स्वास्थ की परेशानी से ठीक करता है |
  • बालों के लिए लाभकारी यह बालों का झड़ना रोकता है और समय से पहले बालों को सफेद होने से रोकता है। लगातार अभ्यास करने से इससे सफेद बाले भी काले होते हैं |
  • त्वचा के लिए लाभकारी यह आपकी त्वचा के स्वास्थ्य में सुधार करता है और आपको एक चमकदार त्वचा देता है | 
  • यह प्राणायाम रक्त संचार को बेहतर करने में मदद करता है |
  • यह पाचन में सुधार करता है |
  • यह उपापचय मे सुधार करता है और जिससे वजन घटाने में मदद मिलती है |
  • यह योगासन किडनी और लीवर की कार्यप्रणाली में सुधार करता है |
  • इसका अभ्यास करने से शरीर में कैल्शियम की वृद्धि होती है जिससे हड्डियां मजबूत होती हैं |
  • यह शरीर में ऊर्जा स्तर बढ़ता है |
  • इस प्राणायाम का अभ्यास करने से अनिद्रा की समस्या भी दूर होती है |
  • यह प्राणायाम महिलाओं के मासिक धर्म चक्र को नियमित कर सकता है और मानसिक धर्म के ऐठन को राहत दे सकता है |
  • इस प्राणायाम करने से रक्त में CO2 के स्तर को कम करने में मदद करता है जिससे शरीर में ऑक्सीजन के स्तर को बढ़ाने में मदद मिलती है |
  • कपालभाति प्राणायाम करने से विषाक्त पदार्थ और अन्य अपशिष्ट पदार्थ शरीर से निकलते हैं |
  • कपालभाति प्राणायाम करने से श्वास व्यायाम अस्थमा और साइनस को ठीक करने में मदद करती है |
  • यह मस्तिष्क की कोशिकाओं को सक्रिय करता है जिससे यथाशक्ति और एकाग्रता शक्ति में सुधार होता है साथ ही यह चिंता और तनाव को दूर करने की एक विशेष तकनीक है | वैसे तो कपालभाति प्राणायाम के कई फायदे हैं किंतु कुछ लोगों में इसके कुछ दुष्प्रभाव भी देखे गए हैं और इन दुष्प्रभाव को हम नजरअंदाज नहीं कर सकते आपको कपालभाति करने से पहले किसी योग विशेषज्ञ और अपने डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए कपालभाति प्राणायाम करने के कुछ दुष्प्रभाव इस प्रकार है

कपालभाति प्राणायाम के दुष्प्रभाव :-

     वैसे तो कपालभाति प्राणायाम के कई फायदे हैं किंतु कुछ लोगों में इसके कुछ दुष्प्रभाव भी देखे गए हैं और इन दुष्प्रभावों को हम नजरअंदाज नहीं कर सकते | आपको कपालभाति करने से पहले किसी योग विशेषज्ञ और अपने डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए | कपालभाति प्राणायाम करने के कुछ दुष्प्रभाव इस प्रकार है :-

  • यह हर्निया और उक्त रक्तचाप का कारण बन सकता है |
  • यह आपको उबकाई ला सकता है |
  • शुरुआत में इस प्राणायाम को करने के बाद आपको सिर दर्द हो सकता है |
  • इससे आपका मुंह सूख सकता है |
  • इससे पसीनो में वृद्धि हो सकती है |

