Wednesday, November 3, 2021

मधुमेह के लिए योग || Yoga for Diabetes

     योग एक लोकप्रिय अभ्यास है जिससे बहुत से लोग अपने स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद पाते हैं | एक प्रकार का व्यायाम होने के साथ-साथ यह तनाव और चिंता को भी कम कर सकता है | योग आपके शरीर और दिमाग को आराम देने के अलावा और भी बहुत सी बीमारियों में उपयोग आता है | खासकर यदि आप मधुमेह के साथ जी रहे हैं तो कुछ आसन मधुमेह के स्तर को कम करने में मदद करते हैं साथ ही परिसंचरण में सुधार भी पड सकता हैं जिससे कई विशेषज्ञ मधुमेह प्रबंधन के लिए योग की सलाह देते हैं |

     इसके नियमित अभ्यास से मधुमेह की अन्य जटिलताओं जैसे हृदय संबंधी समस्याएं,छाती में दर्द, दिल का दौरा, आघात, धमनियों का सिकुड़ना, गुर्दे की बीमारी और आदि की संभावना को कम करने में भी मदद करता है | कई अध्ययनों के अनुसार टाइप 2 मधुमेह के रोगियों में रक्त संकरा के स्तर को कम करने में योग अधिक मददगार हो सकता है। मधुमेह के प्रबंधन के लिए योग शिक्षकों द्वारा निम्नलिखित कुछ आसन महत्वपूर्ण बताए गए हैं |

     मधुमेह के मरीजों के लिए सबसे अच्छी बात यह है कि योग किसी भी उम्र के व्यक्ति कर सकते हैं और इसका नियमित अभ्यास करने से अन्य परेशानी भी नहीं होती  |

     योग में मधुमेह को कम करने के लिए कौन से आसनों का अभ्यास करना चाहिए यह जानने के लिए इस लेख को पूरा पढ़ें |


1. विपरीत करणी

                                    
     विपरीत करणी आसन पुनस्थापनात्मक उल्टा विश्राम की अनुमति देता है | यह तनाव व चिंता के स्तर को कम करने में मदद करता है | जो बदले में रक्तचाप और मधुमेह के स्तर को कम करने में मदद कर सकता है | यह सिरदर्द को दूर करता है, पैरों के दर्द को दूर करता है, ऊर्जा को बढ़ावा देने और परिसंचरण को मजबूत बनाने में भी मदद कर सकता है | यह आसन बालों से जुड़ी समस्याएं जैसे कि बाल झड़ना, सफेद बाल, और गंजापन जैसी कई समस्याओं से भी राहत देता है | 
     इस आसन की सबसे खास बात यह है कि इस आसन का अभ्यास किसी भी उम्र के लोग कर सकते हैं अर्थात वृद्ध से वृद्ध लोग भी इसका अभ्यास नियमित रूप से बड़ी आसानी से और अकेले कर सकते हैं |

2.  बद्धकोणासन 

                                       
     इस आसन को सरल भाषा में तितली आसन भी कहते हैं | इस मुद्रा में हमारे पैर व जांघ तितली की मुद्रा में होती है | यह आसन तंत्रिका तंत्र को शांत करने में मदद करती है | यह महिलाओं में मासिक धर्म से जुड़ी कई समस्याओं से राहत देती है | यह मुद्रा जांघों की चर्बी अधिक चर्बी को कम करके उसे प्राकृतिक आकृति में लाती है | यह आसन पेट के अंगों पर भी काफी गहरा प्रभाव डालती है इस आसन के नियमित अभ्यास से मधुमेह की परेशानी समाप्त होती है | यह आसन घुटनों के दर्द के रोगियों के लिए एक रामबाण इलाज है |

3. पश्चिमोत्तानासन

                                  
     पश्चिमोत्तानासन बैठ के किए जाने वाला आसन है | यह आसन शुरुआती अभ्यास के लिए विद्यार्थियों को करवाया जाता है | इसका तंत्रिका तंत्र पर गहरा प्रभाव डालता है जो तानाव और हल्के अवसाद को दूर करने में मदद करता है | इस बात से तो हम अच्छी तरह से परिचित है कि योग मन और शरीर को आराम देने का एक शानदार तरीका है और यह आपके चितित मन को शांत करने, तनाव और चिंता को दूर करने में मदद करता है। जबकि आपको कई शारीरिक लाभ में भी मदद करता है |
     यह आसन अग्न्याशय अंग पर बहुत गहरा असर डालता है जिस कारण मधुमेह की परेशानी जड़ से समाप्त होती है |
     यह आसन पैल्विक मांसपेशियां,खड़ा रखने वाला मेरुदंड, ग्लूटस मेक्सीमस, जठराग्न,  जैसी कई मांसपेशियों पर भी प्रभाव डालता है |

4. सर्वांगासन

                                               
     सर्वांगासन में हमारा पूरा शरीर हमारे कंधों पर संतुलित होता है | सर्वांगासन आपके शरीर के सभी अंगों के कामकाज को प्रभावित करता है यह अनशन मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को बनाए रखने में अत्यधिक फल फायदेमंद है और कई पुस्तकों में इसे आसनों की माता या आसनों की रानी भी कहा गया है | आसन में हमारा रक्त संचार हमारी बॉडी से विपरीत दिशा में अर्थात सिर की और होता है | यह आसन अग्न्याशय अंग के लिए बहुत ही अच्छा आसन है |
     यह आसन रेक्टस एब्डोमिनिस, त्रपेजियस, रोटेटर कफ, चतुशिरस्क, जैसी कई मांसपेशियों पर भी प्रभाव डालता है |

