Monday, October 25, 2021

कपालभाति प्राणायाम करने का तरीका और फायदे || Method and benefits of doing Kapalbhati Pranayama

     

     योग की उत्पत्ति प्राचीन भारत में हुई थी और तब से ही यह हमारी संस्कृति का एक महत्वपूर्ण भाग है | पश्चिमी सभ्यता में योग केवल शारीरिक व्यायाम के रूप में अपनाया जाता है, किंतु योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं है | यह आध्यात्मिक, मानसिक और शारीरिक व्यायाम का एक समूह है, जिसका अध्ययन हमारी भलाई के लिए किया जाता है | योग तनाव को कम करता है और अच्छे शारीरिक स्वास्थ्य और मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देता है| आज कई लोग योग का अध्ययन कर रहे हैं | किंतु योग में वह केवल आसन करते हैं योग में जितना महत्वपूर्ण आसान है, उतने ही महत्वपूर्ण प्राणायाम भी है | कपालभाति प्राणायाम एक लोकप्रिय योग प्राणायाम है |
          कपालभाति प्राणायाम के एक प्रकार का श्वास बनाया है जो अच्छे स्वास्थ्य को बढ़ावा देता है| इसका अभ्यास करने से मानसिक स्वास्थ्य और बुद्धि में सुधार होता है। यह एक ही योग तकनीक है, जो आप एक विशेष मुद्रा में बैठते हैं और सांस लेने के व्यायाम करते हैं|
          यह प्राणायाम का एक जटिल रूप है। सटीक होने के लिए, यह तेजी से सांस लेने की तकनीकों का एक सेट है । यह योगिक सांस लेने का व्यायाम आपके शरीर को हानिकारक विषाक्त पदार्थों से मुक्त करता चाहता है| कपालभाती में न्यूनतम प्रयास की आवश्यकता होती है, यह एक बहुत ही तकनीकी क्रिया है जो बहुत सारे लाभों के साथ आती है | इसमें तेजी से सांस लेने की तकनीक में आपके पेट की मांसपेशियों का उपयोग करके धीमी, निष्क्रिय सांस लेना और बलपूर्वक सक्रिय सांस छोड़ना शामिल है| 

कपालभाति करने का तरीका :-

  1.  किसी भी शांत वातावरण में ध्यान मुद्रा में आराम से बैठे |आप सुखासन, पद्मासन या वज्रासन या अपनी पसंद के किसी भी मुद्रा में योग मैट पर आराम से बैठ जाएं। अपनी रीड की हड्डी को सीधा करके आराम से बैठे हाथों को घुटनों पर रखें और हथेलियां आसमान की ओर खुली रखें |
  2. अपने कंधों को आराम दे अपनी आंखें बंद करें और अपने सिर और पेट को सीधा रखें |
  3. अपना सारा ध्यान अपने पेट पर केंद्रित करें और लंबी गहरी सांस लें |
  4. जैसे ही आप सांस छोड़ते हैं अपने पेट को खींचे । अपनी नाभि को पीछे की ओर रीड की ओर खींचे |
  5. पेट की मांसपेशियों की गतिविधियों को महसूस करने के लिए अपना दाहिना हाथ पेट पर रख सकते हैं |
  6. यह अवश्य ध्यान दें जैसे ही आप सांस ले तो पेट बाहर की ओर आना चाहिए और सांस छोड़ते समय अंदर की ओर जाना चाहिए |
  7. कपालभाति प्राणायाम का एक चक्कर पूरा करने के लिए ऐसी 20 सांसे ले | और प्रतिदिन इसके 4 से 5 राउंड करें |
  8. जैसे ही आप नाभि और पेट को आराम देंगे सांस अपने आप आपके फेफड़ों में चली जाएगी |
  9. एक चक्कर पूरा होने के बाद अपनी आंखें बंद रखें और आराम करें और अपने शरीर में संवेदनाओं का निरीक्षण करें |
  10. याद रखें कि आपका ध्यान सांस छोड़ने पर होना चाहिए और कुछ दिनों के लगातार अभ्यास के बाद सांस छोड़ने और सांस लेने की प्रक्रिया स्वचालित और सुचारू हो जाएगी | यह आपको सभी प्रकार के तनाव से मुक्त करता है और आपके दिमाग को उज्जवल करता है | 