कपालभाति करते समय एहतियाद :-

  • गर्भवती महिलाओं को इस प्राणायाम का अभ्यास नहीं करना चाहिए |
  • मासिक धर्म के दौरान महिलाओं को इस प्राणायाम का अभ्यास नहीं करना चाहिए |
  • कपालभाति प्राणायाम का अभ्यास सुबह सुबह खाली पेट करना चाहिए |
  • कपालभाति कैसे किया जाता है यह जाने बिना कपालभाती का प्रयास ना करें | यह सुनिश्चित करने के लिए कि आप कपालभाती का अभ्यास करने के लिए पर्याप्त रूप से फिट है, पहले स्वास्थ्य जांच करवाएं और अपने चिकित्सक से अनुमति प्राप्त करने के बाद किसी योग विशेषज्ञ और चिकित्सक से तकनीक सीखे |
  • अगर आप किसी भी प्रकार के हृदय रोग से पीड़ित हैं तो इसका अभ्यास ना करें |
  • कपालभाति अल्सर की परेशानी को बढ़ाता है और यदि आपको अल्सर है तो तकनीक का अवश्य ध्यान दें और अपने चिकित्सक और योग शिक्षक से भी जांच लें कि आपके लिए यह सुरक्षित है या नहीं |
  • कपालभाती का अभ्यास करने से पहले, आपको बुनियादी प्राणायाम तकनीको को सीखना आवश्यक है और उसमें कुशल बनना चाहिए | ऐसा इसलिए है क्योंकि कपालभाति एक उन्नत प्राणायाम तकनीक है और बिना उचित ज्ञान के इसे आजमाने से फायदे से ज्यादा नुकसान हो सकते हैं|
  • अस्थमा, घरघराहट या ब्रोंकाइटिस जैसी सांस की समस्या से पीड़ित लोगों को सांस के व्यायाम करते समय सावधानी बरतनी जरूरी है |
  • अगर आपको स्लिप डिस्क की परेशानी है तो आपको कपालभाति प्राणायाम का अभ्यास नहीं करना चाहिए जिनको लोगो को स्टेंट होता है उन्हें कपालभाति प्राणायाम करने से बचना चाहिए |

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Thursday, October 21, 2021

अस्थमा के लिए योग || Yoga for Asthma

      आज के समय में अस्थमा सबसे आम सांस रोगो में से एक है | और साथ ही दुनिया भर में महंगी दवाइयां ही एक  मात्र बीमारी का इलाज है | बाजार में मिलने वाली दमा रोधी दवाई महंगी होती है और उसके कई बुरे प्रभाव भी होते हैं | यह महंगी दवाइयां दमा की परेशानी को पूर्ण रूप से समाप्त भी नहीं करती हैं | अगर आपको अस्थमा है तो आप अकेले नहीं हैं आज दुनिया भर में लगभग 300 मिलियन लोगों को दमा की परेशानी है | 

     अस्थमा एक सूजन संबंधी बीमारी है जिसमें सांस लेने में कठिनाई होती है खांसी, सीने में जकड़न घरघराहट होती है और आजकल के प्रदूषित हवा के कारण यह बीमारी ना केवल वृद्ध लोगों को  बल्कि जवान लोगों को भी हो रही है | पर्यावरण और आनुवंशिक कारकों के कारण अस्थमा एक दीर्घकालीन समस्या है जो फेफड़ों के वायु मार्ग को सुजा देती है | व्यायाम के नियमित अभ्यास से हम इस परेशानी से राहत पा सकते हैं, लेकिन शारीरिक गतिविधियां इस स्थिति से पीड़ित लोगों के लिए एक चुनौती हो सकती है | ऐसे में योग एक उचित उपाय है | धीमी गति से किया जाने वाला योग ना केवल अस्थमा के लक्षणों को दूर करेगा बल्किआप के फेफड़ों को मजबूत और स्वस्थ भी बनाएगा | योग अस्थमा से राहत प्रदान करने में मदद कर सकता है और इससे कई अन्य स्वास्थ्य लाभ भी हो सकते हैं |

    इस लेख का मुख्य उद्देश्य है कि दमा के रोगियों को योगा के ऐसे प्रभावशाली योगासन के बारे में बताना जो ना केवल उन्हें इस परेशानी से राहत देंगे बल्कि इस परेशानी को जड़ से समाप्त करेंगे |


1 नाडी शोधन प्राणायाम 

नाडी मानव शरीर में ऊर्जा चैनल है जो विभिन्न कारणों से अवरुद्ध हो सकते हैं | नाड़ी शोधन प्राणायाम एक सांस लेने की तकनीक है जो इन अवरुद्ध ऊर्जा चैनल को साफ करने में मदद करती है | अपने मन को शांत करने और संचित तनाव से शरीर को मुक्त करने के लिए इस प्राणायाम का अभ्यास करें | इस श्वास तकनीक का श्वसन और संचार संबंधी कई समस्याओं पर उपचारात्मक प्रभाव पड़ता है |

2. कपालभाति 

Girl doing pranayama

कपालभाति श्वास तकनीक मन को शांत करती है और तंत्रिका तंत्र को सक्रिय करती है यह सभी नाड़ियों को साफ करती है और रक्त संचार भी सुधारती है | कपालभाति स्वास्थ तकनीक के उन्नत अभ्यास का मध्यवर्ती है जो आपकी छाती को मजबूत करता है, आपके पेट के अंगों को साफ करता है और आपके संचार के साथ-साथ तंत्रिका तंत्र को भी सक्रिय करता है |