5. हलासन

                                           
     हल आसन हठयोग प्रदीपिका में एक उल्टा आसन और व्यायाम के रूप में आधुनिक योगासन है | यह आसन थायराइड ग्लैंड को उत्तेजित करने, परिसंचरण को बढ़ाने और तनाव को कम करने में मदद करता है | इसके चिकित्सीय प्रभाव पीठ दर्द, सिर दर्द और अनिद्रा को दूर करने में भी मदद करते हैं | इस आसन के नियमित अभ्यास से मधुमेह की परेशानी और थायराइड की परेशानी जड़ से समाप्त हो जाती है |
     यह आसन रोटेटर कफ, हैमस्ट्रिंग, त्रपेजियस, स्पाइनल एक्सटेंसर, जैसी मांसपेशियों पर प्रभावी असर डालता है |

6. भुजंगासन

                                     

     भुजंगासन सूर्य नमस्कार के 12 मुख्य आसनों में से एक महत्वपूर्ण आसन है | यह आसन मुख्य रूप से कमर और कंधों की मांसपेशियों पर असर देता है पर साथ ही यह पेट की मांसपेशियों तथा पाचन तंत्र पर भी असर देता है | यह पाचन तंत्र के सभी अंगों की अच्छे से मालिश करता है जिसके कारण पाचन तंत्र से संबंधित सभी समस्याएं समाप्त होती है यह आसन मधुमेह की परेशानी के लिए भी बहुत ही बेहतरीन आसन है |
     यह आसन ग्लूटस मेक्सीमस, ट्रिपेप्स ब्रेची, स्पाइनल एक्सटेंसर, चतुशिरस्क, हैमस्ट्रिंग जैसी मांसपेशियों पर प्रभावी असर डालता है|

7. धनुरासन

                             
     धनुरासन उल्टा लेट कर किए जाने वाला आसन है | यह आसन पेट के बल लेटकर किया जाता है यह आसन अग्रिम मुद्रों में से एक महत्वपूर्ण आसन है | यह आसन पेट की सभी समस्याओं को समाप्त करता है। यह पाचन तंत्र को सुचारू रूप से चलाता है और मधुमेह की परेशानी को भी समाप्त करता है | यह बैग बैंडिंग आपकी छाती को खोलता है और आपके पेट के अंगों को उत्तेजित करता है। यह आसन कब्ज और सांस की बीमारियों में राहत दिला सकता है |
     यह आसन ग्लूटस मेक्सीमस, हैमस्ट्रिंग, चतुशिरस्क, अंसपेशी मेजर जैसी मांसपेशियों पर प्रभावी असर डालता है |

8. मत्स्येंद्रासन

                                              
     मत्स्येन्द्रासन बैठते हुए मोड़ कर किए जाने वाला आसन है | जिसका अभ्यास शरीर की मुद्रा में सुधार और पाचन तंत्र को बहाल करने के लिए किया जाता है | यह आसन रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाए रखने में सहायता कर है | यह आपके पाचन तंत्र को नियंत्रित करता है और इस प्रकार पाचन में सुधार करता है तथा मधुमेह की परेशानी समाप्त करता है |
     यह आसन समचतुर्भुज, धड़ की अग्रवर्ती मांसपेशी, खड़ा रखने वाला मेरुदंड, अंसपेशी मेजर, Psoas मांसपेशियों  जैसी मांसपेशियों पर प्रभावी असर डालता है |

9. सुप्त मत्स्येन्द्रासन

                                      
     सुप्त मत्स्येन्द्रासन पेट के अंगों को उत्तेजित करने में मदद करती है जिससे रक्त में शक्कर के स्तर को कम करने में मदद मिल सकती है | यह मुद्रा आपकी जीत पीठ और गुणों में दर्द और जकड़न को कम करने में भी मदद कर सकती है | सुप्त मत्स्येन्द्रासन अनेक कोमल मोड़ है जो पेट के अंगों की मालिश करता है,पेट  और अग्न्याशय की मदद करता है, पाचन की सुविधा देता है और कब्ज को कम करता है। यह ब्लूटूथ और पीठ को फैलाता है कूल्हों में रिलीज की अनुमति देता है और तंग कंधों को खोलता है |
     यह आसन खड़ा रखने वाला मेरुदंड,  रेक्टस एब्डोमिनिस, त्रपेजियस, अंसपेशी मेजर जैसी मांसपेशियों पर प्रभावी असर डालता है|
                                              

10. बालासन 

                         
     बालासन सभी आयु वर्ग के लिए एक योग्य योगासन है। इसे वह लोग बड़ी आसानी से कर सकते हैं जिन्होंने योग करने की शुरुआत की है। बालासन अक्सर योगा सीखने वाले लोगों के लिए पहला आसन होता है। इस आसन को करने में अधिक परेशानी नहीं होती। इस आसन का अभ्यास अक्सर योग सत्र के कठिन आसनो के बीच में सिलेक्ट करने के लिए किया जाता है | यह आसन एक आराम की मुद्रा होने के साथ-साथ यह पाचन तंत्र के अंगों की मालिश करता है और मधुमेह की समस्या को बड़ी आसानी से समाप्त करता है | यह पीठ और गर्दन के दर्द, तनाव और थकान को दूर करने में भी मदद करता है |
     यह आसन ग्लूटस मेक्सीमस, रोटेटर मांसपेशियां, हैमस्ट्रिंग, स्पाइनल एक्सटेंसर जैसी मांसपेशियों पर प्रभावी असर डालता है |

"मधुमेह को प्रबंधित करने का प्रयास करना कठिन है क्योंकि यदि आप ऐसा नहीं करते हैं, तो इसके परिणाम आपको जीवन में बाद में भुगतने होंगे।"      --ब्रायन एडम्स

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