कपालभाति प्राणायाम के लाभ :-

  • मस्तिष्क के लिए लाभ यह आपको सभी प्रकार के तनाव से मुक्त करता है और आपके दिमाग को उज्जवल करता है | 
  • कपालभाति प्राणायाम करने से काल वृत्त के घेरे दूर होते हैं |
  • यह एसिडिटी, कब्ज और गैस की परेशानी से छुटकारा दिलाता है |
  • इससे फेफड़ों की क्षमता बढ़ती है और फेफड़े मजबूत बनते हैं |
  • एकाग्रता में सुधार होता है |
  • यह अस्थमा जैसी स्वास्थ की परेशानी से ठीक करता है |
  • बालों के लिए लाभकारी यह बालों का झड़ना रोकता है और समय से पहले बालों को सफेद होने से रोकता है। लगातार अभ्यास करने से इससे सफेद बाले भी काले होते हैं |
  • त्वचा के लिए लाभकारी यह आपकी त्वचा के स्वास्थ्य में सुधार करता है और आपको एक चमकदार त्वचा देता है | 
  • यह प्राणायाम रक्त संचार को बेहतर करने में मदद करता है |
  • यह पाचन में सुधार करता है |
  • यह उपापचय मे सुधार करता है और जिससे वजन घटाने में मदद मिलती है |
  • यह योगासन किडनी और लीवर की कार्यप्रणाली में सुधार करता है |
  • इसका अभ्यास करने से शरीर में कैल्शियम की वृद्धि होती है जिससे हड्डियां मजबूत होती हैं |
  • यह शरीर में ऊर्जा स्तर बढ़ता है |
  • इस प्राणायाम का अभ्यास करने से अनिद्रा की समस्या भी दूर होती है |
  • यह प्राणायाम महिलाओं के मासिक धर्म चक्र को नियमित कर सकता है और मानसिक धर्म के ऐठन को राहत दे सकता है |
  • इस प्राणायाम करने से रक्त में CO2 के स्तर को कम करने में मदद करता है जिससे शरीर में ऑक्सीजन के स्तर को बढ़ाने में मदद मिलती है |
  • कपालभाति प्राणायाम करने से विषाक्त पदार्थ और अन्य अपशिष्ट पदार्थ शरीर से निकलते हैं |
  • कपालभाति प्राणायाम करने से श्वास व्यायाम अस्थमा और साइनस को ठीक करने में मदद करती है |
  • यह मस्तिष्क की कोशिकाओं को सक्रिय करता है जिससे यथाशक्ति और एकाग्रता शक्ति में सुधार होता है साथ ही यह चिंता और तनाव को दूर करने की एक विशेष तकनीक है | वैसे तो कपालभाति प्राणायाम के कई फायदे हैं किंतु कुछ लोगों में इसके कुछ दुष्प्रभाव भी देखे गए हैं और इन दुष्प्रभाव को हम नजरअंदाज नहीं कर सकते आपको कपालभाति करने से पहले किसी योग विशेषज्ञ और अपने डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए कपालभाति प्राणायाम करने के कुछ दुष्प्रभाव इस प्रकार है

कपालभाति प्राणायाम के दुष्प्रभाव :-

     वैसे तो कपालभाति प्राणायाम के कई फायदे हैं किंतु कुछ लोगों में इसके कुछ दुष्प्रभाव भी देखे गए हैं और इन दुष्प्रभावों को हम नजरअंदाज नहीं कर सकते | आपको कपालभाति करने से पहले किसी योग विशेषज्ञ और अपने डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए | कपालभाति प्राणायाम करने के कुछ दुष्प्रभाव इस प्रकार है :-

  • यह हर्निया और उक्त रक्तचाप का कारण बन सकता है |
  • यह आपको उबकाई ला सकता है |
  • शुरुआत में इस प्राणायाम को करने के बाद आपको सिर दर्द हो सकता है |
  • इससे आपका मुंह सूख सकता है |
  • इससे पसीनो में वृद्धि हो सकती है |

कपालभाति करते समय एहतियाद :-

  • गर्भवती महिलाओं को इस प्राणायाम का अभ्यास नहीं करना चाहिए |
  • मासिक धर्म के दौरान महिलाओं को इस प्राणायाम का अभ्यास नहीं करना चाहिए |
  • कपालभाति प्राणायाम का अभ्यास सुबह सुबह खाली पेट करना चाहिए |
  • कपालभाति कैसे किया जाता है यह जाने बिना कपालभाती का प्रयास ना करें | यह सुनिश्चित करने के लिए कि आप कपालभाती का अभ्यास करने के लिए पर्याप्त रूप से फिट है, पहले स्वास्थ्य जांच करवाएं और अपने चिकित्सक से अनुमति प्राप्त करने के बाद किसी योग विशेषज्ञ और चिकित्सक से तकनीक सीखे |
  • अगर आप किसी भी प्रकार के हृदय रोग से पीड़ित हैं तो इसका अभ्यास ना करें |
  • कपालभाति अल्सर की परेशानी को बढ़ाता है और यदि आपको अल्सर है तो तकनीक का अवश्य ध्यान दें और अपने चिकित्सक और योग शिक्षक से भी जांच लें कि आपके लिए यह सुरक्षित है या नहीं |
  • कपालभाती का अभ्यास करने से पहले, आपको बुनियादी प्राणायाम तकनीको को सीखना आवश्यक है और उसमें कुशल बनना चाहिए | ऐसा इसलिए है क्योंकि कपालभाति एक उन्नत प्राणायाम तकनीक है और बिना उचित ज्ञान के इसे आजमाने से फायदे से ज्यादा नुकसान हो सकते हैं|
  • अस्थमा, घरघराहट या ब्रोंकाइटिस जैसी सांस की समस्या से पीड़ित लोगों को सांस के व्यायाम करते समय सावधानी बरतनी जरूरी है |
  • अगर आपको स्लिप डिस्क की परेशानी है तो आपको कपालभाति प्राणायाम का अभ्यास नहीं करना चाहिए जिनको लोगो को स्टेंट होता है उन्हें कपालभाति प्राणायाम करने से बचना चाहिए |

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