3. अर्ध मत्स्येन्द्रासन

Girl doing Ardha Matsyendrasana


अर्ध मत्स्येन्द्र आसन रीढ़ में लचीलापन और मजबूती पैदा करने के लिए सबसे अच्छे योगासनों में से एक है | यह तनाव खराब मुद्रा या एक ही स्थिति में लंबे समय तक बैठने के कारण कठोर गर्दन और पीठ की तनाव को शांत करता है | अर्ध मत्स्येन्द्र आसन छाती को खोलता है और फेफड़ों को ठीक करने की स्थिति में सुधार करता है जिससे अस्थमा की समस्या कम होती है |

4. पवनमुक्तासन

अर्ध मत्स्येन्द्रासन हठयोग में सबसे अच्छे और सबसे महत्वपूर्ण आसनों में से एक है | इसके बड़े मात्रा में लाभ है | जो शरीर की सभी प्रणालियों को कवर करता है | यह मुद्रा अस्थमा से पीड़ित लोगों के लिए बहुत ही अच्छी है क्योंकि यह पेट के अंगों की मालिश करती है और पाचन और गैस को छोड़ने में मदद करती है |

5. सेतुबंध आसन

Girl doing bridge pose


सेतुबंध आसन छाती और फेफड़ों को खोलता है और थायराइड की समस्या को कम करता है | यह पाचन में भी सुधार करता है और अस्थमा के रोगियों के लिए बहुत ही उपयोगी है | सेतुबंध आसन में हमारे मन और शरीर के बीच तालमेल रखने में मदद मिलती है | जैसे पुल का काम ट्रैफिक और तनाव को कम करना है ऐसे ही यह आसन भी हमारे शरीर में टेंशन कम कम करने में मदद करता है |

6.  भुजंगासन



भुजंगासन छाती का विस्तार करता है, रक्त परिसंचरण में सुधार करता है और अस्थमा वाले लोगों के लिए अत्यधिक अनुशंसित है | भुजंगासन रीड की गतिशीलता को बढ़ाता है रीड की हड्डी को सहारा देने वाली मांसपेशियों को मदद करता है और पेट दर्द में राहत दिलाने में मदद कर सकता है यह छाती और शरीर के सामने सामने की मांसपेशियों को खोलता है जिससे स्वास्थ्य संबंधित परेशानी से राहत मिलती है |

7. अधो मुख संवासना

Girl doing Adho Mukha Svanasana)


 अधो मुख संवासना योग के सबसे प्रसिद्ध आसन है | योग में सबसे प्रसिद्ध आसन होने का कारण यह है कि समकालीन अभ्यास में बहुत महत्वपूर्ण है | जब आप योग का अभ्यास शुरू करते हैं तो यह पहली मुद्रा हो सकती है जिसमें आप अपनी मांसपेशियों को खोलते हुए महसूस करेंगे | अधिकतर अग्रिम आसनों को करवाने से पहले इस आसन का अभ्यास अवश्य करवाया जाता है | यह आसन मन को शांत करता है और तनाव से रह देता है और अस्थमा और साइनसिसिस से पीड़ित लोगों के लिए उपयोगी है |

8. बधाकोनासन

Girl doing badhakonasana

बधाकोनासन एक ऐसा आसान है जिसमें अपना 5 मिनट से भी कम समय लगाना और आप इससे अपने घर में ही आराम प्राप्त कर सकते हैं यह आसन आपके जांघों की मांसपेशियों को सभी प्रकार के तनाव से राहत देती है | बधाकोनासन  रक्त परिसंचरण को उत्तेजित और सुधारता है, थकान से राहत देता है और अस्थमा पर चिकित्सकीय प्रभाव डालता है |

9. पूर्वोत्तानासन

पूर्वोत्तानासन  शरीर के सामने के हिस्से को एक तीर्थ खिंचाव देता है | पूर्वोत्तानासन  सबसे जोरदार बुनियादी योग मुद्रा है | इसके लिए मजबूत कलाई टखनों और सबसे महत्वपूर्ण रूप से एक मजबूत कोर की आवश्यकता होती है | नियमित अभ्यास से आप आज से इस मुद्रा का अभ्यास करने के लिए आवश्यक शक्ति को आसानी से विकसित कर सकते हैं | पूर्वोत्तानासन श्वसन प्रणाली में सुधार करता है, थायराइड की समस्या को समाप्त करता है, और कलाई, हाथ, पीठ और रीढ़ की हड्डियों को मजबूत करता है |

10. मत्स्यासन 

Girl doing matsyasana
मत्स्यासन आसन उर्जा के स्तर को बढ़ाने, चिंता को दूर करने और हृदय को खोलने के लिए उपयोगी है | यह अष्टांग योग के प्राथमिक श्रृंखला का हिस्सा है और अक्सर हठयोग में सर्वांगासन के लिए एक प्रति रूप में किया जाता है यह आसान स्वास्थ संबंधित परेशानियों में भी राहत देता है और यह फेफड़ों की अन्य कई परेशानियों से भी राहत देता है |

Monday, October 18, 2021

खड़े होकर किए जाने वाले योग मुद्रा || Standing Yoga Pose In Hindi

        खड़े होकर किए जाने वाले योग मुद्रा मे शक्ति और लचीलापन दोनों की आवश्यकता होती है, यह हठ योग अभ्यास का एक प्रमुख भाग है | यह आसन आमतौर पर अन्य की तुलना में कुछ कम समय के लिए अभ्यास किए जाते हैं | एक योग्य योग प्रशिक्षक को ढूंढना सबसे अच्छा है, जो आपको खड़े होने वाले योग आसन के सिधाई को सिखाने के लिए है | खड़े होकर किए जाने वाले योग मुद्रा के कई फायदे हैं |  
        योग में अनेक खड़े होकर किए जाने वाले आसन हैं जिनमें से करीब 21 प्राथमिक खड़े होकर किए जाने वाले आसन है| नीचे दिए गए चित्र और नाम  के आधार पर खड़े होकर किए जाने वाले योगासन की हमारी सूची देखें |

1. पादहस्तासन

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Asana Name :-    Padahastasana

Sanskrit Name :-   पादहस्तासन

English Name :- Hand To Feet Pose


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Asana Name :-     Adho Mukha Svanasana 
Sanskrit Name :-   
 अधोमुख श्वानासन
English Name :-        
Downward Facing Dog



Asana Name :-   Utkatasana 
Sanskrit Name :-  
उत्कटासन 
English Name :-  
Chair Pose



4. गरुड़ासन

Asana Name :-  Garudasana 
Sanskrit Name :-   
गरुड़ासन 
English Name :-   
Eagle Pose


5. उत्थिता हस्त पदंगुष्ठासन  

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Asana Name :-  Utthita Hasta Padangusthasana
Sanskrit Name :-     
उत्थिता हस्त पदंगुष्ठासन
English Name :-      
Extended Hand-to-big-toe pose


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Asana Name :-      Utthita Parsvakonasana 
Sanskrit Name :-   
उत्थिता पार्श्वकोणासन 
English Name :-    
Extended Side Angle Pose



7. त्रिकोणासन

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Asana Name :-    Trikonasana 
Sanskrit Name :-     
त्रिकोणासन
English Name :-    
Triangle Pose



8. मलासना 

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Asana Name :-     Malasana 
Sanskrit Name :-    
मलासना 
English Name :-     
Garland Pose

  

9. अंजनेयासन  

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Asana Name :-           Anjaneyasana 
Sanskrit Name :-       
अंजनेयासन   
English Name :-    
Crescent Moon



10. कोनासन

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Asana Name :-   Konasana 
Sanskrit Name :-    
कोनासन 
English Name :-    
Sideways Bending Pose   


11. कटिचाक्रासन 


Asana Name :-   Katichakrasana 
Sanskrit Name :-  
कटिचाक्रासन   
English Name :-   
Standing Spinal Twist Pose


12. अर्ध चक्रासन

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Asana Name :-    Ardha Chakrasana
Sanskrit Name :-      
अर्ध चक्रासन
English Name :-    
Standing Backward Bend Pose



13. वीरभद्रासन

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Asana Name :-     Virabhadrasana 
Sanskrit Name :-     
वीरभद्रासन
English Name :-   
Warrior Pose



14. प्रसार पादहस्तासन 

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Asana Name :-   Prasarita Padahastasana
Sanskrit Name :-    
प्रसार पादहस्तासन
English Name :-   
Standing Forward Bend with Feet Apart Pose



15. वृक्षासन 

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Asana Name :-   Vrikshasana
Sanskrit Name :-    
वृक्षासन 
English Name :-   
 Tree Pose

16. नटराजसन  

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Asana Name :-     Natarajasana 
Sanskrit Name :-       
नटराजसन  
English Name :-          
Lord of the Dance



17. ताड़ासन    


Asana Name :-     Tadasana   
Sanskrit Name :-      
ताड़ासन   
English Name :-          
 Mountain Pose



18. दुर्वासासन    

Asana Name :-    Durvasasana    
Sanskrit Name :-   
दुर्वासासन    
English Name :-      
Durvasa's Pose

19. त्रिविक्रमासन   

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Asana Name :-  Trivikramasana    
Sanskrit Name :-   
त्रिविक्रमासन 
English Name :-   
  Standing Splits


                   

20. अर्ध चंद्रासन

Asana Name :-    Ardha Chandrasana
Sanskrit Name :-     
अर्ध चंद्रासन
English Name :-   
 Half Moon Pose

21. पार्श्वोत्तानासन 

Asana Name :-    Parshvottanasana    
Sanskrit Name :-    
पार्श्वोत्तानासन 
English Name :-   
 Intense Side Stretch 





Friday, October 8, 2021

मत्स्येन्द्रासन करने का सही तरीका और उसके फायदे || The right way and the Benefits of Matsyendrasana


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मत्स्येन्द्रासन 

          मत्स्येन्द्रासन संस्कृत भाषा से लिया गया है| यह आसन बैठकर किया जाता है | इसके अभ्यास करने से शरीर की मुद्रा में सुधार होता है तथा पाचन तंत्र को बेहतर करने के लिए यह बहुत ही सरल आसन है | मत्स्येन्द्रासन के तीन मुख्य गुण है | यह मन, शरीर और आत्मा को उत्तेजित करता है | यदि आप तनाव महसूस कर रहे हैं | और एक ही स्थिति में काम करने से कठोर महसूस कर रहे हैं | या यदि आप बस एक कार्य दिवस में अंत में आराम करना चाहते हैं तो बैठे हुए बोर्ड के कुछ मिनट ठीक वहीं आराम पा सकते हैं | जिसकी आपको आवश्यकता हो सकती है|

मत्स्येन्द्रासन  :- Ardha Matsyendrasana 

Meaning :- Ardha -  Half ; Matsyendra - king of the fish ; Asana - Pose
English Name :- Half Spinal Twist Pose
         मत्स्येन्द्रासन हठयोग में सबसे अच्छी और सबसे महत्वपूर्ण आसनों में से एक है | इसके बहुत सारे लोग हैं जो शरीर के सभी अंगों को प्रभावित करते हैं | जैसा कि पूर्ण मत्स्येन्द्रासन करने में थोड़ा कठिन है इसलिए हम पहले अर्ध मत्स्येन्द्रासन का अभ्यास करेंगे |
         यदि आप यह यह सोच रहे हैं कि यह आसन कैसे करें यह मार्गदर्शिका आपके लिए हैं |

कैसे करें मत्स्येन्द्रासन 

  1. मत्स्येन्द्रासन आसन करने के लिए अपने अपनी चटाई पर दोनों पैरों को सीधा करके बैठ जाएं और पैरों को साथ में रखें, की हड्डी सीधी रखें |
  2. अब लंबी गहरी सांस लेते हुए बाएं पैर को मोडे और बाएं पैर के की एड़ी दाहिने के पास रखें | 
  3. दाहिने पैर को बाएं घुटने के ऊपर ले जाएं \
  4. बाएं हाथ को दाएं घुटने के ऊपर और दाएं हाथ को अपने पीछे रखें |
  5. इसी तरह अपने कमर, कंधे और गर्दन को दाएं ओर मोड़े  और दाएं कंधे के ऊपर अपनी ठोड़ी को रखें |
  6. धीरे-धीरे अपनी कमर को सीधा करने की कोशिश करें |
  7. इस आसन में थोड़ी देर रुके और लंबी गहरी सांस ले और लंबी गहरी सांस छोड़ें |
  8. वापस आने के लिए सांस छोड़ते हुए पहले दाहिने हाथ छोड़े फिर कमर फिर छाती अंत में गर्दन को आराम से सीधा करें |
  9. एक ही प्रक्रिया दूसरी तरफ भी दोहराएं |
  10. इस आसन का अभ्यास करते समय यह जरूर ध्यान रखें कि आप आसन का अभ्यास बहुत धीरे करें क्योंकि तेज गति से आपकी गर्दन या आपके पीठ के निचले हिस्से में चोट लग सकती है |
        इस आसन के अभ्यास के दौरान सांसो पर ध्यान देना अति आवश्यक है |  जैसे कि जब आप शरीर को अंतिम मुद्रा में मोड़ते हैं तो सुनिश्चित करें कि आप सांस छोड़ते हैं सांस छोड़ने से आपको झुकने में अधिक मदद मिलेगी | और जब आपका आसान पूरा हो जाता है तो आप पूरी तरह सांस छोड़ते हैं और मोड़ से अपना संतुलन पाते हैं तो सामान्य रूप से सांस लेना शुरू करें | और जो आप मूल मुद्रा में वापस आए तो धीरे-धीरे और गहरी सांस लें |

     इस आसन का अभ्यास आप 30 सेकंड से 2 मिनट तक कर सकते हैं |

सावधानी और चेतावनी

यदि इस आसन में आपको अपने पैर पकड़ने में या किसी और कदम में आपको इसी प्रकार की कोई परेशानी है तो आप इन बातों का ध्यान रख सकते हैं |
  • यदि आपकी पीठ की किसी प्रकार की कोई सर्जरी हुई है तो इस आसन का अभ्यास करने से बचना चाहिए|
  • यह आसन गर्भवती महिलाओं के लिए उचित नहीं है |
  • पेट में कोई गंभीर बीमारी हो तो इस आसन का अभ्यास नहीं करें |
  • पेप्टिक अल्सर और हर्निया से पीड़ित लोगों को का अभ्यास नहीं करना चाहिए |
  • हल्के कमर दर्द के लिए यह आसन उपयोगी हो सकता है किंतु गंभीर दर्द में का अभ्यास करना उचित नहीं है |

मत्स्येन्द्रासन के अद्भुत फायदे

  1. मत्स्येन्द्रासन रीढ़ की हड्डी लचीली बनाता है |
  2. मत्स्येन्द्रासन फेफड़ों की ऑक्सीजन की आपूर्ति पूरी करता है |
  3. यह आसन पीठ के दर्द और कठोरता में राहत देता है |
  4. यह आसन आपके पाचन तंत्र को नियंत्रण करता है और इस प्रकार पाचन में यह सुधार करता है|
  5. यह मेरुदंड को मजबूत करता है और उसमें लचीलापन बढ़ाता है |
  6. इस आसन का अभ्यास करने से शरीर की मुद्रा में सुधार होता है |
  7. यह कब्ज से बचने के लिए बहुत ही अच्छा उपाय है |
  8. यह आसन कंधे, गर्दन और कूल्हों को मजबूत करता है |
  9. यह जांघों की आंतरिक मांसपेशियों में खिंचाव देता है जिससे उसे आवश्यकता होती है |
  10. यह रीढ़ की सामान्य घुमाओ को बनाए रखने में सहायता करता है जिससे इसकी प्राकृतिक संरेखण बनी रहती है |
  11. पीठ के निचले हिस्से की मांसपेशियों को मुक्त करता है और पीठ के निचले हिस्से के दर्द से राहत देता है |
  12. चिंता और तनाव जैसी परेशानियों से मुक्ति पाने में सहयोग करता है |
  13. साइटिका और स्लिप डिस्क के रोगियों के लिए यह रामबाण इलाज है |
  14. मत्स्येन्द्रासन आसन मन को शांत करने में मदद करता है, और आप तनावमुक्त महसूस कर बेहतर नींद ले पाते हैं |

मत्स्येन्द्रासन के बाद किए जाने वाले आसन

  • पश्चिमोत्तानासन (Paschimottanasana)
  • जानू सिरसासन (Janu sirsasana)

मत्स्येन्द्रासन के पहले किए जाने वाले आसन

  • बधा कोणासन (Baddha Konasana)
  • सुप्त पदंगुष्ठासन (Supta padangusthasana)
  • विरासन (Virasana)

    Healthy Long Life के इस ब्लॉग पे हम आपको  कुछ ऐसे ही असनो के बारे में बताये गे | ओर जानकारी के लिए हमारे साथ जुड़े रहे और अपनी टिप्पणी देना न भूले | 


    Monday, October 4, 2021

    अधोमुख श्वानासन करने का सही तरीका और उसके फायदे || The right way and the Benefits of Adho Mukha Svanasana

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    अधोमुख श्वानासन


        अधोमुख श्वानासन हिंदी में अधोमुख संवासन कहते हैं | योग के अभ्यास में यह बहुत ही आम आसन है | योगा के छात्रों को शुरुआत में इस आसन का अभ्यास करने में चुनौती हो सकती है | किंतु बहुत जल्द ही यह छात्रों का सबसे प्रिय आसनों में से एक आसन बन जाता है | क्योंकि यह मांसपेशियों को बहुत ही आसानी से खोलता है और साथ ही कई बड़े आसनों का अभ्यास करने के लिए भी यह आसन बहुत ही उत्तम है |

    अधोमुख श्वानासन :- Adhomukha Svanasana

    Meaning :- Adho -  Forward ; Mukha - Face ; Svana- Dog ; Asana - Pose
    English Name :- Downward facing Dog Pose. 

    अधोमुख श्वानासन के अद्भुत फायदे

    • इस आसन के अभ्यास से पूरा शरीर हाथ, कंधे, पेट और पैर मजबूत होते हैं | 
    • यह मन को शांत करता है |
    • रक्त संचार बेहतर करता है |
    • यह आसन रीढ़ की हड्डी में खिंचाव से शरीर के विभिन्न अंगों में ऑक्सीजन की आपूर्ति में सुधार करता है |
    • इस आसन के अभ्यास के दौरान आपका शरीर उल्टी V की स्थिति में है | इसका अर्थ है आपका ह्रदय आपके सिर के ऊपर है | इससे आपके सिर में रक्त का प्रभाव बेहतर होता है | इस योगासन का रोजाना अभ्यास करने से आपको ऊर्जा मिलती है |
    • इस आसन का लगातार अभ्यास करने से हमारे शरीर की मुद्रा में सुधार होता है |
    • यह आसन बैक बैंडिंग और फॉरवर्ड बेंडिंग के आसन के बीच में रीड की हड्डी को आराम देने के लिए एक बेहतरीन मुद्रा है |
    • यह आसन ना केवल रीढ़ की हड्डियों के लिए बल्कि बछड़ों (Calves) और हैमस्ट्रिंग (Hamstrings) मांसपेशियों को मजबूत करता है |
    • यह असर कमर के निचले भाग के दर्द में राहत देने के लिए बहुत ही उपयोगी माना जाता है

    कैसे करें अधोमुख श्वानासन

    • अधोमुख श्वानासन आसन करने के लिए अपने योग कटाई पर मार्जारियासन (Marjariasana) में आ जाएं | इस आसन में अपनी कलाइयों को कंधों के नीचे और घुटनों को कूल्हों (Hips)के नीचे रखें |
    • आप अपने पैरों को और अपने हाथों को सीधा करते हुए और सांस को छोड़ते हुए (Hips)कूल्हों को ऊपर उठाएं, आसन पूर्ण होने पर आपका शरीर उल्टी V के आकार का बनेगा |
    • हाथ और पैर की उंगलियां सीधे आगे की ओर इशारा करते हुए फैलाएं और अग्र-भुजाओं (Forearms) से  नीचे की और उंगलियों तक पहुंचाएं |
    • कानों को भीतरी भुजाओं से छूकर गर्दन को लंबा रखें | कॉलर बोन को चौड़ा करने के लिए अपनी ऊपरी भुजाओं को बाहर की और घूमाए |
    • अपने हाथों को जमीन में दबाएं और नाभि की और देखें | अपने सिर को लटकने दे और और अपने कंधों के ब्लेड को अपने कानों से दूर अपने कूल्हों की ओर ले जाए |
    • मुद्रा में आने के बाद लंबी गहरी सांस ले |
    •  सांस छोड़ते हुए घुटनों को मोड़ मार्जारियासन (Marjariasana) और में आ जाएं और आराम करें |




    सावधानी और चेतावनी
    • इस आसन का अभ्यास गर्भवती महिलाएं नहीं कर सकती |
    • अगर आपकी कलाई में किसी प्रकार की पुरानी चोट है तो इस आसन का अभ्यास ना करें |
    • यदि आपको उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, रीड की हड्डी में किसी प्रकार की परेशानी है तो इस आसन का अभ्यास ना करें |

    अधोमुख श्वानासन के बाद किए जाने वाले आसन

    • चतुरंगा धंडासन
    • उर्ध्व मुख संवासना

    अधोमुख श्वानासन के पहले किए जाने वाले आसन

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